20 अक्टूबर 2026
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नंदीग्राम उपचुनाव: कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की अंतरिम जमानत 25 नवंबर तक बढ़ी

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नंदीग्राम उपचुनाव: कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की अंतरिम जमानत 25 नवंबर तक बढ़ी

सारांश

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने नंदीग्राम उपचुनाव के कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की जमानत एक दिन पहले 25 नवंबर तक बढ़ा दी। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय पहले ही राज्य सरकार को हाईकोर्ट की शरण लेने का निर्देश दे चुका है।

मुख्य बातें

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 20 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की अंतरिम जमानत 25 नवंबर 2026 तक बढ़ाई।
न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम रॉय की एकल जज वेकेशन बेंच ने यह आदेश पारित किया।
प्रधान की पूर्व जमानत अवधि 21 अक्टूबर को समाप्त होने वाली थी; उन्हें हल्दिया जिला अदालत में समर्पण करना था।
सर्वोच्च न्यायालय पहले ही राज्य सरकार को आगे की कार्यवाही के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय जाने का निर्देश दे चुका है।
पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष सुवंकर सरकार ने आदेश का स्वागत करते हुए पार्टी की न्यायपालिका में आस्था दोहराई।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार रहे मिलन प्रधान की अंतरिम जमानत की अवधि 25 नवंबर 2026 तक बढ़ा दी। यह आदेश उस दिन आया जब उनकी पूर्व जमानत अवधि केवल एक दिन बाद — 21 अक्टूबर को — समाप्त होने वाली थी।

न्यायालय का आदेश

न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम रॉय की एकल जज वेकेशन बेंच ने यह आदेश पारित किया। मिलन प्रधान को पूर्वी मेदिनीपुर जिले के हल्दिया स्थित जिला अदालत में 21 अक्टूबर को आत्मसमर्पण करना था, किंतु उच्च न्यायालय के इस ताज़ा आदेश ने उनकी जमानत को नई अवधि तक जारी रखा।

पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी न्यायमूर्ति रॉय के आदेश का हवाला देते हुए एक आधिकारिक प्रेस बयान जारी किया।

मामले की पृष्ठभूमि

मिलन प्रधान को सर्वप्रथम नंदीग्राम उपचुनाव में भाग लेने के लिए 29 सितंबर तक की अंतरिम जमानत दी गई थी। बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने भी कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश में कोई हस्तक्षेप नहीं किया। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह आगे की कार्यवाही के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय का ही दरवाज़ा खटखटाए।

गौरतलब है कि यह मामला महज़ एक उम्मीदवार की जमानत तक सीमित नहीं — यह पश्चिम बंगाल की जटिल राजनीतिक परिस्थितियों का प्रतिबिंब भी है, जहाँ न्यायिक प्रक्रिया और चुनावी राजनीति आपस में उलझी हुई हैं।

राजनीतिक समीकरण

मिलन प्रधान ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में उपचुनाव लड़ा, और उन्हें तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उस गुट का समर्थन प्राप्त था, जिसका नेतृत्व पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी करते हैं।

यह राजनीतिक समर्थन तब मिला जब TMC की मूल उम्मीदवार संचिता डे प्रधान ने पश्चिम बंगाल के मौजूदा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ एक बैठक के बाद आखिरी क्षण में अपना नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार को खुलकर समर्थन देने की घोषणा की।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष सुवंकर सरकार ने अदालत के इस ताज़ा आदेश पर संतोष व्यक्त करते हुए पत्रकारों से कहा कि पार्टी को न्यायिक व्यवस्था पर पूर्ण विश्वास है और वह आगे भी मिलन प्रधान की कानूनी लड़ाई जारी रखेगी।

आगे क्या होगा

अब 25 नवंबर 2026 तक का समय मिलन प्रधान और उनकी कानूनी टीम के लिए निर्णायक रहेगा। इस अवधि में उच्च न्यायालय में मामले की अगली सुनवाई और संभावित नियमित जमानत की अर्जी पर फ़ैसला होने की उम्मीद है। यह देखना बाकी है कि राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार कलकत्ता उच्च न्यायालय में किस रुख के साथ पेश होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिलन प्रधान कौन हैं और उन्हें जमानत क्यों मिली है?
मिलन प्रधान नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार रहे हैं, जिन्हें किसी आपराधिक मामले में हिरासत में लिया गया था। उपचुनाव में भाग लेने के लिए उन्हें सबसे पहले 29 सितंबर तक की अंतरिम जमानत मिली थी, जिसे बाद में बढ़ाया जाता रहा है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने जमानत कब तक बढ़ाई है?
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 20 अक्टूबर 2026 को मिलन प्रधान की अंतरिम जमानत 25 नवंबर 2026 तक बढ़ा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम रॉय की एकल जज वेकेशन बेंच ने पारित किया।
सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में क्या रुख अपनाया?
सर्वोच्च न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के अंतरिम जमानत आदेश में कोई हस्तक्षेप नहीं किया। उसने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह आगे की कार्यवाही के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय का ही दरवाज़ा खटखटाए।
नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी ने कांग्रेस को समर्थन क्यों दिया?
तृणमूल कांग्रेस की मूल उम्मीदवार संचिता डे प्रधान ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद आखिरी क्षण में नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की।
मामले में आगे क्या होने की संभावना है?
25 नवंबर 2026 तक की अवधि में कलकत्ता उच्च न्यायालय में मामले की अगली सुनवाई होने की उम्मीद है। इस दौरान मिलन प्रधान की कानूनी टीम नियमित जमानत के लिए अर्जी दे सकती है, जबकि राज्य सरकार का अगला कदम सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के आलोक में तय होगा।
राष्ट्र प्रेस
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