24 सितंबर 2026
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नंदीग्राम उपचुनाव: कलकत्ता हाई कोर्ट ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को अंतरिम जमानत देने का संकेत दिया

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नंदीग्राम उपचुनाव: कलकत्ता हाई कोर्ट ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को अंतरिम जमानत देने का संकेत दिया

सारांश

नंदीग्राम उपचुनाव की तारीख नजदीक आते ही कलकत्ता हाई कोर्ट ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को अंतरिम जमानत देने का संकेत दिया — 18 सितंबर की गिरफ्तारी के बाद यह बड़ी राहत है। लेकिन राज्य सरकार डिवीजन बेंच पहुँच चुकी है और शुक्रवार की दोहरी सुनवाई तय करेगी कि 6 अक्टूबर के मतदान से पहले प्रधान प्रचार कर पाएंगे या नहीं।

मुख्य बातें

जस्टिस तीर्थंकर घोष ने 24 सितंबर 2026 को संकेत दिया कि वे कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 2007 के हत्या मामले में अंतरिम जमानत देंगे; अंतिम आदेश 25 सितंबर को।
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने राज्य पुलिस को 12 अक्टूबर तक प्रधान पर कोई नया मामला दर्ज करने से रोका।
पश्चिम बंगाल सरकार ने सिंगल बेंच के आदेश को चीफ जस्टिस रवींद्र विट्ठलराव घुगे की डिवीजन बेंच में चुनौती दी; सुनवाई शुक्रवार को।
प्रधान को 18 सितंबर को गिरफ्तार किया गया — TMC द्वारा कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा के कुछ घंटों बाद।
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव 6 अक्टूबर को; नतीजे 9 अक्टूबर को।

कलकत्ता हाई कोर्ट की सिंगल जज बेंच ने 24 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वह पूर्वी मिदनापुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को अन्य उम्मीदवारों की ही भाँति स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की अनुमति दे। जस्टिस तीर्थंकर घोष ने प्रारंभिक टिप्पणी में कहा कि वे 2007 के एक हत्या मामले में प्रधान को अंतरिम जमानत देंगे, हालाँकि अंतिम आदेश शुक्रवार, 25 सितंबर को शाम 4 बजे होने वाली सुनवाई के बाद पारित किया जाएगा।

मामले की पृष्ठभूमि और हिरासत की स्थिति

मिलन प्रधान वर्तमान में पश्चिम बंगाल की जिला अदालतों के आदेशों के तहत दो अलग अलग मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं। 2007 के हत्या मामले में उन्हें 3 अक्टूबर तक और एक अन्य मामले में 5 अक्टूबर तक रिमांड पर भेजा गया था। प्रधान को 18 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था — यह गिरफ्तारी उसी दिन हुई जब पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने घोषणा की थी कि उनकी पार्टी नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करेगी।

गौरतलब है कि यह ऐलान TMC की नंदीग्राम उम्मीदवार संचिता डे प्रधान द्वारा अपना नामांकन वापस लेने के कुछ ही समय बाद आया था। 2007 का हत्या मामला नंदीग्राम में जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान का है, जो तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार — दिवंगत बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व में — के समय का है।

न्यायालय का निर्देश और समानांतर कार्यवाही

जस्टिस घोष ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "मैं उन्हें अंतरिम जमानत दे रहा हूँ। उन्हें उपचुनाव में हिस्सा लेने दें। बाकी सब मामले के नतीजे पर निर्भर करेगा।" प्रधान ने बुधवार को दोनों मामलों में जमानत की अर्जी लेकर जस्टिस घोष की बेंच का दरवाजा खटखटाया था, जिस पर गुरुवार दोपहर सुनवाई हुई।

इससे पहले उसी दिन जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल जज बेंच ने राज्य पुलिस को 12 अक्टूबर तक मिलन प्रधान के विरुद्ध कोई नया मामला दर्ज करने या उनके खिलाफ अग्रिम कार्रवाई करने से रोक दिया।

राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और डिवीजन बेंच में चुनौती

पश्चिम बंगाल सरकार ने सिंगल जज के आदेश को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच का रुख किया है, जिसकी अध्यक्षता चीफ जस्टिस रवींद्र विट्ठलराव घुगे कर रहे हैं। इस मामले पर शुक्रवार, 25 सितंबर को चीफ जस्टिस की बेंच में सुनवाई निर्धारित है। यह कानूनी दाँव पेंच इस बात को रेखांकित करता है कि राज्य सरकार की सिंगल बेंच के आदेश को उच्च स्तरीय बेंच से पलटवाने की कोशिश जारी है।

उपचुनाव का कार्यक्रम और राजनीतिक महत्व

नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव 6 अक्टूबर 2026 को होंगे और नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। नंदीग्राम सीट का अपना ऐतिहासिक महत्व है — यह वही क्षेत्र है जहाँ 2007 में जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को बदलकर रख दिया था। TMC के समर्थन की घोषणा के बाद इस सीट पर कांग्रेस TMC के अनौपचारिक गठजोड़ बनाम विरोधी ताकतों के बीच मुकाबला और तीखा हो गया है।

अब सभी की नजरें शुक्रवार की दोहरी सुनवाई — सिंगल बेंच का अंतिम जमानत आदेश और डिवीजन बेंच की सुनवाई — पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि मिलन प्रधान 6 अक्टूबर के मतदान से पहले चुनाव प्रचार में उतर पाएंगे या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और कलकत्ता हाई कोर्ट की त्वरित सुनवाई यह दर्शाती है कि न्यायपालिका ने भी इसे गंभीरता से लिया है। राज्य सरकार का सिंगल बेंच के आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती देना बताता है कि कानूनी लड़ाई मतदान तक खिंच सकती है। असली सवाल यह है कि क्या पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रतिद्वंद्वियों पर पुराने मुकदमों को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की परंपरा एक बार फिर दोहराई जा रही है — और क्या न्यायिक हस्तक्षेप इस बार पर्याप्त समय पर आएगा।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को क्यों गिरफ्तार किया गया?
मिलन प्रधान को 18 सितंबर 2026 को 2007 के एक हत्या मामले में गिरफ्तार किया गया, जो नंदीग्राम के जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़ा है। यह मामला तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के समय का है।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने मिलन प्रधान के बारे में क्या कहा?
जस्टिस तीर्थंकर घोष ने 24 सितंबर को संकेत दिया कि वे प्रधान को 2007 के हत्या मामले में अंतरिम जमानत देंगे और राज्य सरकार को उन्हें उपचुनाव लड़ने देने का निर्देश दिया। अंतिम आदेश 25 सितंबर शाम 4 बजे के बाद आएगा।
नंदीग्राम उपचुनाव कब होगा और इसमें कौन कौन उम्मीदवार हैं?
नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों के उपचुनाव 6 अक्टूबर 2026 को हैं और नतीजे 9 अक्टूबर को आएंगे। नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को तृणमूल कांग्रेस (TMC) का समर्थन मिला है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को क्यों चुनौती दी?
राज्य सरकार ने सिंगल जज बेंच के आदेश के खिलाफ चीफ जस्टिस रवींद्र विट्ठलराव घुगे की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच का दरवाजा खटखटाया है। इस पर 25 सितंबर को सुनवाई होगी।
TMC ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन क्यों किया?
TMC की नंदीग्राम उम्मीदवार संचिता डे प्रधान द्वारा नामांकन वापस लेने के बाद, ममता बनर्जी ने घोषणा की कि TMC कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन करेगी। यह अनौपचारिक गठजोड़ नंदीग्राम सीट पर विपक्षी ताकत को एकजुट करने की रणनीति मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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