24 सितंबर 2026
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नंदीग्राम उपचुनाव: कलकत्ता हाई कोर्ट ने मिलन प्रधान पर नई कार्रवाई से पुलिस को रोका, 12 अक्टूबर तक रोक

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नंदीग्राम उपचुनाव: कलकत्ता हाई कोर्ट ने मिलन प्रधान पर नई कार्रवाई से पुलिस को रोका, 12 अक्टूबर तक रोक

सारांश

नंदीग्राम उपचुनाव: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान पर नई पुलिस कार्रवाई से 12 अक्टूबर तक रोक लगाई। प्रधान पहले से दो मामलों में जेल में हैं; गिरफ्तारी ममता बनर्जी के समर्थन ऐलान के घंटों बाद हुई थी, जिससे राजनीतिक विवाद छिड़ा है।

मुख्य बातें

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 24 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल पुलिस को मिलन प्रधान के खिलाफ नए मामलों में 12 अक्टूबर 2026 तक कार्रवाई से रोका।
मिलन प्रधान दो मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं — पहले में 3 अक्टूबर तक और दूसरे में 5 अक्टूबर तक।
गिरफ्तारी 18 सितंबर 2026 की शाम हुई — ममता बनर्जी के कांग्रेस उम्मीदवार समर्थन ऐलान के कुछ घंटे बाद।
नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव 6 अक्टूबर को होंगे; नतीजे 9 अक्टूबर को।
पत्नी अर्पिता प्रधान ने गिरफ्तारी के समय पर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए; राज्य सरकार ने लंबित वारंट तामील बताया।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 24 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल पुलिस को कांग्रेस के नंदीग्राम उपचुनाव उम्मीदवार मिलन प्रधान के विरुद्ध किसी भी नए मामले में प्राथमिकी दर्ज करने अथवा गिरफ्तारी दिखाने से फिलहाल रोक दिया है। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने यह आदेश तब पारित किया जब प्रधान पहले से दो पृथक मामलों में जिला अदालतों के आदेश पर न्यायिक हिरासत में हैं।

मुख्य घटनाक्रम

मिलन प्रधान को 18 सितंबर 2026 की शाम गिरफ्तार किया गया था। 2007 के एक हत्या मामले में उन्हें 3 अक्टूबर तक तथा एक अन्य प्रकरण में 5 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। अब उच्च न्यायालय की रोक के चलते इन दोनों मामलों के अतिरिक्त राज्य पुलिस 12 अक्टूबर 2026 तक कोई नई कार्रवाई नहीं कर सकती।

चुनावी पृष्ठभूमि और राजनीतिक संदर्भ

नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों के लिए उपचुनाव 6 अक्टूबर 2026 को होने हैं और मतगणना 9 अक्टूबर को निर्धारित है। प्रधान की गिरफ्तारी कुछ ही घंटे पहले हुई थी, जब पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री तथा तृणमूल कांग्रेस (TMC) गुट की नेता ममता बनर्जी ने घोषणा की थी कि वे नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करेंगी। गौरतलब है कि यह ऐलान TMC की अपनी उम्मीदवार संचिता डे प्रधान द्वारा नामांकन अचानक वापस लेने के तुरंत बाद आया था, जो इस वर्ष की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनाव में हार के बाद विपक्षी एकता की दिशा में एक उल्लेखनीय संकेत माना जा रहा है।

परिजनों और राज्य सरकार के परस्पर विरोधी दावे

प्रधान की पत्नी अर्पिता प्रधान ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो संदेश पोस्ट कर गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "कांग्रेस द्वारा पार्टी उम्मीदवार के तौर पर उनके नाम की घोषणा किए जाने के तुरंत बाद मेरे पति को गिरफ्तार कर लिया गया। वे नियमित रूप से वोट देने जाते थे और त्योहारों के समय इलाके में ही रहते थे। इतने लंबे समय तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया। अब, कांग्रेस द्वारा उन्हें उपचुनाव का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया?" दूसरी ओर, राज्य सरकार का तर्क है कि उपचुनाव से पहले लंबे समय से लंबित सभी गैर जमानती गिरफ्तारी वारंटों को तामील करने के निर्देशों के तहत यह गिरफ्तारी की गई।

कानूनी और चुनावी महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब नंदीग्राम का राजनीतिक इतिहास पहले से ही विवादास्पद रहा है। आलोचकों का कहना है कि चुनावी मौसम में विपक्षी उम्मीदवारों पर कथित तौर पर कानूनी दबाव बनाना पश्चिम बंगाल में नई घटना नहीं है। उच्च न्यायालय की रोक ने हालाँकि प्रधान को फौरी राहत दी है, किंतु वे दोनों पुराने मामलों में हिरासत में बने रहेंगे।

आगे क्या होगा

12 अक्टूबर 2026 तक लागू यह रोक उपचुनाव के बाद की तारीख तक प्रभावी है, जिससे चुनाव प्रक्रिया के दौरान प्रधान पर किसी नए मामले की कार्रवाई नहीं हो सकती। न्यायालय का अगला सुनवाई क्रम यह तय करेगा कि रोक आगे जारी रहेगी अथवा नहीं। इस बीच उपचुनाव की वैधता और निष्पक्षता पर नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

भले ही राज्य सरकार इसे लंबित वारंटों की रूटीन तामील बताए। यह पहली बार नहीं है जब विपक्षी उम्मीदवार चुनाव पूर्व की अवधि में इस तरह की कानूनी उलझनों में फँसे हों। वास्तविक परीक्षा यह होगी कि क्या उच्च न्यायालय की रोक के बावजूद मतदाता एक हिरासत में बंद उम्मीदवार के समर्थन में मतपेटी तक पहुँचेंगे — और क्या नंदीग्राम इस बार राजनीतिक संदेश देगा।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाई कोर्ट ने मिलन प्रधान के मामले में क्या आदेश दिया?
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 24 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल पुलिस को मिलन प्रधान के खिलाफ किसी भी नए मामले में प्राथमिकी दर्ज करने या गिरफ्तारी दिखाने से 12 अक्टूबर 2026 तक रोक दिया है। यह रोक उन दो मामलों पर लागू नहीं होती जिनमें वे पहले से न्यायिक हिरासत में हैं।
मिलन प्रधान को कब और क्यों गिरफ्तार किया गया?
मिलन प्रधान को 18 सितंबर 2026 की शाम गिरफ्तार किया गया। राज्य सरकार का कहना है कि यह गिरफ्तारी उपचुनाव से पहले लंबे समय से लंबित गैर जमानती वारंटों की तामील के निर्देश पर हुई। हालाँकि, इस गिरफ्तारी का समय ममता बनर्जी के कांग्रेस उम्मीदवार समर्थन ऐलान के कुछ घंटे बाद होने से विवाद खड़ा हो गया।
नंदीग्राम उपचुनाव कब होगा और नतीजे कब आएंगे?
नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव 6 अक्टूबर 2026 को होंगे और मतगणना 9 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।
ममता बनर्जी का कांग्रेस उम्मीदवार से क्या संबंध है?
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट ने घोषणा की कि वे नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन करेंगे। यह ऐलान TMC की अपनी उम्मीदवार संचिता डे प्रधान द्वारा नामांकन वापस लेने के तुरंत बाद आया था।
हाई कोर्ट की रोक का मिलन प्रधान की हिरासत पर क्या असर होगा?
हाई कोर्ट की रोक केवल नए मामलों पर लागू है। मिलन प्रधान अभी भी पुराने दो मामलों में — क्रमशः 3 अक्टूबर और 5 अक्टूबर 2026 तक — न्यायिक हिरासत में रहेंगे। रोक 12 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगी और अगली सुनवाई में इसकी समीक्षा होगी।
राष्ट्र प्रेस
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