नंदीग्राम उपचुनाव: कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत नहीं, सुरक्षा याचिका खारिज
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल-न्यायाधीश पीठ ने 22 सितंबर 2026 को आगामी नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के उम्मीदवार मिलन प्रधान को किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। प्रधान ने वर्ष 2007 में उनके विरुद्ध दर्ज पाँच मामलों में पुलिस की दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की माँग की थी, जिसे न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया।
न्यायालय का रुख और सुनवाई का ब्यौरा
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल-न्यायाधीश पीठ के समक्ष मंगलवार दोपहर संक्षिप्त सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि पाँचों मामलों में उच्च न्यायालय के किसी निर्देश की आवश्यकता नहीं है और इस प्रकार हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
प्रधान के वकील अयान भट्टाचार्य ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को 19 वर्ष पुराने मामले में, विशेष रूप से नंदीग्राम उपचुनाव की घोषणा के ठीक बाद, जिस तरह से गिरफ्तार किया गया, वह दर्शाता है कि राज्य प्रशासन कथित तौर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अस्थिर करने का प्रयास कर रहा है।
राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने प्रतिवाद करते हुए कहा कि प्रधान को उपचुनाव से पूर्व सभी लंबित गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंटों को निष्पादित करने के निर्देशों के तहत ही गिरफ्तार किया गया था।
न्यायिक हिरासत और गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
प्रधान को 18 सितंबर 2026 की शाम को गिरफ्तार किया गया था। वे पहले से ही पश्चिम बंगाल की एक जिला अदालत के अलग-अलग आदेशों के बाद दो अन्य मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं।
2007 में उनके खिलाफ दर्ज एक हत्या के मामले में उन्हें 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। एक अन्य मामले में उसी अदालत ने उन्हें 5 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में रखने का आदेश दिया। जिला न्यायालय के न्यायाधीश ने पुलिस को 23 सितंबर को प्रधान को अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश भी दिया है।
गौरतलब है कि ये मामले तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के कार्यकाल में नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन के दौरान दर्ज हुए थे, जो अपने समय की एक अत्यंत विवादास्पद घटना थी।
नंदीग्राम उपचुनाव की राजनीतिक अहमियत
नंदीग्राम और मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव 6 अक्टूबर को होने हैं और मतगणना 9 अक्टूबर को निर्धारित है। यह ऐसे समय में आया है जब नंदीग्राम सीट पहले से ही राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील मानी जाती है — यह वही क्षेत्र है जहाँ 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्ष के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था।
कांग्रेस के लिए उम्मीदवार की न्यायिक हिरासत एक गंभीर चुनौती बन गई है। आलोचकों का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले इस प्रकार की गिरफ्तारी विपक्षी दलों की चुनावी तैयारी को प्रभावित कर सकती है।
आगे क्या होगा
उच्च न्यायालय से राहत न मिलने के बाद मिलन प्रधान के विकल्प सीमित नजर आते हैं। उनकी कानूनी टीम उच्चतर न्यायालयों में अपील के विकल्प पर विचार कर सकती है। 23 सितंबर को जिला अदालत में होने वाली पेशी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज होना तय है, क्योंकि कांग्रेस के उम्मीदवार की हिरासत और उनकी उम्मीदवारी की वैधता अब सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में आ गई है।