सोनम रघुवंशी की जमानत बरकरार: सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से किया इनकार, 9 जुलाई को अगली सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 3 जुलाई 2026 को इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यापारी राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मेघालय हाईकोर्ट से मिली जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सोनम पहले ही जमानत पर रिहा हो चुकी हैं, इसलिए फिलहाल रोक का आदेश देने का कोई औचित्य नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को निर्धारित की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
कथित तौर पर मई 2025 में हनीमून के दौरान मेघालय में सोनम रघुवंशी ने अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की। राजा इंदौर के जाने-माने ट्रांसपोर्ट व्यापारी थे। इस मामले में सोनम को मुख्य आरोपी बनाया गया। इससे पूर्व उनकी जमानत याचिकाएँ अदालतों में खारिज हो चुकी थीं।
गिरफ्तारी के दौरान प्रक्रियात्मक खामियाँ पाए जाने के बाद शिलांग की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने अप्रैल 2026 में सोनम को जमानत दी थी। शिलांग कोर्ट ने कहा था कि जाँच अधिकारियों ने गिरफ्तारी के आधार सही तरीके से नहीं बताए, जिससे आरोपी के बचाव के अधिकार प्रभावित हुए।
मेघालय हाईकोर्ट का फैसला
जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगडोह की एकल पीठ ने 29 जून को मेघालय सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें शिलांग कोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने 10 जून को दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा था और अंततः निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
मेघालय सरकार ने हाईकोर्ट के इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सोनम पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं और पहले भी उनकी जमानत याचिकाएँ खारिज हो चुकी थीं। सरकार का तर्क था कि यह मामला केवल गिरफ्तारी में हुई तकनीकी या क्लेरिकल गलती का नहीं है और सोनम के बाहर रहने पर फरार होने का खतरा बना रहेगा।
सोनम की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि गिरफ्तारी के समय उन्हें न तो वकील मुहैया कराया गया और न ही गिरफ्तारी के स्पष्ट आधार बताए गए — पुलिस ने केवल एक खाली प्रोफॉर्मा दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के अहम सवाल
सर्वोच्च न्यायालय ने सोनम के वकील से पूछा कि यदि प्रक्रियागत उल्लंघन का मुद्दा इतना महत्वपूर्ण था, तो इसे पहले क्यों नहीं उठाया गया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जमानत केवल तकनीकी आधार पर दी गई है, तो कानून पुलिस को दोबारा गिरफ्तारी से नहीं रोकता। अदालत ने माना कि हाईकोर्ट के आदेश पर गंभीर सवाल उठते हैं, जिनकी आगे विस्तृत सुनवाई आवश्यक है — लेकिन फिलहाल जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई 2026 के लिए निर्धारित की है, जब हाईकोर्ट के आदेश की वैधता पर विस्तृत बहस होगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अदालत उस सुनवाई में मेघालय सरकार की दलीलों के आधार पर जमानत रद्द करने का आदेश देती है।