सोनम रघुवंशी जमानत मामला: सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को तय की अगली सुनवाई, सरेंडर या मेरिट — दो विकल्प
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 21 जुलाई 2025 को इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत के विरुद्ध मेघालय सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए अगली तारीख 23 जुलाई निर्धारित की। अदालत ने सोनम के अधिवक्ता को स्पष्ट शब्दों में दो विकल्प सुझाए — या तो आरोपी स्वयं सरेंडर करे, या फिर न्यायालय जमानत रद्द करने के प्रश्न पर गुण-दोष के आधार पर विस्तृत सुनवाई कर निर्णय सुनाए।
मुख्य घटनाक्रम
मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सोनम रघुवंशी ने स्वेच्छा से सरेंडर किया था और उन्हें पहले से ज्ञात था कि किस अपराध के संदर्भ में पुलिस उनकी तलाश कर रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के आधार सोनम को विधिवत बताए गए, उनके भाई को सूचित किया गया और सोनम ने संबंधित दस्तावेज़ों पर स्वयं हस्ताक्षर किए।
मेहता ने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के दस्तावेज़ में जो त्रुटि पाई गई, वह केवल एक कानूनी धारा के अंक की टाइपिंग की गलती थी। उनके अनुसार, इतनी छोटी तकनीकी चूक के आधार पर जमानत देना उचित नहीं था, विशेषकर जब आरोपी को हत्या के आरोप की पूर्व जानकारी थी। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि जमानत बरकरार रहने की स्थिति में सोनम के फरार होने का खतरा है।
आरोपी पक्ष का तर्क
सोनम रघुवंशी के अधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल जवाब में उनकी ओर से कहा कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष के अनुसार, अभियोजन का संपूर्ण मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर टिका है और केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि इस प्रकरण को मीडिया में अनावश्यक रूप से उछाला गया है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
सर्वोच्च न्यायालय ने सोनम के अधिवक्ता से कहा कि न्यायालय के समक्ष दो मार्ग हैं — पहला, मेरिट पर सुनवाई कर आदेश पारित करना; दूसरा, गवाहों की जाँच पूरी होने तक आरोपी को सरेंडर करने का निर्देश देना और उसके बाद गुण-दोष पर विचार करना। न्यायालय ने अधिवक्ता को अपने मुवक्किल से निर्देश लेकर 23 जुलाई को उपस्थित होने को कहा।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी की हत्या से जुड़ा है, जिसमें उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी को मुख्य आरोपी बनाया गया है। गौरतलब है कि निचली अदालत से जमानत मिलने के बाद मेघालय सरकार ने उस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी, जिसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। यह ऐसे समय में आया है जब हत्या के मामलों में जमानत की शर्तों और गिरफ्तारी प्रक्रिया की वैधता को लेकर न्यायिक विमर्श तेज़ हुआ है।
आगे क्या होगा
23 जुलाई 2025 को होने वाली अगली सुनवाई में सोनम के अधिवक्ता को अपना अंतिम रुख स्पष्ट करना होगा। यदि सरेंडर का विकल्प नहीं चुना गया, तो सर्वोच्च न्यायालय जमानत रद्द करने पर गुण-दोष के आधार पर विस्तृत सुनवाई शुरू कर सकता है। इस निर्णय का असर न केवल इस मामले पर, बल्कि गिरफ्तारी दस्तावेज़ों में तकनीकी त्रुटि के आधार पर जमानत देने की प्रवृत्ति पर भी पड़ सकता है।