राजा रघुवंशी हत्याकांड: सोनम की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 21 जुलाई तक स्थगित
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली — इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यापारी राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान हुई हत्या मामले में मुख्य आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी की जमानत को चुनौती देने वाली मेघालय सरकार की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय में 14 जुलाई को सुनवाई नहीं हो सकी। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 21 जुलाई निर्धारित की है। यह मामला मई 2025 में मेघालय में हनीमून के दौरान हुई हत्या से जुड़ा है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा था।
मुख्य घटनाक्रम
मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय में तर्क दिया था कि सोनम रघुवंशी को केवल इस तकनीकी आधार पर जमानत दी गई कि गिरफ्तारी के कागज़ात में धारा का उल्लेख टाइपोग्राफिकल गलती के कारण गलत दर्ज हो गई थी। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यदि सोनम बाहर रहीं तो उनके फरार होने का खतरा बना रह सकता है।
इससे पहले 3 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने सोनम की जमानत पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया था, यह कहते हुए कि वे पहले ही रिहा हो चुकी हैं। हालाँकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए मेघालय उच्च न्यायालय के आदेश पर गंभीर सवाल उठते हैं, जिन पर विस्तृत सुनवाई आवश्यक है।
बचाव पक्ष के तर्क
सोनम रघुवंशी की ओर से पेश वकील ने अदालत में कहा कि गिरफ्तारी के समय उन्हें न तो कानूनी सहायता उपलब्ध कराई गई और न ही गिरफ्तारी के स्पष्ट आधार बताए गए — पुलिस ने केवल एक खाली प्रोफॉर्मा सौंपा था। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने पूछा कि यदि यह मुद्दा इतना महत्वपूर्ण था, तो इसे पहले क्यों नहीं उठाया गया। अदालत ने यह भी जिज्ञासा जताई कि यदि जमानत केवल तकनीकी आधार पर दी गई है, तो क्या कानून पुलिस को दोबारा गिरफ्तारी करने से रोकता है।
उच्च न्यायालय का पूर्व आदेश
मेघालय उच्च न्यायालय ने 29 जून को शिलांग की निचली अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें सोनम रघुवंशी को जमानत दी गई थी। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी थी, जिसके बाद मेघालय सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया। पिछली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने सोनम को नोटिस जारी कर उनसे जवाब माँगा था।
मामले की पृष्ठभूमि
इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यापारी राजा रघुवंशी की मई 2025 में हनीमून के दौरान मेघालय में हत्या कर दी गई थी। सोनम रघुवंशी पर इस हत्या का मुख्य आरोपी होने का आरोप है। इससे पहले भी उनकी जमानत याचिकाएँ खारिज हो चुकी थीं, जो मामले की गंभीरता को रेखांकित करती हैं। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि आरोप बेहद संगीन हैं और यह मसला महज एक लिपिकीय त्रुटि तक सीमित नहीं है।
आगे क्या होगा
अब 21 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले की अगली सुनवाई होगी, जिसमें सोनम रघुवंशी का जवाब भी अदालत के समक्ष होगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत उच्च न्यायालय के आदेश पर उठाए गए 'गंभीर सवालों' के संदर्भ में क्या रुख अपनाती है।