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सोनम रघुवंशी जमानत मामला: सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार से अरेस्ट मेमो पेश करने को कहा, 14 जुलाई को अगली सुनवाई

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सोनम रघुवंशी जमानत मामला: सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार से अरेस्ट मेमो पेश करने को कहा, 14 जुलाई को अगली सुनवाई

सारांश

राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को फिलहाल राहत बरकरार है — सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर रोक नहीं लगाई। लेकिन अरेस्ट मेमो में टाइपिंग की गलती बनाम संवैधानिक अधिकार का अहम सवाल 14 जुलाई को तय होगा।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 9 जुलाई को सोनम रघुवंशी की जमानत पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई, राहत जारी रहेगी।
मेघालय सरकार को मूल अरेस्ट मेमो और गिरफ्तारी दस्तावेजों की फोटोकॉपी रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया गया।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दस्तावेज में BNS धारा 103(1) की जगह धारा 403(1) लिखना महज टाइपिंग की गलती थी।
जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि आरोपी को मामले की सामान्य पृष्ठभूमि से अवगत कराया गया था या नहीं, यह देखना होगा।
यह मामला इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी की मई 2025 में मेघालय में हनीमून के दौरान हुई कथित हत्या से संबंधित है।
अगली सुनवाई 14 जुलाई को निर्धारित।

सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत पर कोई अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिससे उन्हें फिलहाल राहत बनी रहेगी। साथ ही, कोर्ट ने मेघालय सरकार को निर्देश दिया कि वह गिरफ्तारी के समय आरोपी को दिए गए मूल अरेस्ट मेमो और संबंधित दस्तावेजों की फोटोकॉपी रिकॉर्ड पर रखे। इस मामले में अगली सुनवाई 14 जुलाई को निर्धारित की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी की हत्या से जुड़ा है, जो मई 2025 में अपनी पत्नी सोनम के साथ हनीमून के लिए मेघालय गए थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सोनम ने अपने कथित प्रेमी के साथ मिलकर साजिश रचकर राजा की हत्या करवाई। मेघालय सरकार ने सोनम को मिली जमानत को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है।

सुनवाई में क्या हुआ

जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि उच्च न्यायालय ने गिरफ्तारी दस्तावेजों में हुई एक टाइपिंग की गलती को प्रक्रियात्मक खामी मानकर जमानत को गलत ढंग से बरकरार रखा था। उनके अनुसार, एकमात्र विसंगति यह थी कि हत्या से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के स्थान पर गलती से धारा 403(1) का उल्लेख हो गया था।

एसजी मेहता ने स्पष्ट किया, 'लिखित आधार भी दिए गए थे। बस टाइपिंग की एक गलती हुई थी।' उन्होंने यह भी कहा कि इस बात पर कभी कोई विवाद नहीं रहा कि गिरफ्तारी के आधार आरोपी को बताए गए थे।

पीठ की टिप्पणी

जस्टिस मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मुद्दा केवल कानूनी प्रावधानों की जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी देखना होगा कि क्या आरोपी को मामले की सामान्य पृष्ठभूमि के बारे में समुचित रूप से सूचित किया गया था। पीठ ने कहा, 'हमें यह देखना होगा कि यह आधार टिकने लायक है या नहीं।' इसके बाद कोर्ट ने मेघालय सरकार को मूल अरेस्ट मेमो और अन्य संबंधित दस्तावेजों की प्रतियाँ पेश करने का निर्देश दिया।

सोनम रघुवंशी का पक्ष

सोनम रघुवंशी ने सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में खुद को बेगुनाह बताया और आरोप लगाया कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि उनसे अब कुछ भी बरामद नहीं किया जाना है, चार्जशीट पहले ही दाखिल हो चुकी है और वह ट्रायल कोर्ट के निर्देशानुसार शिलांग में रहकर जमानत की शर्तों का पूरी तरह पालन कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी ओर से सबूतों के साथ छेड़छाड़ की कोई संभावना नहीं है।

आगे क्या होगा

अब सभी की नज़रें 14 जुलाई की सुनवाई पर हैं, जब पीठ मेघालय सरकार द्वारा पेश दस्तावेजों की जाँच करेगी और यह तय करेगी कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया कानूनी रूप से वैध थी या नहीं। यह मामला इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि इसमें गिरफ्तारी दस्तावेजों में तकनीकी त्रुटि और आरोपी के संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन का प्रश्न सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सामान्य पृष्ठभूमि की जानकारी भी ज़रूरी है', पुलिस की गिरफ्तारी प्रक्रियाओं पर एक व्यापक संदेश है। यदि 14 जुलाई को कोर्ट ने दस्तावेजों को अपर्याप्त माना, तो यह राज्य सरकारों के लिए एक नज़ीर बनेगा कि प्रक्रियागत लापरवाही गंभीर मामलों में भी आरोपी को राहत दिला सकती है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम रघुवंशी कौन हैं और उन पर क्या आरोप है?
सोनम रघुवंशी इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी की पत्नी हैं, जिन पर मई 2025 में मेघालय में हनीमून के दौरान अपने कथित प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रचने का आरोप है। सोनम ने सर्वोच्च न्यायालय में खुद को बेगुनाह बताया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 9 जुलाई को क्या आदेश दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने सोनम रघुवंशी की जमानत पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई, जिससे उन्हें फिलहाल राहत बनी रहेगी। साथ ही कोर्ट ने मेघालय सरकार को गिरफ्तारी के समय दिए गए मूल अरेस्ट मेमो और अन्य दस्तावेजों की प्रतियाँ रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया।
अरेस्ट मेमो में टाइपिंग की गलती का मामला क्या है?
मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि गिरफ्तारी दस्तावेजों में हत्या से संबंधित BNS की धारा 103(1) के स्थान पर गलती से धारा 403(1) लिख दी गई थी। उन्होंने इसे महज टाइपिंग की त्रुटि बताया, न कि प्रक्रियागत खामी।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने किस पर ज़ोर दिया?
जस्टिस मनोज मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मुद्दा केवल धारा का उल्लेख नहीं है, बल्कि यह भी देखना होगा कि आरोपी को मामले की सामान्य पृष्ठभूमि के बारे में सही तरह से सूचित किया गया था या नहीं। पीठ ने कहा, 'हमें यह देखना होगा कि यह आधार टिकने लायक है या नहीं।'
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई के लिए निर्धारित की है, जब मेघालय सरकार द्वारा पेश दस्तावेजों की जाँच की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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