2 जुलाई 2026
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राजा रघुवंशी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट में मेघालय सरकार की चुनौती, सोनम की जमानत पर सवाल

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राजा रघुवंशी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट में मेघालय सरकार की चुनौती, सोनम की जमानत पर सवाल

सारांश

इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी की मेघालय में हनीमून के दौरान कथित हत्या का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मेघालय सरकार ने सोनम रघुवंशी की जमानत को चुनौती दी है — एक ऐसे मामले में जहाँ गिरफ्तारी दस्तावेजों में धारा की टाइपिंग गलती ने पूरे कानूनी परिदृश्य को पलट दिया।

मुख्य बातें

मेघालय सरकार ने 2 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सोनम रघुवंशी की जमानत को चुनौती दी।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ से तत्काल सुनवाई की मांग की।
मेघालय उच्च न्यायालय ने 29 जून 2026 को राज्य की अपील खारिज कर जमानत बरकरार रखी थी।
जमानत का आधार: गिरफ्तारी दस्तावेजों में BNS धारा 403(1) लिखी गई, जबकि सही धारा 103(1) (हत्या) होनी चाहिए थी।
राजा रघुवंशी का शव मई 2025 में वीसावडोंग फॉल्स के पास खाई से बरामद हुआ था; मामला अभी ट्रायल में है।

सर्वोच्च न्यायालय में 2 जुलाई 2026 को मेघालय सरकार ने इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यवसायी राजा रघुवंशी की हत्या मामले में सोनम रघुवंशी को दी गई जमानत को चुनौती देते हुए मेघालय उच्च न्यायालय के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में कड़ी टक्कर दी। सोनम पर मई 2025 में हनीमून के दौरान अपने पति की हत्या की साजिश रचने का आरोप है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस एमएम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष राज्य सरकार की याचिका का उल्लेख करते हुए इसे तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की अपील की। उन्होंने तर्क दिया कि सोनम को केवल एक तकनीकी खामी के आधार पर जमानत दे दी गई, जो न्यायिक दृष्टि से उचित नहीं है।

मेहता ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के दस्तावेजों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 403(1) के स्थान पर 103(1) होनी चाहिए थी — यह महज एक टाइपिंग की चूक थी। उन्होंने जोर दिया कि इतनी छोटी प्रक्रियात्मक त्रुटि के आधार पर हत्या के गंभीर मामले में जमानत देना न्यायसंगत नहीं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जमानत बरकरार रहने पर सोनम के फरार होने का खतरा है।

उच्च न्यायालय का आदेश और पृष्ठभूमि

मेघालय उच्च न्यायालय ने 29 जून 2026 को जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगडोह की एकल पीठ द्वारा राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए शिलॉन्ग की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय के अप्रैल 2026 के आदेश को बरकरार रखा था। उच्च न्यायालय ने 10 जून को दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा था।

शिलॉन्ग अदालत ने जमानत देते समय माना था कि जांच अधिकारियों ने गिरफ्तारी के आधार विधिवत नहीं बताए, जिससे आरोपी के बचाव के मौलिक अधिकार पर प्रतिकूल असर पड़ा। गौरतलब है कि गिरफ्तारी मेमो, चेकलिस्ट, अधिकारों की सूचना और केस डायरी — सभी दस्तावेजों में एक ही गलत धारा का उल्लेख था, जिसे अदालत ने महज संयोग नहीं माना।

अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें

राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में तर्क दिया था कि यह त्रुटि केवल प्रक्रियात्मक थी और इससे सोनम को कोई वास्तविक नुकसान नहीं हुआ। सरकारी पक्ष ने यह भी कहा कि सोनम को हत्या के आरोप की भली-भांति जानकारी थी — उसने गिरफ्तारी के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए, मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश हुई और उसके पास अधिवक्ता भी था। हालांकि, उच्च न्यायालय ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला मई 2025 में उस वक्त सुर्खियों में आया जब इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी और उनकी पत्नी सोनम हनीमून पर मेघालय गए और सोहरा (चेरापूंजी) की यात्रा के दौरान लापता हो गए। बाद में राजा का शव वीसावडोंग फॉल्स के निकट एक गहरी खाई से बरामद हुआ, जिस पर कई चोटों के निशान थे।

पुलिस जांच में आरोप लगाया गया कि सोनम ने अपने कथित प्रेमी और अन्य साथियों के साथ मिलकर हत्या की पूर्व-नियोजित साजिश रची। इसके बाद सोनम सहित अन्य आरोपियों को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया गया। पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और मामला वर्तमान में ट्रायल के चरण में है।

आगे क्या होगा

सुप्रीम कोर्ट में याचिका सूचीबद्ध होने के बाद अदालत यह तय करेगी कि जमानत पर रोक लगाई जाए या नहीं। यह मामला न केवल सोनम रघुवंशी के भविष्य, बल्कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में तकनीकी खामियों के कानूनी महत्व पर एक महत्वपूर्ण नज़ीर स्थापित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है — लेकिन जब वही गलती सभी दस्तावेजों में एकसमान हो, तो यह 'तकनीकी चूक' और 'व्यवस्थागत लापरवाही' के बीच की रेखा को धुंधला करती है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला न केवल इस मामले में, बल्कि गिरफ्तारी प्रक्रिया की खामियों और जमानत के मानदंडों पर एक राष्ट्रीय नज़ीर बन सकता है।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजा रघुवंशी हत्याकांड क्या है?
यह मामला मई 2025 में मेघालय के सोहरा (चेरापूंजी) में हनीमून के दौरान इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यवसायी राजा रघुवंशी की कथित हत्या से जुड़ा है। उनका शव वीसावडोंग फॉल्स के पास एक खाई से बरामद हुआ था और पुलिस ने उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी पर कथित प्रेमी के साथ मिलकर साजिश रचने का आरोप लगाया।
सोनम रघुवंशी को जमानत क्यों मिली थी?
शिलॉन्ग की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने अप्रैल 2026 में पाया कि गिरफ्तारी के सभी दस्तावेजों में BNS की धारा 403(1) लिखी गई थी, जबकि हत्या से संबंधित सही धारा 103(1) होनी चाहिए थी। अदालत ने माना कि इससे आरोपी के बचाव के अधिकार पर असर पड़ा और जमानत दे दी।
मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या मांग की है?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ से याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की मांग की है। सरकार का तर्क है कि एक तकनीकी टाइपिंग गलती के आधार पर हत्या मामले में जमानत नहीं दी जानी चाहिए और जमानत बरकरार रहने पर सोनम के फरार होने का खतरा है।
मेघालय उच्च न्यायालय ने राज्य की अपील क्यों खारिज की?
जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगडोह की एकल पीठ ने 29 जून 2026 को राज्य की अपील खारिज करते हुए माना कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में गंभीर खामियाँ थीं। उच्च न्यायालय ने राज्य के इस तर्क को नहीं माना कि सोनम को हस्ताक्षर और मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी से आरोपों की जानकारी थी।
इस मामले में आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट में याचिका सूचीबद्ध होने के बाद अदालत तय करेगी कि सोनम की जमानत पर रोक लगाई जाए या नहीं। इस बीच मुख्य मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और ट्रायल जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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