राजा रघुवंशी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट में मेघालय सरकार की चुनौती, सोनम की जमानत पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय में 2 जुलाई 2026 को मेघालय सरकार ने इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यवसायी राजा रघुवंशी की हत्या मामले में सोनम रघुवंशी को दी गई जमानत को चुनौती देते हुए मेघालय उच्च न्यायालय के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में कड़ी टक्कर दी। सोनम पर मई 2025 में हनीमून के दौरान अपने पति की हत्या की साजिश रचने का आरोप है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस एमएम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष राज्य सरकार की याचिका का उल्लेख करते हुए इसे तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की अपील की। उन्होंने तर्क दिया कि सोनम को केवल एक तकनीकी खामी के आधार पर जमानत दे दी गई, जो न्यायिक दृष्टि से उचित नहीं है।
मेहता ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के दस्तावेजों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 403(1) के स्थान पर 103(1) होनी चाहिए थी — यह महज एक टाइपिंग की चूक थी। उन्होंने जोर दिया कि इतनी छोटी प्रक्रियात्मक त्रुटि के आधार पर हत्या के गंभीर मामले में जमानत देना न्यायसंगत नहीं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जमानत बरकरार रहने पर सोनम के फरार होने का खतरा है।
उच्च न्यायालय का आदेश और पृष्ठभूमि
मेघालय उच्च न्यायालय ने 29 जून 2026 को जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगडोह की एकल पीठ द्वारा राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए शिलॉन्ग की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय के अप्रैल 2026 के आदेश को बरकरार रखा था। उच्च न्यायालय ने 10 जून को दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
शिलॉन्ग अदालत ने जमानत देते समय माना था कि जांच अधिकारियों ने गिरफ्तारी के आधार विधिवत नहीं बताए, जिससे आरोपी के बचाव के मौलिक अधिकार पर प्रतिकूल असर पड़ा। गौरतलब है कि गिरफ्तारी मेमो, चेकलिस्ट, अधिकारों की सूचना और केस डायरी — सभी दस्तावेजों में एक ही गलत धारा का उल्लेख था, जिसे अदालत ने महज संयोग नहीं माना।
अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें
राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में तर्क दिया था कि यह त्रुटि केवल प्रक्रियात्मक थी और इससे सोनम को कोई वास्तविक नुकसान नहीं हुआ। सरकारी पक्ष ने यह भी कहा कि सोनम को हत्या के आरोप की भली-भांति जानकारी थी — उसने गिरफ्तारी के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए, मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश हुई और उसके पास अधिवक्ता भी था। हालांकि, उच्च न्यायालय ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला मई 2025 में उस वक्त सुर्खियों में आया जब इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी और उनकी पत्नी सोनम हनीमून पर मेघालय गए और सोहरा (चेरापूंजी) की यात्रा के दौरान लापता हो गए। बाद में राजा का शव वीसावडोंग फॉल्स के निकट एक गहरी खाई से बरामद हुआ, जिस पर कई चोटों के निशान थे।
पुलिस जांच में आरोप लगाया गया कि सोनम ने अपने कथित प्रेमी और अन्य साथियों के साथ मिलकर हत्या की पूर्व-नियोजित साजिश रची। इसके बाद सोनम सहित अन्य आरोपियों को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया गया। पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और मामला वर्तमान में ट्रायल के चरण में है।
आगे क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट में याचिका सूचीबद्ध होने के बाद अदालत यह तय करेगी कि जमानत पर रोक लगाई जाए या नहीं। यह मामला न केवल सोनम रघुवंशी के भविष्य, बल्कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में तकनीकी खामियों के कानूनी महत्व पर एक महत्वपूर्ण नज़ीर स्थापित कर सकता है।