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दाभोलकर हत्याकांड: दोषी शरद कलस्कर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी जमानत, ₹50,000 के मुचलके पर रिहाई

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दाभोलकर हत्याकांड: दोषी शरद कलस्कर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी जमानत, ₹50,000 के मुचलके पर रिहाई

सारांश

डॉ. नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए दोषी शरद कलस्कर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। जाँच एजेंसी की रोक की माँग खारिज होने के बाद ₹50,000 के मुचलके पर यह रिहाई हुई, जबकि दाभोलकर परिवार की कानूनी लड़ाई अभी भी जारी है।

मुख्य बातें

शरद कलस्कर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने 29 अप्रैल को ₹50,000 के मुचलके पर जमानत दी।
पुणे सत्र न्यायालय ने 2024 में कलस्कर और सचिन अंदुरे को दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
वीरेंद्र तावड़े , विक्रम भावे और अधिवक्ता संजीव पुनालेकर को सत्र न्यायालय ने बरी किया था।
मुक्ता दाभोलकर ने तीनों बरी आरोपियों की रिहाई और UAPA के तहत बरी किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
कलस्कर गोविंद पानसरे हत्याकांड में भी आरोपी हैं; अक्टूबर 2025 में उस मामले में भी जमानत मिल चुकी है।

सामाजिक कार्यकर्ता और अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक डॉ. नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में पुणे सत्र न्यायालय द्वारा उम्रकैद की सजा पाए दोषी शरद कलस्कर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार, 29 अप्रैल को जमानत दे दी। न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति रणजीतसिंह भोसले की खंडपीठ ने ₹50,000 के मुचलके पर यह जमानत स्वीकार की। जाँच एजेंसी की ओर से इस फैसले पर रोक लगाने की माँग को अदालत ने खारिज कर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

20 अगस्त 2013 को पुणे के महर्षि विट्ठल रामजी ब्रिज पर अज्ञात हमलावरों ने डॉ. दाभोलकर को गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। अंधविश्वास उन्मूलन के लिए जीवनभर संघर्ष करने वाले दाभोलकर की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस मामले में कुल पाँच लोगों को आरोपी बनाया गया था।

सत्र न्यायालय का फैसला और हाईकोर्ट में चुनौती

पुणे की विशेष सत्र अदालत ने 2024 में शरद कलस्कर और सचिन अंदुरे को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वहीं डॉ. वीरेंद्र तावड़े, विक्रम भावे और अधिवक्ता संजीव पुनालेकर को बरी कर दिया गया था। कलस्कर ने इस दोषसिद्धि को हाईकोर्ट में चुनौती दी है और अपील के अंतिम निर्णय तक जमानत की माँग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

दाभोलकर परिवार की कानूनी लड़ाई

डॉ. दाभोलकर की बेटी मुक्ता दाभोलकर ने तीनों बरी आरोपियों की रिहाई को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इसके अतिरिक्त, दाभोलकर परिवार ने गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत अंदुरे और कलस्कर को बरी किए जाने के फैसले को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मुक्ता दाभोलकर का मानना है कि उनके पिता की हत्या सुनियोजित थी और इसमें एक बड़ी साजिश शामिल थी।

मुक्ता की अपील में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने डॉ. दाभोलकर को निशाना बनाने की साजिश रची थी, क्योंकि उन्होंने सनातन संस्था, हिंदू जन जागरण समिति और समान विचारधारा के संगठनों के खिलाफ कड़े विचार व्यक्त किए थे। उनके अनुसार, सत्र न्यायालय यह स्थापित करने में विफल रहा कि दोषी और बरी किए गए तीनों आरोपी सनातन संस्था के सदस्य थे या उससे संबद्ध थे।

पानसरे हत्याकांड से भी जुड़ाव

उल्लेखनीय है कि शरद कलस्कर कॉमरेड गोविंद पानसरे हत्याकांड में भी आरोपी हैं, जो मामला अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है। अक्टूबर 2025 में हाईकोर्ट की कोल्हापुर पीठ ने कलस्कर के साथ डॉ. वीरेंद्र सिंह तावड़े और अमोल काले को भी उस मामले में जमानत दे दी थी। दाभोलकर हत्याकांड में अपील पर अंतिम फैसला आने तक यह कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह फैसला उस व्यापक सवाल को फिर से उठाता है कि हाई-प्रोफाइल सामाजिक कार्यकर्ताओं की हत्याओं में न्याय की गति कितनी धीमी है। दाभोलकर की हत्या 2013 में हुई, दोषसिद्धि 2024 में आई और अब अपील के दौरान दोषी को जमानत मिल गई — यह पूरी यात्रा न्यायिक प्रणाली की जटिलता को उजागर करती है। मुक्ता दाभोलकर की अपील में साजिश के बड़े नेटवर्क का आरोप अभी भी अनुत्तरित है, जो इस मामले को महज एक हत्या से कहीं अधिक बनाता है। जब तक उच्च न्यायालय अपील पर अंतिम फैसला नहीं सुनाता, तब तक न्याय अधूरा ही माना जाएगा।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शरद कलस्कर को जमानत क्यों मिली?
शरद कलस्कर ने पुणे सत्र न्यायालय की उम्रकैद की सजा को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अपील पर अंतिम फैसला आने तक जमानत की माँग पर न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति रणजीतसिंह भोसले की पीठ ने ₹50,000 के मुचलके पर जमानत स्वीकार की।
डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या कब और कहाँ हुई थी?
डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या 20 अगस्त 2013 को पुणे के महर्षि विट्ठल रामजी ब्रिज पर गोली मारकर की गई थी। वे अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक और著名 सामाजिक कार्यकर्ता थे।
दाभोलकर हत्याकांड में किसे दोषी ठहराया गया और किसे बरी किया गया?
पुणे की विशेष सत्र अदालत ने 2024 में शरद कलस्कर और सचिन अंदुरे को दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई। डॉ. वीरेंद्र तावड़े, विक्रम भावे और अधिवक्ता संजीव पुनालेकर को बरी कर दिया गया।
मुक्ता दाभोलकर हाईकोर्ट में क्या माँग कर रही हैं?
मुक्ता दाभोलकर ने तीनों बरी आरोपियों की रिहाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी है और UAPA के तहत अंदुरे व कलस्कर को बरी किए जाने के फैसले को भी चुनौती दी है। उनका मानना है कि उनके पिता की हत्या सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी।
क्या शरद कलस्कर किसी अन्य हत्याकांड में भी आरोपी हैं?
हाँ, शरद कलस्कर कॉमरेड गोविंद पानसरे हत्याकांड में भी आरोपी हैं, जो मामला अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है। अक्टूबर 2025 में हाईकोर्ट की कोल्हापुर पीठ ने उस मामले में भी कलस्कर को जमानत दे दी थी।
राष्ट्र प्रेस
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