18 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दाभोलकर हत्याकांड: मुख्य दोषी सचिन अंदुरे को बॉम्बे हाईकोर्ट से मिली जमानत, 2024 में हुई थी उम्रकैद

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दाभोलकर हत्याकांड: मुख्य दोषी सचिन अंदुरे को बॉम्बे हाईकोर्ट से मिली जमानत, 2024 में हुई थी उम्रकैद

सारांश

डॉ. नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में 2024 में उम्रकैद पाने वाले मुख्य दोषी सचिन अंदुरे को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दे दी। इससे पहले दूसरे दोषी शरद कलसकर को भी 29 अप्रैल को जमानत मिल चुकी है। 13 साल पुराने इस चर्चित मामले में अब अपील पर अंतिम सुनवाई बाकी है।

मुख्य बातें

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को दाभोलकर हत्याकांड के मुख्य दोषी सचिन अंदुरे को जमानत दी।
पुणे की विशेष सत्र अदालत ने 2024 में अंदुरे और शरद कलसकर को दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
दूसरे दोषी शरद कलसकर को पहले ही 29 अप्रैल को ₹50 हज़ार के बॉन्ड पर जमानत मिल चुकी है।
वीरेंद्र तावड़े , विक्रम भावे और वकील संजीव पुनालेकर को साक्ष्यों के अभाव में बरी किया गया था।
दाभोलकर की हत्या 20 अगस्त 2013 को पुणे के महर्षि विठ्ठल रामजी ब्रिज पर हुई थी।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड के मुख्य दोषी सचिन अंदुरे को जमानत दे दी। पुणे की विशेष सत्र अदालत ने 2024 में अंदुरे को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके विरुद्ध उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी और अंतिम फैसले तक जमानत की माँग की थी।

मुख्य घटनाक्रम

20 अगस्त 2013 को पुणे के महर्षि विठ्ठल रामजी ब्रिज पर सुबह मॉर्निंग वॉक के दौरान डॉ. दाभोलकर को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक और अंधविश्वास के विरुद्ध दशकों से आंदोलन चलाने वाले डॉ. दाभोलकर की हत्या ने पूरे देश में व्यापक बहस छेड़ दी थी।

इस मामले में कुल पाँच लोगों को आरोपी बनाया गया था। पुणे की विशेष सत्र अदालत ने 2024 में सचिन अंदुरे और शरद कलसकर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। वहीं, डॉ. वीरेंद्र तावड़े, विक्रम भावे और वकील संजीव पुनालेकर को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था।

पहले कलसकर, अब अंदुरे को मिली जमानत

यह ऐसे समय में आया है जब इसी मामले में दूसरे दोषी शरद कलसकर को 29 अप्रैल को बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति रणजीतसिंह भोसले की पीठ ने कलसकर की जमानत याचिका स्वीकार की थी। जाँच एजेंसी ने उस फैसले पर रोक लगाने की माँग की थी, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया। कलसकर को ₹50 हज़ार के बॉन्ड पर जमानत दी गई थी।

गौरतलब है कि दोनों दोषियों को उम्रकैद की सजा मिलने के बावजूद अपील के दौरान जमानत मिलना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन यह घटनाक्रम पीड़ित परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

डॉ. दाभोलकर की विरासत और मामले का महत्त्व

डॉ. नरेंद्र दाभोलकर दशकों तक महाराष्ट्र में अंधविश्वास और जादू-टोने के विरुद्ध जन-जागरण अभियान चलाते रहे। उनकी हत्या के बाद महाराष्ट्र सरकार ने अंधश्रद्धा-विरोधी कानून पारित किया था, जिसे उनके आंदोलन की सबसे बड़ी नीतिगत उपलब्धि माना जाता है। यह मामला देश के उन चर्चित हत्याकांडों में से एक है जिसमें सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे।

आगे क्या होगा

हाईकोर्ट में सचिन अंदुरे की अपील पर सुनवाई जारी रहेगी। अंतिम फैसला आने तक वह जमानत पर रहेंगे। जाँच एजेंसी के रुख और दाभोलकर परिवार की प्रतिक्रिया पर अब सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

अब अंदुरे — को उम्रकैद के बावजूद अपेक्षाकृत कम समय में जमानत मिलना न्यायिक प्रक्रिया की सीमाओं को रेखांकित करता है। यह मामला केवल एक हत्या का नहीं, बल्कि तर्कवाद और सामाजिक सुधार की आवाज़ों की सुरक्षा का प्रतीक बन चुका है। जाँच में वर्षों की देरी और अब अपील के दौरान जमानत — दोनों मिलकर यह सवाल उठाते हैं कि क्या न्याय की गति पीड़ित परिवार और समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप है। मुख्यधारा की कवरेज जमानत के तथ्य तक सीमित रहती है, लेकिन असली मुद्दा यह है कि अपील पर अंतिम फैसला कितना लंबा खिंचेगा।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सचिन अंदुरे कौन हैं और उन्हें जमानत क्यों मिली?
सचिन अंदुरे डॉ. नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड के मुख्य दोषी हैं, जिन्हें पुणे की विशेष सत्र अदालत ने 2024 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में सजा के विरुद्ध अपील दायर की और अपील पर अंतिम फैसले तक जमानत की माँग की, जिसे हाईकोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को मंजूर कर लिया।
डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या कब और कहाँ हुई थी?
डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या 20 अगस्त 2013 को पुणे के महर्षि विठ्ठल रामजी ब्रिज पर सुबह मॉर्निंग वॉक के दौरान गोली मारकर की गई थी। वे अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक और अंधविश्वास-विरोधी आंदोलन के प्रमुख चेहरे थे।
इस मामले में किन्हें दोषी ठहराया गया और किन्हें बरी किया गया?
पुणे की विशेष सत्र अदालत ने 2024 में सचिन अंदुरे और शरद कलसकर को दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई। डॉ. वीरेंद्र तावड़े, विक्रम भावे और वकील संजीव पुनालेकर को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।
शरद कलसकर को जमानत कब मिली थी?
दूसरे दोषी शरद कलसकर को 29 अप्रैल को न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति रणजीतसिंह भोसले की पीठ ने ₹50 हज़ार के बॉन्ड पर जमानत दी थी। जाँच एजेंसी ने इस फैसले पर रोक की माँग की थी, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
बॉम्बे हाईकोर्ट में सचिन अंदुरे की अपील पर सुनवाई जारी रहेगी और अंतिम फैसला आने तक वह जमानत पर रहेंगे। शरद कलसकर की अपील भी हाईकोर्ट में लंबित है। दोनों मामलों में अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले