दाभोलकर हत्याकांड: मुख्य दोषी सचिन अंदुरे को बॉम्बे हाईकोर्ट से मिली जमानत, 2024 में हुई थी उम्रकैद
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड के मुख्य दोषी सचिन अंदुरे को जमानत दे दी। पुणे की विशेष सत्र अदालत ने 2024 में अंदुरे को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके विरुद्ध उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी और अंतिम फैसले तक जमानत की माँग की थी।
मुख्य घटनाक्रम
20 अगस्त 2013 को पुणे के महर्षि विठ्ठल रामजी ब्रिज पर सुबह मॉर्निंग वॉक के दौरान डॉ. दाभोलकर को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक और अंधविश्वास के विरुद्ध दशकों से आंदोलन चलाने वाले डॉ. दाभोलकर की हत्या ने पूरे देश में व्यापक बहस छेड़ दी थी।
इस मामले में कुल पाँच लोगों को आरोपी बनाया गया था। पुणे की विशेष सत्र अदालत ने 2024 में सचिन अंदुरे और शरद कलसकर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। वहीं, डॉ. वीरेंद्र तावड़े, विक्रम भावे और वकील संजीव पुनालेकर को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था।
पहले कलसकर, अब अंदुरे को मिली जमानत
यह ऐसे समय में आया है जब इसी मामले में दूसरे दोषी शरद कलसकर को 29 अप्रैल को बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति रणजीतसिंह भोसले की पीठ ने कलसकर की जमानत याचिका स्वीकार की थी। जाँच एजेंसी ने उस फैसले पर रोक लगाने की माँग की थी, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया। कलसकर को ₹50 हज़ार के बॉन्ड पर जमानत दी गई थी।
गौरतलब है कि दोनों दोषियों को उम्रकैद की सजा मिलने के बावजूद अपील के दौरान जमानत मिलना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन यह घटनाक्रम पीड़ित परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
डॉ. दाभोलकर की विरासत और मामले का महत्त्व
डॉ. नरेंद्र दाभोलकर दशकों तक महाराष्ट्र में अंधविश्वास और जादू-टोने के विरुद्ध जन-जागरण अभियान चलाते रहे। उनकी हत्या के बाद महाराष्ट्र सरकार ने अंधश्रद्धा-विरोधी कानून पारित किया था, जिसे उनके आंदोलन की सबसे बड़ी नीतिगत उपलब्धि माना जाता है। यह मामला देश के उन चर्चित हत्याकांडों में से एक है जिसमें सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट में सचिन अंदुरे की अपील पर सुनवाई जारी रहेगी। अंतिम फैसला आने तक वह जमानत पर रहेंगे। जाँच एजेंसी के रुख और दाभोलकर परिवार की प्रतिक्रिया पर अब सभी की नज़रें टिकी हैं।