गांधी जयंती पर यूएन महासचिव गुटेरेस का आह्वान: 'इस मुश्किल दौर में अहिंसा के मूल्यों को अपनाएं'
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 2 अक्टूबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के अवसर पर वैश्विक समुदाय से आग्रह किया कि वह महात्मा गांधी के साहस, सहानुभूति और अहिंसा के मूल्यों को इस संघर्षपूर्ण और विभाजित दौर में आत्मसात करे। गुटेरेस ने अपने संदेश में कहा कि गांधी की शिक्षाएं आज 'नई तत्कालता' के साथ प्रासंगिक हो उठी हैं।
क्या कहा गुटेरेस ने
यूएन प्रमुख ने गांधी जयंती के उपलक्ष्य में जारी अपने वक्तव्य में कहा, 'इन अत्यधिक तनावपूर्ण समय में, आइए साहस, सहानुभूति, गरिमा और साझा मानवता को याद करें, जिसका उदाहरण गांधी ने अपने पूरे जीवन में दिया।' उन्होंने वैश्विक स्तर पर बढ़ती गरीबी, असमानता और संघर्ष की स्थिति पर गहरी चिंता जताई।
गुटेरेस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर, मानवाधिकार, अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीति की 'दंडमुक्ति के साथ अनदेखी और उल्लंघन' हो रही है। उनके अनुसार, अमीर और गरीब के बीच की खाई और गहरी होती जा रही है।
अहिंसा को बताया सबसे प्रभावी हथियार
गुटेरेस ने महात्मा गांधी द्वारा विकसित शांति के सिद्धांतों को मानवता की वर्तमान चुनौतियों से निपटने का सबसे कारगर तरीका बताया। उन्होंने कहा, 'उन्होंने दिखाया कि अन्याय का मुकाबला करने का सबसे अच्छा तरीका व्यवस्थागत भेदभाव और उत्पीड़न की क्रूरता और हिंसा को दोहराना नहीं है, बल्कि संवाद और अहिंसा के माध्यम से समझ के पुल बनाना, गरिमा प्रदान करना और स्थायी बदलाव लाना है।'
एक्स पर भी किया साझा
यूएन महासचिव ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर भी यह संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा, 'महात्मा गांधी ने इस बात का प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया कि कैसे शांति के सिद्धांतों पर दृढ़ रहते हुए गहरा, स्थायी बदलाव लाया जा सकता है। बढ़ते तनाव और संघर्ष के बीच, उनकी शिक्षाएं नई तत्परता के साथ हमसे बात करती हैं। आइए वास्तविक संवाद और कूटनीति के माध्यम से विभाजन को पाटें, पीड़ा को समाप्त करें और अहिंसा के माध्यम से एक शांतिपूर्ण दुनिया का निर्माण करें।'
अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 2007 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 141 देशों द्वारा प्रायोजित एक प्रस्ताव के माध्यम से 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया था। यह दिन महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है, जो भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख स्तंभ थे और जिनके अहिंसक प्रतिरोध के सिद्धांत ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया।
यह ऐसे समय में आया है जब विश्व के अनेक हिस्सों में सक्रिय सशस्त्र संघर्ष जारी हैं और बहुपक्षीय कूटनीतिक तंत्र पर दबाव बढ़ता जा रहा है। गुटेरेस का यह संदेश न केवल एक स्मरणांजलि है, बल्कि वैश्विक नेताओं के लिए एक स्पष्ट आह्वान भी है।