यूएन महासचिव गुटेरेस का मानवाधिकारों पर गंभीर बयान, दुनिया में बढ़ते संकट
सारांश
Key Takeaways
- मानवाधिकारों का हनन: वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों का अपमान हो रहा है।
- संघर्षों का जिक्र: सूडान, गाजा और यूक्रेन में जारी संघर्षों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
- वित्तीय संकट: यूएन की जांचों को प्रभावित कर रहा है।
- इंसानी जरूरतें: बढ़ रही हैं जबकि फंडिंग घट रही है।
- मानवाधिकारों का महत्व: समानता और न्याय को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं।
नई दिल्ली, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों पर हो रहे हमलों को अत्यंत दुखद बताया। उन्होंने सूडान, गाजा और यूक्रेन में जारी संघर्षों, अंतरराष्ट्रीय कानून के व्यापक उल्लंघनों और आम जनता की भयंकर पीड़ाओं की चर्चा की।
जिनेवा में मानवाधिकार परिषद के उद्घाटन समारोह में गुटेरेस ने कहा, "कानून का राज ताकत के राज के नीचे दबाया जा रहा है।"
उन्होंने आगे कहा, "पूरी दुनिया में मानवाधिकारों का जानबूझकर, रणनीतिक तरीके से और कभी-कभी बड़े अहंकार के साथ अपमान किया जा रहा है।"
यूएन मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने परिषद को बताया कि मानवाधिकारों का बड़ा उल्लंघन हो रहा है क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से दुनिया सत्ता और संसाधनों की कमी का सामना कर रही है। गुटेरेस की सूडान, गाजा, म्यांमार और यूक्रेन में संघर्ष समाप्त करने की अपील के प्रति उन्होंने समर्थन व्यक्त किया।
टर्क ने कहा, "दुनिया भर में, एक-दूसरे से श्रेष्ठता साबित करने की होड़ लगी है। लेकिन यह भी सच है कि लोगों का सम्मान, समान अधिकार और न्याय पर विश्वास मजबूत है। मानवाधिकार बेहद आवश्यक हैं।"
गुटेरेस ने उल्लेख किया कि स्वतंत्र देशों को धमकियां दी जा रही हैं, यह विचार किए बिना कि इससे उठने वाली चिंगारी कितनी विनाशकारी हो सकती है।
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि वित्तीय संकट ने 2025 में शुरू होने वाली दो जांचों—डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में संभावित युद्ध अपराधों और अफगानिस्तान में दुर्व्यवहार की जांच—को प्रारंभ करने से रोक दिया है।