च्यांग त्सेमिन की 100वीं जयंती पर बीजिंग में तीन दिवसीय संगोष्ठी, त्रि-प्रतिनिधित्व सिद्धांत पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
चीन के दिवंगत नेता च्यांग त्सेमिन की 100वीं जयंती के अवसर पर बीजिंग में 18 अगस्त 2026 को तीन दिवसीय संगोष्ठी का आगाज़ हुआ, जिसमें उनके जीवन, विचारों और त्रि-प्रतिनिधित्व सिद्धांत पर गहन विमर्श किया जा रहा है। इस आयोजन में करीब 500 अधिकारी, विद्वान और प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं।
उद्घाटन समारोह और प्रमुख संबोधन
संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य और सीपीसी केंद्रीय समिति के सचिवालय के सदस्य थ्साई छी ने मुख्य संबोधन दिया। उन्होंने नए युग की परिस्थितियों के अनुरूप त्रि-प्रतिनिधित्व सिद्धांत पर गहन अध्ययन करने का आह्वान किया।
थ्साई छी ने पार्टी के समग्र नेतृत्व को बनाए रखने और CPC केंद्रीय समिति के केंद्रीकृत तथा एकीकृत नेतृत्व का पालन करने की समझ को मज़बूत करने पर विशेष बल दिया।
च्यांग त्सेमिन: एक परिचय
च्यांग त्सेमिन का जन्म अगस्त 1926 में हुआ था। वे 1989 में CPC केंद्रीय समिति के महासचिव चुने गए और पार्टी के केंद्रीय सामूहिक नेतृत्व की तीसरी पीढ़ी के प्रमुख व्यक्ति रहे। त्रि-प्रतिनिधित्व सिद्धांत के प्रमुख संस्थापक के रूप में उनकी विचारधारा आज भी चीनी राजनीति में प्रासंगिक मानी जाती है। 2022 में 96 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
संगोष्ठी के प्रमुख विषय
थ्साई छी ने अपने संबोधन में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ज़ोर दिया — मार्क्सवाद को चीनी संदर्भ और समय की ज़रूरतों के अनुरूप ढालना, चीनी आधुनिकीकरण के ज़रिए एक महान देश का निर्माण, और सभी मोर्चों पर राष्ट्रीय पुनरुत्थान की दिशा में आगे बढ़ना। उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाले विकास को आगे बढ़ाने और समाजवादी संस्कृति को फलने-फूलने में मदद करने के लिए मज़बूत सांस्कृतिक विश्वास कायम करने का भी आह्वान किया।
इसके अलावा, मानवता के लिए साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण और पूर्ण तथा कठोर पार्टी स्वशासन को मज़बूत करने के प्रयासों पर भी बल दिया गया। यह ऐसे समय में आया है जब चीन अपनी वैश्विक भूमिका और आंतरिक पार्टी अनुशासन दोनों को लेकर नई रणनीति बना रहा है।
आगे क्या
यह संगोष्ठी सोमवार से बुधवार तक, यानी 18 से 20 अगस्त तक चलेगी। गौरतलब है कि यह आयोजन केवल एक स्मरण समारोह नहीं, बल्कि चीनी नेतृत्व के लिए अपनी वैचारिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सुनियोजित मंच है।