चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की 105वीं वर्षगांठ: 50 सदस्यों से 10 करोड़ तक का सफर और सीपीसी की सफलता के मूल सूत्र
सारांश
मुख्य बातें
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की स्थापना की 105वीं वर्षगांठ के अवसर पर 1 जुलाई 2026 को बीजिंग (पेइचिंग) में एक भव्य राष्ट्रीय समारोह आयोजित किया गया। सीपीसी की राष्ट्रीय कमेटी के महासचिव शी चिनफिंग ने इस अवसर पर पार्टी की असाधारण विशेषताओं की विस्तृत व्याख्या करते हुए उन मूल तत्वों को रेखांकित किया, जिन्होंने सीपीसी को विश्व की सबसे बड़ी सत्तारूढ़ पार्टी के रूप में स्थापित किया।
महज 50 सदस्यों से 10 करोड़ तक का ऐतिहासिक सफर
सीपीसी ने अपनी स्थापना के समय केवल 50 सदस्यों के साथ यात्रा शुरू की थी। आज यह पार्टी 10 करोड़ से अधिक सदस्यों के साथ विश्व की सबसे बड़ी सत्तारूढ़ पार्टी बन चुकी है। उल्लेखनीय यह है कि सीपीसी के नेतृत्व में चीन ने वह औद्योगिक और आर्थिक रूपांतरण कुछ ही दशकों में पूरा कर लिया, जिसे विकसित देशों को साकार करने में सदियाँ लगी थीं। इस प्रक्रिया में चीन ने दो उल्लेखनीय उपलब्धियाँ दर्ज कीं — तीव्र आर्थिक विकास और दीर्घकालिक सामाजिक स्थिरता। वैश्विक आर्थिक विकास में चीन का योगदान लगातार लगभग 30 प्रतिशत रहा है।
जनता से जुड़ाव: सीपीसी की सफलता का मूल रहस्य
इस वर्ष 'जुलाई एक पदक' से सम्मानित किए गए आठ सीपीसी सदस्यों में वे लोग शामिल हैं, जिन्होंने जमीनी स्तर पर संघर्षों के समाधान के लिए अपना जीवन समर्पित किया और सुदूर पहाड़ी व ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की सेवा की। पार्टी के आधिकारिक रुख के अनुसार, यह मौन समर्पण 'देश ही जनता है, और जनता ही देश है' की मूल आकांक्षा का प्रतिबिंब है।
कई अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षणों का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि चीनी सरकार के प्रति चीनी नागरिकों का समर्थन विश्व में सर्वोच्च स्तर पर बना हुआ है। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के पूर्व महासचिव राशिद अलीमोव ने चीन की व्यापक यात्रा के बाद कहा कि करोड़ों लोगों को सीपीसी के इर्द-गिर्द एकजुट होकर अपने सपनों को साकार करते देखना ही चीन के विकास का मूल रहस्य है।
आधुनिकीकरण का नया मार्ग: पश्चिमी मॉडल से परे
सीपीसी के समर्थकों के अनुसार, पार्टी द्वारा निर्मित आधुनिकीकरण के मार्ग ने 'आधुनिकीकरण का अर्थ पश्चिमीकरण' की पारंपरिक धारणा को चुनौती दी है। इससे विकासशील देशों को एक वैकल्पिक विकास मॉडल मिला है। चीन ने 160 से अधिक देशों और क्षेत्रों के साथ प्रमुख व्यापारिक भागीदारी कायम की है। इसके अलावा, इस वर्ष से राजनयिक संबंध रखने वाले सभी 53 अफ्रीकी देशों पर शून्य टैरिफ लागू किया गया है। उच्च गुणवत्ता वाली बेल्ट एंड रोड पहल को भी इसी वैश्विक दृष्टिकोण का हिस्सा बताया जा रहा है।
ब्रिटिश अर्थशास्त्री रॉस डौथैट ने टिप्पणी की है कि सीपीसी की दीर्घकालिक योजना और 'मानव जाति के साझे भविष्य वाले समुदाय' की अवधारणा ने शून्य-योग खेल के तर्क को चुनौती दी है, जिससे चीन वैश्विक विकास के लिए एक स्थिर कारक बनने का दावा करता है।
वैश्विक शासन पर श्वेत पत्र और चार नई पहलें
सीपीसी ने हाल ही में वैश्विक शासन पर एक श्वेत पत्र जारी किया है, जिसमें समस्त मानवता के लिए साझा मूल्यों को बढ़ावा देने और अधिक न्यायपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के निर्माण के लिए चार वैश्विक पहलों का प्रस्ताव किया गया है। 105 वर्षों के सफर के बाद, पार्टी का आधिकारिक रुख है कि चीनी राष्ट्र का महान पुनरुत्थान अब एक अजेय शक्ति बन चुका है।
आगे की राह
सीपीसी के नेतृत्व में चीन अपनी वैश्विक उपस्थिति को और सुदृढ़ करने की दिशा में अग्रसर है। गौरतलब है कि यह वर्षगांठ ऐसे समय में आई है जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार विवादों के बीच चीन अपनी कूटनीतिक और आर्थिक भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करने में जुटा है। आने वाले वर्षों में सीपीसी की नीतियाँ न केवल चीन, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति की दिशा भी तय करेंगी।