पीएम मोदी साणंद में 22,516 करोड़ रुपये के सेमीकंडक्टर संयंत्र का उद्घाटन करेंगे
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नई दिल्ली, 28 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज साणंद में एक अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर असेंबली, परीक्षण, मार्किंग और पैकेजिंग (एटीएमपी) सुविधा का उद्घाटन करेंगे। इस आयोजन को राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर मिशन के अंतर्गत भारत की सेमीकंडक्टर निर्माण महत्वाकांक्षाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा साणंद की इस इकाई को 22,516 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित किया गया है। यह सुविधा वैश्विक बाजारों के लिए लक्षित सॉलिड स्टेट ड्राइव (एसएसडी), रैम-प्रकार के डीआरएएम और नैंड उपकरणों सहित सेमीकंडक्टर मेमोरी उत्पादों की असेंबली, परीक्षण, मार्किंग और पैकेजिंग का कार्य करेगी।
सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में इस संयंत्र में 2,000 कर्मचारी कार्यरत हैं। आने वाले वर्षों में इस संख्या में वृद्धि की उम्मीद है, जिससे लगभग 5,000 लोगों को रोजगार मिलेगा। कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि इस संयंत्र में दिव्यांगजन भी ऑपरेटर और तकनीशियन के रूप में कार्यरत हैं, और कौशलयुक्त व्यक्तियों के लिए भी अवसर उपलब्ध हैं।
यह परियोजना निर्धारित समय सीमा में पूरी की गई है, और राज्य सरकार का मानना है कि गुजरात भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में एक अहम भूमिका निभा रहा है। माइक्रोन टेक्नोलॉजी के अध्यक्ष और सीईओ, संजय मेहरोत्रा ने उभरती तकनीक, मेमोरी और स्टोरेज के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि आज के तकनीकी युग में, विशेषकर एआई में, मेमोरी और स्टोरेज की महत्वपूर्ण भूमिका है। मजबूत मेमोरी और स्टोरेज समर्थन के बिना, एआई सिस्टम ठीक से कार्य नहीं कर सकते। जैसे-जैसे एआई के प्रयोग तेज और वास्तविक समय में प्रतिक्रियाएं देने की आवश्यकता बढ़ रही है, एडवांस मेमोरी समाधान की मांग भी बढ़ती जा रही है।
यह ध्यान देने योग्य है कि एटीएमपी संयंत्र में उपयोग होने वाली सेमीकंडक्टर निर्माण प्रक्रिया रेत से शुरू होती है, जिससे शुद्ध सिलिकॉन निकाला जाता है। इस सिलिकॉन को पिघलाकर लंबे बेलनाकार आकार (इंगट) में ढाला जाता है, जिन्हें पतली वेफर्स में काटा जाता है।
फेब्रिकेशन प्लांट में इन वेफर पर विशेष इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन बनाए जाते हैं और फोटोलिथोग्राफी के माध्यम से कई परतें चढ़ाई जाती हैं, जिससे ट्रांजिस्टर बनते हैं और मेमोरी संरचना तैयार होती है। इसके बाद वेफर्स को अलग-अलग चिप्स में काटा जाता है। इन चिप्स को साणंद स्थित एटीएमपी संयंत्र में भेजा जाता है। वहां इनकी असेंबली की जाती है और फिर इनकी गुणवत्ता की जांच होती है। परीक्षण के दौरान चिप की गति, मेमोरी क्षमता और विश्वसनीय कार्य करने की क्षमता का आकलन किया जाता है।
सभी परीक्षण पूरे होने के बाद चिप पर आवश्यक जानकारी दर्ज की जाती है और इसे पैक कर बाजार में भेजने के लिए तैयार किया जाता है।
साणंद की यह फैक्ट्री कंपनी की विश्वभर में स्थित इकाइयों में बने एडवांस डीआरएएम और नैंड वेफर को प्रोसेस करेगी और उन्हें तैयार मेमोरी उत्पाद में परिवर्तित करेगी।
कंपनी ने कहा कि यह उत्पादन अंतरराष्ट्रीय बाजारों की आवश्यकताओं को पूरा करेगा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम में उपयोग किए जाने वाले मेमोरी और स्टोरेज समाधानों सहित बढ़ती मांग को पूरा करने में सहायक होगा।