साणंद में सेमीकंडक्टर क्रांति: PM मोदी 4 जुलाई को करेंगे CG सेमी OSAT प्लांट का उद्घाटन, सालाना 500 करोड़ चिप्स की क्षमता
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई 2026 को गुजरात के अहमदाबाद जिले के साणंद में सीजी सेमी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (OSAT) सुविधा का उद्घाटन करेंगे। ₹7,500 करोड़ से अधिक के निवेश से तैयार यह संयंत्र इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत स्वीकृत पहली चार परियोजनाओं में शामिल है और भारत के घरेलू सेमीकंडक्टर निर्माण इकोसिस्टम के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव माना जा रहा है।
उद्घाटन का कार्यक्रम
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, मोदी पहले राजस्थान के कार्यक्रमों को पूरा करने के बाद शाम करीब 4:30 बजे IST साणंद पहुँचेंगे। उद्घाटन के बाद वह वहाँ उपस्थित जनसमूह को संबोधित भी करेंगे। राजस्थान में मोदी जोधपुर हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे, संशोधित उड़ान योजना की शुरुआत करेंगे और बालोतरा में ₹1.06 लाख करोड़ की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे।
प्लांट की क्षमता और सेवाएँ
यह अत्याधुनिक सुविधा सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एंड-टू-एंड असेंबली और टेस्टिंग सेवाएँ प्रदान करेगी। संयंत्र में वेफर सॉर्टिंग, असेंबली, टेस्टिंग, पैकेज डिज़ाइन, फेल्योर एनालिसिस, टेस्ट प्रोग्राम डेवलपमेंट, प्रोडक्ट कैरेक्टराइजेशन और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट जैसी सेवाएँ उपलब्ध होंगी। पूरी क्षमता पर संचालन शुरू होने के बाद यह संयंत्र प्रतिवर्ष 500 करोड़ (5 बिलियन) सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन करने में सक्षम होगा।
किन क्षेत्रों को मिलेगा फायदा
यह प्लांट ऑटोमोबाइल, औद्योगिक, दूरसंचार, 5G और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसे क्षेत्रों की माँग पूरी करेगा। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के विस्तार के साथ बढ़ती मेमोरी और स्टोरेज समाधानों की ज़रूरतों को भी पूरा करने में यह अहम भूमिका निभाएगा। गौरतलब है कि वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में चीन और ताइवान के वर्चस्व को देखते हुए भारत के लिए यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन में स्थान
प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस उद्घाटन को भारत की सेमीकंडक्टर निर्माण यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि करार दिया है। यह सुविधा इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के अंतर्गत व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने वाले शुरुआती संयंत्रों में से एक है। इससे भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में अपनी स्थिति और सुदृढ़ करेगा तथा घरेलू उत्पादन इकोसिस्टम को नई ऊर्जा मिलेगी।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब दुनियाभर की सरकारें सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता के लिए अरबों डॉलर लगा रही हैं। साणंद का यह संयंत्र भारत को वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला में एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस कदम है। आने वाले महीनों में इस मिशन के तहत अन्य परियोजनाओं के भी चरणबद्ध रूप से शुरू होने की उम्मीद है।