2026 के अंत तक भारत में 5 सेमीकंडक्टर प्लांट चालू होंगे: अश्विनी वैष्णव
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 5 जुलाई 2026 को घोषणा की कि भारत में 2026 के अंत तक पाँच सेमीकंडक्टर प्लांट पूरी तरह से परिचालन में आ जाएंगे, जिससे देश वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में एक निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार होगा। यह घोषणा भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तेज़ी से हो रहे विस्तार की पुष्टि करती है, जहाँ केंद्र सरकार अब तक 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को स्वीकृति दे चुकी है।
मुख्य घटनाक्रम
वैष्णव के अनुसार, स्वीकृत 12 परियोजनाओं में से तीन पहले ही व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुकी हैं, जबकि दो अन्य प्लांट आने वाले कुछ महीनों में उद्घाटन के लिए तैयार हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 फरवरी 2026 और 31 मार्च 2026 को देश के पहले और दूसरे सेमीकंडक्टर प्लांट का शुभारंभ किया था। इसके बाद साणंद, गुजरात स्थित तीसरी सीजी सेमी (OSAT) फैसिलिटी भी व्यावसायिक उत्पादन में प्रवेश कर चुकी है।
सीजी सेमी प्लांट: एक उल्लेखनीय उपलब्धि
साणंद स्थित सीजी सेमी प्लांट का भूमिपूजन 13 मार्च 2024 को हुआ था और मात्र 27 महीनों में यह व्यावसायिक उत्पादन तक पहुँच गया — जो वैश्विक मानकों पर भी उल्लेखनीय है। इस परियोजना की लागत ₹7,600 करोड़ से अधिक है और इसे जापान की रेनेसास इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ साझेदारी में विकसित किया गया है। इस साझेदारी से भारत को वैश्विक तकनीक, आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों तक सीधी पहुँच मिली है।
वैष्णव ने इस उपलब्धि का श्रेय गुजरात सरकार के सक्रिय सहयोग और प्रभावी क्रियान्वयन को दिया। यह प्लांट ऑटोमोबाइल, स्कूटर और औद्योगिक उपकरणों में उपयोग होने वाले सेमीकंडक्टर तैयार करेगा, और इनका निर्यात जापान, अमेरिका तथा यूरोप को भी किया जाएगा।
सामाजिक बदलाव: महिला कार्यबल की भागीदारी
वैष्णव ने इस प्लांट को केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक भी बताया। झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, बिहार, जम्मू-कश्मीर, केरल और गुजरात की युवा महिलाएं यहाँ ऑपरेटर के रूप में कार्यरत हैं। इन्हें विशेष प्रशिक्षण के लिए मलेशिया भेजा गया था। मंत्री ने बताया कि भविष्य में इस स्तर का विश्वस्तरीय प्रशिक्षण भारत में ही उपलब्ध कराया जाएगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की व्यापक तस्वीर
वैष्णव के अनुसार, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र अब ₹13 लाख करोड़ का उद्योग बन चुका है और इससे 25 लाख से अधिक लोगों को रोज़गार मिला है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर देश सेमीकंडक्टर आपूर्ति में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं और चीन पर निर्भरता घटाने की होड़ जारी है। भारत की यह प्रगति उसे एक वैकल्पिक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित कर सकती है।
आगे की राह
शेष स्वीकृत परियोजनाओं के क्रमशः चालू होने के साथ भारत का सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र और सुदृढ़ होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक सप्लाई चेन में विश्वसनीय भागीदार बनने के लिए गुणवत्ता की निरंतरता और निर्यात साझेदारियों का विस्तार निर्णायक होगा। भारत के लिए यह दशक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी स्थायी पहचान बनाने का सबसे महत्वपूर्ण अवसर है।