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2026 के अंत तक भारत में 5 सेमीकंडक्टर प्लांट चालू होंगे: अश्विनी वैष्णव

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2026 के अंत तक भारत में 5 सेमीकंडक्टर प्लांट चालू होंगे: अश्विनी वैष्णव

सारांश

भारत सेमीकंडक्टर निर्माण में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। 2026 के अंत तक पाँच प्लांट चालू होंगे, तीन पहले से उत्पादन में हैं। साणंद का ₹7,600 करोड़ का सीजी सेमी प्लांट मात्र 27 महीनों में तैयार हुआ — और अब जापान, अमेरिका व यूरोप को निर्यात की तैयारी है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 5 जुलाई 2026 को घोषणा की कि 2026 के अंत तक 5 सेमीकंडक्टर प्लांट चालू हो जाएंगे।
केंद्र सरकार 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को स्वीकृति दे चुकी है; 3 पहले से उत्पादन में, 2 जल्द उद्घाटन के लिए तैयार।
साणंद, गुजरात स्थित सीजी सेमी (OSAT) प्लांट ₹7,600 करोड़ की लागत से 27 महीनों में तैयार हुआ; जापान की रेनेसास इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ साझेदारी।
उत्पाद जापान, अमेरिका और यूरोप को निर्यात किए जाएंगे; ऑटोमोबाइल व औद्योगिक उपकरणों में उपयोग।
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र अब ₹13 लाख करोड़ का उद्योग; 25 लाख से अधिक रोज़गार।
कई राज्यों की युवा महिलाएं प्लांट में ऑपरेटर, विशेष प्रशिक्षण के लिए मलेशिया भेजी गईं।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 5 जुलाई 2026 को घोषणा की कि भारत में 2026 के अंत तक पाँच सेमीकंडक्टर प्लांट पूरी तरह से परिचालन में आ जाएंगे, जिससे देश वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में एक निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार होगा। यह घोषणा भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तेज़ी से हो रहे विस्तार की पुष्टि करती है, जहाँ केंद्र सरकार अब तक 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को स्वीकृति दे चुकी है।

मुख्य घटनाक्रम

वैष्णव के अनुसार, स्वीकृत 12 परियोजनाओं में से तीन पहले ही व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुकी हैं, जबकि दो अन्य प्लांट आने वाले कुछ महीनों में उद्घाटन के लिए तैयार हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 फरवरी 2026 और 31 मार्च 2026 को देश के पहले और दूसरे सेमीकंडक्टर प्लांट का शुभारंभ किया था। इसके बाद साणंद, गुजरात स्थित तीसरी सीजी सेमी (OSAT) फैसिलिटी भी व्यावसायिक उत्पादन में प्रवेश कर चुकी है।

सीजी सेमी प्लांट: एक उल्लेखनीय उपलब्धि

साणंद स्थित सीजी सेमी प्लांट का भूमिपूजन 13 मार्च 2024 को हुआ था और मात्र 27 महीनों में यह व्यावसायिक उत्पादन तक पहुँच गया — जो वैश्विक मानकों पर भी उल्लेखनीय है। इस परियोजना की लागत ₹7,600 करोड़ से अधिक है और इसे जापान की रेनेसास इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ साझेदारी में विकसित किया गया है। इस साझेदारी से भारत को वैश्विक तकनीक, आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों तक सीधी पहुँच मिली है।

वैष्णव ने इस उपलब्धि का श्रेय गुजरात सरकार के सक्रिय सहयोग और प्रभावी क्रियान्वयन को दिया। यह प्लांट ऑटोमोबाइल, स्कूटर और औद्योगिक उपकरणों में उपयोग होने वाले सेमीकंडक्टर तैयार करेगा, और इनका निर्यात जापान, अमेरिका तथा यूरोप को भी किया जाएगा।

सामाजिक बदलाव: महिला कार्यबल की भागीदारी

वैष्णव ने इस प्लांट को केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक भी बताया। झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, बिहार, जम्मू-कश्मीर, केरल और गुजरात की युवा महिलाएं यहाँ ऑपरेटर के रूप में कार्यरत हैं। इन्हें विशेष प्रशिक्षण के लिए मलेशिया भेजा गया था। मंत्री ने बताया कि भविष्य में इस स्तर का विश्वस्तरीय प्रशिक्षण भारत में ही उपलब्ध कराया जाएगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की व्यापक तस्वीर

वैष्णव के अनुसार, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र अब ₹13 लाख करोड़ का उद्योग बन चुका है और इससे 25 लाख से अधिक लोगों को रोज़गार मिला है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर देश सेमीकंडक्टर आपूर्ति में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं और चीन पर निर्भरता घटाने की होड़ जारी है। भारत की यह प्रगति उसे एक वैकल्पिक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित कर सकती है।

आगे की राह

शेष स्वीकृत परियोजनाओं के क्रमशः चालू होने के साथ भारत का सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र और सुदृढ़ होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक सप्लाई चेन में विश्वसनीय भागीदार बनने के लिए गुणवत्ता की निरंतरता और निर्यात साझेदारियों का विस्तार निर्णायक होगा। भारत के लिए यह दशक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी स्थायी पहचान बनाने का सबसे महत्वपूर्ण अवसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी निर्यात की निरंतरता और वैश्विक ग्राहकों का भरोसा होगी। भारत का सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे स्थापित खिलाड़ियों से दशकों पीछे है, और OSAT (आउटसोर्स्ड असेंबली एंड टेस्टिंग) स्तर से आगे फैब-स्तर पर जाना कहीं अधिक जटिल और पूंजी-गहन चुनौती है। ₹13 लाख करोड़ के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के आँकड़े उत्साहजनक हैं, पर सेमीकंडक्टर में मूल्य-संवर्धन की वास्तविक हिस्सेदारी अभी भी सीमित है। जब तक भारत डिज़ाइन और उन्नत फैब्रिकेशन में कदम नहीं रखता, वैश्विक सप्लाई चेन में उसकी भूमिका असेंबली तक सीमित रहने का जोखिम बना रहेगा।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में 2026 के अंत तक कितने सेमीकंडक्टर प्लांट चालू होंगे?
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, 2026 के अंत तक भारत में पाँच सेमीकंडक्टर प्लांट पूरी तरह चालू हो जाएंगे। इनमें से तीन पहले ही व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुके हैं और दो जल्द उद्घाटन के लिए तैयार हैं।
सीजी सेमी प्लांट साणंद क्या है और इसकी खासियत क्या है?
साणंद, गुजरात स्थित सीजी सेमी (OSAT) प्लांट ₹7,600 करोड़ से अधिक की लागत से बना है और जापान की रेनेसास इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ साझेदारी में विकसित किया गया है। यह प्लांट मात्र 27 महीनों में भूमिपूजन से व्यावसायिक उत्पादन तक पहुँचा, जो वैश्विक मानकों पर भी उल्लेखनीय उपलब्धि है।
इन प्लांटों में बने सेमीकंडक्टर किन उत्पादों में और कहाँ निर्यात होंगे?
इन प्लांटों में तैयार सेमीकंडक्टर ऑटोमोबाइल, स्कूटर और औद्योगिक उपकरणों में उपयोग होंगे। साथ ही इनका निर्यात जापान, अमेरिका और यूरोप को किया जाएगा।
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अभी कितना बड़ा है?
अश्विनी वैष्णव के अनुसार, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र अब ₹13 लाख करोड़ का उद्योग बन चुका है और इससे 25 लाख से अधिक लोगों को रोज़गार मिला है।
इन प्लांटों में महिला कार्यबल की क्या भूमिका है?
झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, बिहार, जम्मू-कश्मीर, केरल और गुजरात की युवा महिलाएं इन प्लांटों में ऑपरेटर के रूप में कार्यरत हैं। इन्हें विशेष प्रशिक्षण के लिए मलेशिया भेजा गया था और भविष्य में ऐसा प्रशिक्षण भारत में ही उपलब्ध कराने की योजना है।
राष्ट्र प्रेस
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