अर्जुन अवॉर्ड के लिए नरेंद्र बेरवाल चुने गए, हांसी के सोरखी गांव में जश्न
सारांश
मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल को प्रतिष्ठित अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना गया है। हरियाणा के हांसी जिले के सोरखी गांव से ताल्लुक रखने वाले नरेंद्र की इस उपलब्धि पर 18 अगस्त को पूरे जिले में खुशी की लहर दौड़ गई। परिजनों, ग्रामीणों और खेल प्रेमियों ने मिठाइयाँ बाँटकर इस ऐतिहासिक क्षण का जश्न मनाया।
शानदार पदक-सफर की बुनियाद
ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 90 किलोग्राम से अधिक भारवर्ग में रजत पदक जीतना नरेंद्र के अर्जुन अवॉर्ड चयन की प्रत्यक्ष वजह बना। फाइनल में इंग्लैंड के डेमर थॉमस से 0-5 से हार के बावजूद उन्होंने क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में जीत दर्ज कर पदक सुनिश्चित किया था। यह उनके करियर की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों में से एक है।
नरेंद्र की उपलब्धियों की सूची लंबी है — एशियन गेम्स 2023 में कांस्य पदक, यूरोपियन कप में स्वर्ण पदक, यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत, यूथ एशियन चैंपियनशिप में कांस्य, और नेशनल गेम्स 2025 में स्वर्ण पदक। इससे पहले फिलीपींस यूथ वर्ल्ड कप 2012 में रजत, आर्मेनिया यूथ एशियन चैंपियनशिप 2013 में रजत और मिलिट्री वर्ल्ड गेम्स 2015 में भी रजत पदक उनके खाते में हैं।
मुक्केबाज का संघर्ष और अनुशासन
नरेंद्र बेरवाल ने वर्ष 2009 में दूध, दही और हलवे जैसे पौष्टिक आहार के साथ बॉक्सिंग की शुरुआत की। मैट्रिक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पूरी तरह मुक्केबाजी को अपना लक्ष्य बना लिया। भिवानी बॉक्सिंग एकेडमी में कोच देवराज के मार्गदर्शन में उन्होंने कड़े अभ्यास से अपने खेल को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
वर्ष 2013 में नरेंद्र भारतीय सेना में भर्ती हुए और उसके बाद से उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व किया। नरेंद्र का मानना है कि मेहनत, अनुशासन, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और कोच की सलाह का ईमानदारी से पालन करने वाला खिलाड़ी निश्चित रूप से सफलता हासिल कर सकता है।
परिवार और गांव का गर्व
नरेंद्र के पिता जगदीश बेरवाल और माता रोशनी देवी ने बेटे के चयन पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह पूरे सोरखी गांव और हांसी जिले के लिए गर्व का क्षण है। परिवार को उम्मीद है कि नरेंद्र आने वाले एशियन गेम्स और ओलंपिक में भी भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतेंगे।
नरेंद्र की नज़र अब ओलंपिक स्वर्ण पर
कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतने के बाद नरेंद्र ने कहा था कि उनका सफर अभी समाप्त नहीं हुआ है और अगला लक्ष्य एशियन गेम्स तथा ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय 16 वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास को दिया। अर्जुन अवॉर्ड की यह मान्यता उनके इस दीर्घकालिक समर्पण की स्वीकृति है — और आने वाले बड़े मंचों के लिए एक मज़बूत प्रेरणा।