29 सितंबर 2026
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नरेंद्र बेरवाल ने एशियन गेम्स 2026 में जीता ब्रॉन्ज, लगातार दूसरी बार रचा इतिहास

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नरेंद्र बेरवाल ने एशियन गेम्स 2026 में जीता ब्रॉन्ज, लगातार दूसरी बार रचा इतिहास

सारांश

हांसी के मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल ने एशियन गेम्स 2026 में 90 किग्रा भारवर्ग में कांस्य पदक जीतकर लगातार दूसरी बार इतिहास रचा। सेमीफाइनल में विश्व चैंपियन आइबेक ओरलबे से 5-0 की हार के बावजूद पदक पक्का किया। अब उनकी नज़र अप्रैल में कजाकिस्तान में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप और 2028 ओलंपिक क्वालिफिकेशन पर है।

मुख्य बातें

नरेंद्र बेरवाल ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों के 90 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक जीता।
यह एशियन गेम्स में उनका लगातार दूसरा ब्रॉन्ज मेडल है — पहला हांगझोऊ एशियन गेम्स में मिला था।
सेमीफाइनल में कजाकिस्तान के विश्व चैंपियन आइबेक ओरलबे ने 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से हराया।
बेरवाल ने अप्रैल में कजाकिस्तान में होने वाली विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने का संकल्प जताया।
विश्व चैंपियनशिप का प्रदर्शन 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक क्वालिफिकेशन की दिशा तय करेगा।

हरियाणा के हांसी के मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों के 90 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक जीतकर भारतीय मुक्केबाजी में एक नया अध्याय जोड़ दिया। 29 सितंबर को सेमीफाइनल में हार के बावजूद पदक सुनिश्चित कर बेरवाल ने एशियन गेम्स में लगातार दूसरी बार ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया — यह उपलब्धि उन्हें भारत के सबसे भरोसेमंद हैवीवेट मुक्केबाजों में शुमार करती है।

सेमीफाइनल में विश्व चैंपियन से टक्कर

सेमीफाइनल मुकाबले में नरेंद्र बेरवाल का सामना कजाकिस्तान के मौजूदा विश्व चैंपियन आइबेक ओरलबे से हुआ। बेरवाल ने पूरी ताकत से मुकाबला किया, लेकिन सभी पाँचों जजों ने 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से ओरलबे के पक्ष में निर्णय दिया। अंतिम राउंड में बेरवाल को स्टैंडिंग काउंट का भी सामना करना पड़ा, जो मुकाबले की कठिनाई को दर्शाता है।

गौरतलब है कि ओरलबे इस समय विश्व मुक्केबाजी के शीर्ष नामों में से एक हैं, और उनसे इस स्तर पर टक्कर लेना भी बेरवाल की क्षमता का प्रमाण माना जा रहा है।

लगातार दूसरा एशियन गेम्स पदक — क्यों है यह खास

इससे पहले बेरवाल ने हांगझोऊ एशियन गेम्स में भी 90 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक जीता था। लगातार दो एशियन गेम्स में पदक जीतना भारतीय हैवीवेट मुक्केबाजी में विरले ही देखने को मिलता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक की तैयारियों में मुक्केबाजी को प्राथमिकता दे रहा है।

बेरवाल की यह निरंतरता उन्हें न केवल हरियाणा बल्कि समूचे भारतीय खेल जगत में एक प्रेरणास्रोत बनाती है।

बेरवाल की प्रतिक्रिया — अगला निशाना वर्ल्ड चैंपियनशिप

मुकाबले के बाद नरेंद्र बेरवाल ने कहा, 'मैंने रिंग में अपना 100 प्रतिशत देने की कोशिश की, लेकिन कोच की रणनीति को पूरी तरह लागू नहीं कर पाया। अब मेरा पूरा फोकस वर्ल्ड चैंपियनशिप पर है। अप्रैल में कजाकिस्तान में वर्ल्ड चैंपियनशिप है। यहाँ से मैं गोल्ड मेडल जीतकर आऊंगा।'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विश्व चैंपियनशिप के प्रदर्शन के आधार पर ही उनके 2028 ओलंपिक क्वालिफिकेशन की दिशा तय होगी।

आगे क्या है बेरवाल की राह

बेरवाल के सामने अब दोहरी चुनौती है — अप्रैल 2027 में कजाकिस्तान में होने वाली विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक और उसके जरिये 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए टिकट हासिल करना। उन्होंने संकेत दिया कि वह आगामी प्रतियोगिताओं के लिए और बेहतर तैयारी के साथ उतरेंगे।

एशियन गेम्स में लगातार दूसरा पदक बेरवाल को भारतीय मुक्केबाजी के सबसे मज़बूत दावेदारों में खड़ा करता है — अब निगाहें विश्व चैंपियनशिप के रिंग पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ खिलाड़ी एक टूर्नामेंट के बाद गुमनाम हो जाते हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारतीय मुक्केबाजी का ढाँचा उन्हें विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक के लिए उस विशेषज्ञ कोचिंग और रणनीतिक तैयारी दे पाएगा, जो ओरलबे जैसे प्रतिद्वंद्वियों से पार पाने के लिए ज़रूरी है। बेरवाल का खुद यह स्वीकार करना कि वह 'कोच की रणनीति पूरी तरह लागू नहीं कर पाए', यह सवाल उठाता है कि क्या तैयारी में कोई व्यवस्थागत खामी है। 2028 ओलंपिक की राह में सिर्फ जज्बा नहीं, सटीक योजना और संसाधन भी चाहिए।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नरेंद्र बेरवाल ने एशियन गेम्स 2026 में कौन-सा पदक जीता?
नरेंद्र बेरवाल ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों के 90 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक जीता। यह एशियन गेम्स में उनका लगातार दूसरा ब्रॉन्ज मेडल है।
नरेंद्र बेरवाल का सेमीफाइनल में किससे मुकाबला हुआ?
सेमीफाइनल में नरेंद्र बेरवाल का सामना कजाकिस्तान के मौजूदा विश्व चैंपियन आइबेक ओरलबे से हुआ। सभी पाँचों जजों ने 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से ओरलबे को विजेता घोषित किया।
नरेंद्र बेरवाल का पहला एशियन गेम्स पदक कब और कहाँ मिला था?
नरेंद्र बेरवाल ने इससे पहले हांगझोऊ एशियन गेम्स में भी 90 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक जीता था। एशियन गेम्स 2026 में उनका यह लगातार दूसरा पदक है।
नरेंद्र बेरवाल का अगला बड़ा लक्ष्य क्या है?
नरेंद्र बेरवाल का अगला प्रमुख लक्ष्य अप्रैल में कजाकिस्तान में होने वाली विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतना है। इसके साथ ही वह 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए क्वालिफिकेशन हासिल करना चाहते हैं।
नरेंद्र बेरवाल कहाँ के रहने वाले हैं?
नरेंद्र बेरवाल हरियाणा के हांसी के रहने वाले हैं। वह भारतीय हैवीवेट मुक्केबाजी के प्रमुख नामों में से एक हैं और एशियन गेम्स में लगातार दो पदक जीत चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
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