नरेंद्र बेरवाल ने एशियन गेम्स 2026 में जीता ब्रॉन्ज, लगातार दूसरी बार रचा इतिहास
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के हांसी के मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों के 90 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक जीतकर भारतीय मुक्केबाजी में एक नया अध्याय जोड़ दिया। 29 सितंबर को सेमीफाइनल में हार के बावजूद पदक सुनिश्चित कर बेरवाल ने एशियन गेम्स में लगातार दूसरी बार ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया — यह उपलब्धि उन्हें भारत के सबसे भरोसेमंद हैवीवेट मुक्केबाजों में शुमार करती है।
सेमीफाइनल में विश्व चैंपियन से टक्कर
सेमीफाइनल मुकाबले में नरेंद्र बेरवाल का सामना कजाकिस्तान के मौजूदा विश्व चैंपियन आइबेक ओरलबे से हुआ। बेरवाल ने पूरी ताकत से मुकाबला किया, लेकिन सभी पाँचों जजों ने 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से ओरलबे के पक्ष में निर्णय दिया। अंतिम राउंड में बेरवाल को स्टैंडिंग काउंट का भी सामना करना पड़ा, जो मुकाबले की कठिनाई को दर्शाता है।
गौरतलब है कि ओरलबे इस समय विश्व मुक्केबाजी के शीर्ष नामों में से एक हैं, और उनसे इस स्तर पर टक्कर लेना भी बेरवाल की क्षमता का प्रमाण माना जा रहा है।
लगातार दूसरा एशियन गेम्स पदक — क्यों है यह खास
इससे पहले बेरवाल ने हांगझोऊ एशियन गेम्स में भी 90 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक जीता था। लगातार दो एशियन गेम्स में पदक जीतना भारतीय हैवीवेट मुक्केबाजी में विरले ही देखने को मिलता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक की तैयारियों में मुक्केबाजी को प्राथमिकता दे रहा है।
बेरवाल की यह निरंतरता उन्हें न केवल हरियाणा बल्कि समूचे भारतीय खेल जगत में एक प्रेरणास्रोत बनाती है।
बेरवाल की प्रतिक्रिया — अगला निशाना वर्ल्ड चैंपियनशिप
मुकाबले के बाद नरेंद्र बेरवाल ने कहा, 'मैंने रिंग में अपना 100 प्रतिशत देने की कोशिश की, लेकिन कोच की रणनीति को पूरी तरह लागू नहीं कर पाया। अब मेरा पूरा फोकस वर्ल्ड चैंपियनशिप पर है। अप्रैल में कजाकिस्तान में वर्ल्ड चैंपियनशिप है। यहाँ से मैं गोल्ड मेडल जीतकर आऊंगा।'
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विश्व चैंपियनशिप के प्रदर्शन के आधार पर ही उनके 2028 ओलंपिक क्वालिफिकेशन की दिशा तय होगी।
आगे क्या है बेरवाल की राह
बेरवाल के सामने अब दोहरी चुनौती है — अप्रैल 2027 में कजाकिस्तान में होने वाली विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक और उसके जरिये 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए टिकट हासिल करना। उन्होंने संकेत दिया कि वह आगामी प्रतियोगिताओं के लिए और बेहतर तैयारी के साथ उतरेंगे।
एशियन गेम्स में लगातार दूसरा पदक बेरवाल को भारतीय मुक्केबाजी के सबसे मज़बूत दावेदारों में खड़ा करता है — अब निगाहें विश्व चैंपियनशिप के रिंग पर टिकी हैं।