18 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सावन बरवाल का एशियन गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल: 44 साल बाद मैराथन में भारत की वापसी, अब नज़र LA ओलंपिक 2028 पर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सावन बरवाल का एशियन गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल: 44 साल बाद मैराथन में भारत की वापसी, अब नज़र LA ओलंपिक 2028 पर

सारांश

44 साल का इंतज़ार खत्म — सावन बरवाल ने आइची नागोया में 2:11:37 का समय निकालकर एशियन गेम्स मैराथन में भारत को रजत पदक दिलाया और अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा। हिमाचल के इस सैनिक धावक की नज़र अब 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक पर है।

मुख्य बातें

सावन बरवाल ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुष मैराथन का रजत पदक जीता — 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड का समय।
1982 के बाद पहली बार भारत को एशियन गेम्स मैराथन में पदक मिला — 44 साल का इंतज़ार समाप्त।
स्वर्ण जापान के इचिटाका यामाशिता को, कांस्य चीन के पेइयू फेंग को मिला।
बरवाल ने अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड सुधारा और पर्सनल बेस्ट टाइम बनाया।
बरवाल भारतीय सेना में कार्यरत हैं और हिमाचल प्रदेश के जोगिंदरनगर, मंडी के निवासी हैं।
अगले लक्ष्य: विश्व चैंपियनशिप 2027 और लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 में पदक।

हिमाचल प्रदेश के जोगिंदरनगर निवासी धावक सावन बरवाल ने एशियन गेम्स 2026 की पुरुष मैराथन स्पर्धा में रजत पदक जीतकर भारत का 44 साल का लंबा इंतज़ार समाप्त किया — देश ने पिछली बार इस स्पर्धा में 1982 में पदक हासिल किया था। आइची नागोया, जापान में आयोजित इस दौड़ में बरवाल ने 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड का समय निकालते हुए अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड बेहतर किया।

ऐतिहासिक प्रदर्शन: रणनीति और दृढ़ता का परिणाम

जापान के इचिटाका यामाशिता ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि चीन के पेइयू फेंग को कांस्य पदक मिला। बरवाल ने दोनों के बीच रजत पदक हासिल कर भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में एक सुनियोजित रणनीति के साथ उतरे थे और अंतिम 5 6 किलोमीटर में पूरी ताकत झोंककर पदक सुनिश्चित किया।

गौरतलब है कि यह जीत महज़ एक पदक नहीं, बल्कि भारतीय मैराथन की पुनर्वापसी का प्रतीक है। 1982 के एशियन गेम्स के बाद से भारत इस स्पर्धा में पदक की दौड़ से बाहर रहा था — यानी चार दशकों से अधिक का शून्य बरवाल ने भर दिया।

भव्य स्वागत: जोगिंदरनगर ने खोले दिल के दरवाज़े

मंडी ज़िले के जोगिंदरनगर में घर लौटने पर सावन का जोरदार स्वागत हुआ। बड़ी संख्या में जुटे लोगों को देखकर वे भावुक और प्रसन्न नज़र आए। उन्होंने कहा, "लंबे समय बाद घर वापस लौटा हूं। घर पर स्वागत के लिए बड़ी संख्या में आए लोगों को देखकर काफी खुशी हुई। हर जगह खुशी का माहौल है।"

यह ऐसे समय में आया है जब हिमाचल प्रदेश से अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर प्रतिनिधित्व की मांग लगातार बढ़ रही है। बरवाल की यह जीत राज्य के युवा एथलीटों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनकर उभरी है।

भारतीय सेना का योगदान

भारतीय सेना में कार्यरत सावन बरवाल की सफलता सैन्य खेल प्रशिक्षण की शक्ति को भी रेखांकित करती है। सेना ने लंबे समय से भारतीय एथलेटिक्स को पोषित किया है और बरवाल इस परंपरा के नए वाहक बनकर उभरे हैं।

अगला लक्ष्य: विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक 2028

बरवाल ने अपने भविष्य की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए कहा, "अगला लक्ष्य वर्ल्ड चैंपियनशिप है, जो अगले साल होनी है। इसके बाद मुख्य लक्ष्य 2028 में लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलंपिक में पदक जीतना है।" उन्होंने जोड़ा कि उनके कोच उन्हें ओलंपिक मंच पर देखना चाहते हैं और वे इसके लिए कड़ी मेहनत जारी रखेंगे।

यह लक्ष्य महत्वाकांक्षी ज़रूर है, लेकिन एशियन गेम्स में राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने के बाद बरवाल की साख वैश्विक मैराथन परिदृश्य में तेज़ी से बढ़ रही है। आने वाले महीनों में विश्व चैंपियनशिप की तैयारी उनकी ओलंपिक दावेदारी को और मज़बूत करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि यह स्पर्धा इसी उपमहाद्वीप में भी सैकड़ों प्रतिभाशाली धावक पैदा करती है। 2:11:37 का समय एशियाई स्तर पर प्रभावशाली है, लेकिन ओलंपिक की दौड़ में शीर्ष अफ्रीकी और यूरोपीय धावकों से मुकाबला कड़ा होगा — और इसके लिए केवल मेहनत नहीं, विश्वस्तरीय खेल विज्ञान तथा अंतरराष्ट्रीय सर्किट का व्यापक अनुभव चाहिए। बरवाल के कोच की महत्वाकांक्षा सराहनीय है, पर सरकार और खेल प्राधिकरणों की ज़िम्मेदारी है कि वे इस प्रतिभा को राष्ट्रीय रिकॉर्ड से आगे ले जाने की संरचनात्मक व्यवस्था सुनिश्चित करें।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सावन बरवाल ने एशियन गेम्स 2026 में क्या उपलब्धि हासिल की?
सावन बरवाल ने एशियन गेम्स 2026 की पुरुष मैराथन स्पर्धा में 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड के समय के साथ रजत पदक जीता। इस जीत के साथ उन्होंने 1982 के बाद पहली बार भारत को इस स्पर्धा में पदक दिलाया — 44 वर्षों का इंतज़ार समाप्त हुआ।
सावन बरवाल कौन हैं और वे कहाँ के रहने वाले हैं?
सावन बरवाल हिमाचल प्रदेश के मंडी ज़िले के जोगिंदरनगर के निवासी हैं। वे भारतीय सेना में कार्यरत हैं और देश के शीर्ष लंबी दूरी के धावकों में शुमार हैं।
एशियन गेम्स 2026 मैराथन में स्वर्ण और कांस्य पदक किसे मिला?
जापान के इचिटाका यामाशिता ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि चीन के पेइयू फेंग को कांस्य पदक मिला। सावन बरवाल रजत पदक के साथ दूसरे स्थान पर रहे।
सावन बरवाल का अगला लक्ष्य क्या है?
बरवाल का अगला लक्ष्य अगले वर्ष होने वाली विश्व चैंपियनशिप में भाग लेना है। इसके बाद उनका मुख्य लक्ष्य 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में पदक जीतना है, जिसके लिए उनके कोच उन्हें तैयार कर रहे हैं।
एशियन गेम्स मैराथन में भारत का पिछला पदक कब आया था?
भारत ने एशियन गेम्स की मैराथन स्पर्धा में पिछली बार 1982 में पदक जीता था। सावन बरवाल की 2026 की जीत से यह 44 साल का शून्य भरा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 3 सप्ताह पहले
  7. 3 सप्ताह पहले
  8. 3 सप्ताह पहले