सावन बरवाल का एशियन गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल: 44 साल बाद मैराथन में भारत की वापसी, अब नज़र LA ओलंपिक 2028 पर
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश के जोगिंदरनगर निवासी धावक सावन बरवाल ने एशियन गेम्स 2026 की पुरुष मैराथन स्पर्धा में रजत पदक जीतकर भारत का 44 साल का लंबा इंतज़ार समाप्त किया — देश ने पिछली बार इस स्पर्धा में 1982 में पदक हासिल किया था। आइची नागोया, जापान में आयोजित इस दौड़ में बरवाल ने 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड का समय निकालते हुए अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड बेहतर किया।
ऐतिहासिक प्रदर्शन: रणनीति और दृढ़ता का परिणाम
जापान के इचिटाका यामाशिता ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि चीन के पेइयू फेंग को कांस्य पदक मिला। बरवाल ने दोनों के बीच रजत पदक हासिल कर भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में एक सुनियोजित रणनीति के साथ उतरे थे और अंतिम 5 6 किलोमीटर में पूरी ताकत झोंककर पदक सुनिश्चित किया।
गौरतलब है कि यह जीत महज़ एक पदक नहीं, बल्कि भारतीय मैराथन की पुनर्वापसी का प्रतीक है। 1982 के एशियन गेम्स के बाद से भारत इस स्पर्धा में पदक की दौड़ से बाहर रहा था — यानी चार दशकों से अधिक का शून्य बरवाल ने भर दिया।
भव्य स्वागत: जोगिंदरनगर ने खोले दिल के दरवाज़े
मंडी ज़िले के जोगिंदरनगर में घर लौटने पर सावन का जोरदार स्वागत हुआ। बड़ी संख्या में जुटे लोगों को देखकर वे भावुक और प्रसन्न नज़र आए। उन्होंने कहा, "लंबे समय बाद घर वापस लौटा हूं। घर पर स्वागत के लिए बड़ी संख्या में आए लोगों को देखकर काफी खुशी हुई। हर जगह खुशी का माहौल है।"
यह ऐसे समय में आया है जब हिमाचल प्रदेश से अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर प्रतिनिधित्व की मांग लगातार बढ़ रही है। बरवाल की यह जीत राज्य के युवा एथलीटों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनकर उभरी है।
भारतीय सेना का योगदान
भारतीय सेना में कार्यरत सावन बरवाल की सफलता सैन्य खेल प्रशिक्षण की शक्ति को भी रेखांकित करती है। सेना ने लंबे समय से भारतीय एथलेटिक्स को पोषित किया है और बरवाल इस परंपरा के नए वाहक बनकर उभरे हैं।
अगला लक्ष्य: विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक 2028
बरवाल ने अपने भविष्य की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए कहा, "अगला लक्ष्य वर्ल्ड चैंपियनशिप है, जो अगले साल होनी है। इसके बाद मुख्य लक्ष्य 2028 में लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलंपिक में पदक जीतना है।" उन्होंने जोड़ा कि उनके कोच उन्हें ओलंपिक मंच पर देखना चाहते हैं और वे इसके लिए कड़ी मेहनत जारी रखेंगे।
यह लक्ष्य महत्वाकांक्षी ज़रूर है, लेकिन एशियन गेम्स में राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने के बाद बरवाल की साख वैश्विक मैराथन परिदृश्य में तेज़ी से बढ़ रही है। आने वाले महीनों में विश्व चैंपियनशिप की तैयारी उनकी ओलंपिक दावेदारी को और मज़बूत करेगी।