नरेंद्र बेरवाल का ऐतिहासिक कारनामा: लगातार दो एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज, अब 2028 ओलंपिक कोटा निशाने पर
सारांश
मुख्य बातें
सुपर हैवीवेट मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल ने एशियन गेम्स 2026 में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया — वे अपनी वेट कैटेगरी में लगातार दो एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज बन गए हैं। पदक विजेता की वापसी पर हरियाणा में उनका भव्य स्वागत हुआ और अब उनकी नज़र अगले बड़े लक्ष्य — लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के कोटे — पर टिकी है।
ऐतिहासिक उपलब्धि का सफर
नरेंद्र बेरवाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'मैंने एशियन गेम्स 2026 में हिस्सा लिया और ब्रॉन्ज मेडल जीता। पिछली बार भी मैंने एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। अपनी वेट कैटेगरी, सुपर हैवीवेट में, मैं लगातार दो एशियन गेम्स मेडल जीतने वाला पहला इंडियन बॉक्सर बन गया हूं।' यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि हैवी और सुपर हैवीवेट वर्ग में भारत का ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपेक्षाकृत कमज़ोर रहा है।
ओलंपिक कोटे का रास्ता
बेरवाल के अनुसार, उन्होंने सीधे वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर लिया है, जो अप्रैल 2027 में कजाकिस्तान में आयोजित होगी। इसी टूर्नामेंट में ओलंपिक कोटा स्पॉट के लिए मुकाबला होगा। उनका अंतिम लक्ष्य लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 में भारत का प्रतिनिधित्व करना और देश के लिए पदक जीतना है।
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजी का प्रदर्शन
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजों ने कुल 6 पदक जीते — 3 गोल्ड और 3 ब्रॉन्ज। गोल्ड मेडल विजेताओं में लवलीना बोरगोहेन, परवीन हुड्डा और अंकुश पंघाल शामिल रहे, जबकि नरेंद्र बेरवाल, प्रिया घनघस और कपिल पोखरिया ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए।
बीएफआई अध्यक्ष की प्रतिक्रिया
बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI) के अध्यक्ष अजय सिंह ने इस शानदार प्रदर्शन पर गर्व जताया। उन्होंने कहा, 'हमें लगता है कि भारत इस बार एशियन गेम्स में उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान और चीन से आगे नंबर वन पर आया, जिन्हें बॉक्सिंग में बड़ी ताकत माना जाता है। टीम ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन हमें अति आत्मविश्वास का शिकार नहीं होना है।'
सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि इस बार हैवीवेट वर्ग में भी सफलता मिली — जो पहले भारत की कमज़ोरी मानी जाती थी। उन्होंने कहा, 'पहले कहा जाता था कि भारत सिर्फ लाइट वेट में अच्छा प्रदर्शन करता है, हैवी वेट में नहीं। इस बार 80 किग्रा और 90+ किग्रा — दोनों में मेडल मिला।'
आगे क्या होगा
नरेंद्र बेरवाल के लिए अगला पड़ाव अप्रैल 2027 में कजाकिस्तान में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप है, जहाँ ओलंपिक कोटे का निर्धारण होगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय मुक्केबाजी अपने सर्वश्रेष्ठ एशियाई प्रदर्शनों में से एक के बाद नई ऊँचाइयों की ओर देख रही है। यदि बेरवाल कजाकिस्तान में कोटा हासिल कर लेते हैं, तो वे 2028 में ओलंपिक पदक के सबसे मज़बूत दावेदारों में से एक होंगे।