14 जुलाई 2026
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ब्रिक्स ट्रेड यूनियन फोरम 2026: मांडविया बोले — भारत में 100 करोड़ से अधिक लोग सामाजिक सुरक्षा के दायरे में

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ब्रिक्स ट्रेड यूनियन फोरम 2026: मांडविया बोले — भारत में 100 करोड़ से अधिक लोग सामाजिक सुरक्षा के दायरे में

सारांश

हैदराबाद में 15वें ब्रिक्स TUF शिखर सम्मेलन में मनसुख मांडविया ने बड़ा दावा किया — भारत की सामाजिक सुरक्षा छतरी अब 100 करोड़ से अधिक नागरिकों तक पहुँच चुकी है। एक दशक में 17 करोड़ रोजगार और अगले दो साल में 3.5 करोड़ औपचारिक नौकरियों का लक्ष्य — यह भारत की श्रम नीति की नई इबारत है।

मुख्य बातें

मनसुख मांडविया ने 15 जुलाई 2026 को हैदराबाद में 15वें ब्रिक्स ट्रेड यूनियन फोरम 2026 का उद्घाटन किया।
भारत में सामाजिक सुरक्षा का दायरा 2015 के 19% से बढ़कर 2025 में 64.3% हो गया; 2026 में 100 करोड़ से अधिक नागरिक लाभान्वित।
पिछले एक दशक में 17 करोड़ रोजगार सृजित; प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत अगले दो वर्षों में 3.5 करोड़ औपचारिक नौकरियों का लक्ष्य।
ई-श्रम पोर्टल पर 31.7 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिकों का पंजीकरण।
EPFO के 8 करोड़ सक्रिय सदस्य और 80 लाख पेंशनभोगी ; ESIC से 15 करोड़ से अधिक बीमित व्यक्ति लाभान्वित।
29 पुराने श्रम कानूनों को 4 श्रम संहिताओं में समाहित; पहली बार गिग व प्लेटफॉर्म श्रमिकों को औपचारिक मान्यता।

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने 15 जुलाई 2026 को हैदराबाद में 15वें ब्रिक्स ट्रेड यूनियन फोरम (TUF) शिखर सम्मेलन 2026 का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत में सामाजिक सुरक्षा का दायरा 100 करोड़ से अधिक नागरिकों तक पहुँच चुका है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि दुनिया को एक ऐसी श्रमिक-केंद्रित व्यवस्था की आवश्यकता है जहाँ तकनीकी प्रगति सामाजिक न्याय, जिम्मेदार नवाचार और मानवीय गरिमा के सिद्धांतों पर टिकी हो।

सम्मेलन और भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता

मंत्री मांडविया ने उद्घाटन सत्र में बताया कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय 'Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability' है। उनके अनुसार यह विषय इस बात का प्रमाण है कि भारत भविष्य के कार्यक्षेत्र को समावेशी, समान और श्रमिकों के हितों पर केंद्रित बनाने के लिए संकल्पबद्ध है। तीन दिवसीय यह सम्मेलन भारतीय मजदूर संघ (BMS) द्वारा आयोजित किया गया है, जिसमें ब्रिक्स देशों के 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि और भारत के करीब 70 ट्रेड यूनियन प्रतिनिधि, श्रम विशेषज्ञ व शिक्षाविद भाग ले रहे हैं।

सामाजिक सुरक्षा का विस्तार — आँकड़ों की ज़ुबानी

मांडविया ने बताया कि वर्ष 2015 में सामाजिक सुरक्षा का दायरा कुल आबादी के केवल 19 प्रतिशत तक सीमित था, जो 2025 तक बढ़कर 64.3 प्रतिशत हो गया — यानी लगभग 94 करोड़ लोग इससे लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2026 के प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार यह संख्या 100 करोड़ से अधिक हो चुकी है। ई-श्रम पोर्टल पर 31.7 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिकों का पंजीकरण किया जा चुका है, जिससे उन्हें विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है।

रोजगार सृजन और श्रम सुधार

रोजगार के मोर्चे पर मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में देश में 17 करोड़ रोजगार के अवसर पैदा किए गए हैं। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत अगले दो वर्षों में रोजगार-आधारित प्रोत्साहन के जरिए औपचारिक क्षेत्र में 3.5 करोड़ नौकरियाँ सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। श्रम सुधारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा लागू चार श्रम संहिताओं (Labour Codes) ने 29 पुराने श्रम कानूनों को एक सरल और एकीकृत ढाँचे में समाहित किया है। इन सुधारों के तहत सार्वभौमिक न्यूनतम वेतन, नियुक्ति पत्र, बेहतर कार्यस्थल सुरक्षा और पहली बार गिग व प्लेटफॉर्म श्रमिकों को औपचारिक मान्यता दी गई है।

EPFO, ESIC और डिजिटल अवसंरचना

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के बारे में मंत्री ने कहा कि यह दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा संगठनों में से एक है, जिसके 8 करोड़ से अधिक सक्रिय सदस्य और 80 लाख पेंशनभोगी हैं। वहीं कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) 15 करोड़ से अधिक बीमित व्यक्तियों और उनके आश्रितों को स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान कर रहा है। नेशनल करियर सर्विस पोर्टल नौकरी तलाशने वालों, नियोक्ताओं, करियर केंद्रों और प्रशिक्षण संस्थानों को एक डिजिटल मंच पर जोड़ रहा है।

ब्रिक्स देशों से सहयोग का आह्वान

मांडविया ने रेखांकित किया कि ब्रिक्स देश मिलकर दुनिया की लगभग आधी आबादी और विशाल श्रमशक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा, श्रमिक गतिशीलता, कौशल विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के नियमन और सम्मानजनक रोजगार जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब ऑटोमेशन और AI के कारण वैश्विक स्तर पर रोजगार के स्वरूप में तेज़ बदलाव आ रहे हैं, और ट्रेड यूनियनें श्रमिकों के भविष्य को लेकर नई रणनीतियाँ तलाश रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह संख्या 'पंजीकृत लाभार्थियों' और 'वास्तविक लाभ प्राप्त करने वालों' के बीच के अंतर को धुंधला करती है — एक ऐसा अंतर जो भारत की कल्याण योजनाओं में बार-बार उजागर होता रहा है। 3.5 करोड़ औपचारिक नौकरियों का लक्ष्य भी तब तक अधूरा है जब तक श्रम संहिताओं को राज्य स्तर पर अधिसूचित नहीं किया जाता — जो अब तक अधिकांश राज्यों में लंबित है। गिग श्रमिकों को 'औपचारिक मान्यता' देना स्वागतयोग्य है, परंतु बिना सामाजिक सुरक्षा की बाध्यकारी व्यवस्था के यह मान्यता कागज़ी ही रहेगी। ब्रिक्स मंच पर ये आँकड़े भारत की छवि चमकाते हैं, लेकिन असली कसौटी ज़मीनी क्रियान्वयन है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

15वाँ ब्रिक्स ट्रेड यूनियन फोरम शिखर सम्मेलन 2026 क्या है?
यह ब्रिक्स देशों के ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों का वार्षिक शिखर सम्मेलन है, जो इस बार हैदराबाद में 14 जुलाई 2026 से तीन दिनों के लिए आयोजित हुआ। इसका आयोजन भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने किया और इसमें 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय व 70 भारतीय प्रतिनिधि शामिल हुए।
मनसुख मांडविया ने भारत की सामाजिक सुरक्षा कवरेज के बारे में क्या कहा?
मांडविया ने बताया कि भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 के 19% से बढ़कर 2025 में 64.3% हो गई है, जिससे लगभग 94 करोड़ लोग लाभान्वित हो रहे हैं। 2026 के प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार यह संख्या 100 करोड़ से अधिक हो चुकी है।
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत कितनी नौकरियाँ पैदा होंगी?
इस योजना के तहत अगले दो वर्षों में रोजगार-आधारित प्रोत्साहन के जरिए औपचारिक क्षेत्र में 3.5 करोड़ नौकरियाँ सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। मांडविया ने यह भी बताया कि पिछले एक दशक में देश में 17 करोड़ रोजगार के अवसर पैदा किए जा चुके हैं।
भारत की चार श्रम संहिताओं में क्या नया है?
चार श्रम संहिताओं ने 29 पुराने श्रम कानूनों को एक एकीकृत ढाँचे में समाहित किया है। इनमें सार्वभौमिक न्यूनतम वेतन, डिजिटल अनुपालन प्रणाली और पहली बार गिग व प्लेटफॉर्म श्रमिकों को औपचारिक मान्यता शामिल है।
ई-श्रम पोर्टल पर कितने श्रमिक पंजीकृत हैं?
ई-श्रम पोर्टल पर अब तक 31.7 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिकों का पंजीकरण किया जा चुका है। इससे उन्हें सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे मिल रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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