श्रम संहिता के तहत 40+ आयु के श्रमिकों के लिए राष्ट्रव्यापी वार्षिक स्वास्थ्य जांच पहल शुरू

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श्रम संहिता के तहत 40+ आयु के श्रमिकों के लिए राष्ट्रव्यापी वार्षिक स्वास्थ्य जांच पहल शुरू

सारांश

भारत सरकार ने नई श्रम संहिताओं के तहत 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी श्रमिकों के लिए वार्षिक स्वास्थ्य जांच अनिवार्य कर दी है। ESIC के ज़रिए निःशुल्क उपचार, गिग श्रमिकों का समावेश और मातृत्व अवकाश 26 सप्ताह — यह पहल भारत के श्रम सुरक्षा ढाँचे में बड़े बदलाव की शुरुआत है।

मुख्य बातें

मनसुख मांडविया ने 7 मई 2026 को 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के श्रमिकों के लिए राष्ट्रव्यापी वार्षिक स्वास्थ्य जांच पहल का शुभारंभ किया।
जांच शिविरों में पहचाने गए रोगों का उपचार और दवाएं ESIC सुविधाओं के माध्यम से निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।
सामाजिक सुरक्षा कवरेज एक दशक में 30 करोड़ से बढ़कर 94 करोड़ लाभार्थियों तक पहुँचा; 19% से 64% तक।
ESIC लाभार्थी संख्या 7 करोड़ से बढ़कर 15 करोड़ हुई; 10 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठान भी अब दायरे में।
मातृत्व अवकाश 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह किया गया; गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिक भी नई संहिता के तहत शामिल।

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने 7 मई 2026 को नई दिल्ली में 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी पंजीकृत श्रमिकों के लिए राष्ट्रव्यापी वार्षिक स्वास्थ्य जांच पहल का औपचारिक शुभारंभ किया। नई श्रम संहिताओं के अंतर्गत यह स्वास्थ्य जांच अनिवार्य की गई है, और इसे देश के श्रमबल की व्यावसायिक स्वास्थ्य देखभाल तथा सामाजिक सुरक्षा कवरेज को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम नीतिगत कदम बताया जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

डॉ. मांडविया ने इस अवसर को 'श्रम शक्ति' के सम्मान को समर्पित बताया। उन्होंने कहा कि नई श्रम संहिताओं के तहत 40 वर्ष या उससे अधिक आयु के श्रमिकों की वार्षिक स्वास्थ्य जांच कराना अनिवार्य है। जांच शिविरों के दौरान पहचाने गए रोगों का उपचार और दवाएं कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) की सुविधाओं के माध्यम से निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, स्वास्थ्य जांच के माध्यम से शीघ्र निदान से गंभीर बीमारियों को समय रहते रोकने में सहायता मिल सकती है — जो असंगठित और खतरनाक व्यवसायों में कार्यरत श्रमिकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

सामाजिक सुरक्षा कवरेज में विस्तार

डॉ. मांडविया ने बताया कि देश में सामाजिक सुरक्षा कवरेज एक दशक पहले लगभग 30 करोड़ लाभार्थियों तक सीमित था, जो अब बढ़कर लगभग 94 करोड़ हो गया है। प्रतिशत के संदर्भ में यह 19% से बढ़कर 64% हो गया है। इसी प्रकार, ESIC के दायरे में आने वाले लाभार्थियों की संख्या एक दशक पहले लगभग 7 करोड़ थी, जो अब बढ़कर लगभग 15 करोड़ हो गई है।

गौरतलब है कि अब 10 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में कार्यरत श्रमिकों और खतरनाक व्यवसायों में लगे कामगारों को भी ESIC के दायरे में लाया जा रहा है — जो पहले इस सुरक्षा कवच से बाहर थे।

चार श्रम संहिताओं के तहत प्रमुख सुधार

चार श्रम संहिताओं के तहत लागू किए गए सुधारों की जानकारी देते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि पुरुष और महिला श्रमिकों के लिए समान वेतन के प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं। मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया है, और महिला कर्मचारियों के लिए घर से काम करने के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर महिला श्रम भागीदारी बढ़ाने की माँग तेज़ हो रही है। भारत का यह कदम नीतिगत दृष्टि से उल्लेखनीय माना जा रहा है।

गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों का समावेश

डॉ. मांडविया ने यह भी रेखांकित किया कि जहाँ दुनिया भर के देश अभी भी गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा ढाँचे में शामिल करने के तरीके खोज रहे हैं, वहीं भारत सरकार ने नई श्रम संहिताओं के माध्यम से सक्रिय रूप से उनके समावेश को सुनिश्चित किया है। यह भारत को इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी स्थान दिलाता है।

आगे क्या

राष्ट्रव्यापी स्वास्थ्य जांच शिविरों का आयोजन चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा और ESIC की सुविधाओं के माध्यम से उपचार प्रदान किया जाएगा। सरकार के अनुसार, यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में 'श्रम शक्ति' और 'युवा शक्ति' को सशक्त बनाने की व्यापक नीतिगत दिशा का हिस्सा है। आने वाले महीनों में इस पहल के क्रियान्वयन की समीक्षा नीतिगत सफलता का वास्तविक पैमाना होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इनमें से कितनों को वास्तव में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ मिल रही हैं। ESIC अस्पतालों और डिस्पेंसरियों पर पहले से ही क्षमता का दबाव है — ऐसे में लाखों नए लाभार्थियों को जोड़ने से बुनियादी ढाँचे पर और बोझ पड़ सकता है। गिग श्रमिकों को शामिल करना नीतिगत दृष्टि से सराहनीय है, परंतु इसका क्रियान्वयन तंत्र अभी स्पष्ट नहीं है। बिना पर्याप्त ESIC क्षमता विस्तार और निगरानी ढाँचे के, यह पहल कागज़ों पर बड़ी और ज़मीन पर सीमित रह सकती है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के लिए वार्षिक स्वास्थ्य जांच पहल क्या है?
यह केंद्र सरकार द्वारा नई श्रम संहिताओं के तहत शुरू की गई एक अनिवार्य स्वास्थ्य जांच योजना है, जिसमें 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी पंजीकृत श्रमिकों की प्रतिवर्ष स्वास्थ्य जांच की जाएगी। जांच में पहचाने गए रोगों का उपचार और दवाएं ESIC सुविधाओं के माध्यम से निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।
इस पहल से कितने श्रमिकों को लाभ मिलेगा?
ESIC के वर्तमान लाभार्थियों की संख्या लगभग 15 करोड़ है, जो एक दशक पहले 7 करोड़ थी। अब 10 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों और खतरनाक व्यवसायों के श्रमिकों को भी ESIC के दायरे में लाया जा रहा है, जिससे लाभार्थियों की संख्या और बढ़ेगी।
गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को इस योजना में कैसे शामिल किया गया है?
केंद्रीय मंत्री डॉ. मांडविया के अनुसार, नई श्रम संहिताओं के माध्यम से गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा ढाँचे में सक्रिय रूप से शामिल किया गया है। यह उन देशों से अलग है जो अभी भी इस समावेश के तरीके खोज रहे हैं।
नई श्रम संहिताओं के तहत महिला श्रमिकों के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं?
नई श्रम संहिताओं के तहत महिला श्रमिकों के लिए मातृत्व अवकाश 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह किया गया है। इसके अलावा पुरुष और महिला श्रमिकों के लिए समान वेतन और महिलाओं के लिए घर से काम करने के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज की वर्तमान स्थिति क्या है?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा कवरेज एक दशक पहले लगभग 30 करोड़ लोगों (19%) तक सीमित था, जो अब बढ़कर लगभग 94 करोड़ लाभार्थियों (64%) तक पहुँच गया है। यह विस्तार मुख्यतः ESIC और अन्य श्रम कल्याण योजनाओं के माध्यम से हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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