श्रम संहिता के तहत 40+ आयु के श्रमिकों के लिए राष्ट्रव्यापी वार्षिक स्वास्थ्य जांच पहल शुरू
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने 7 मई 2026 को नई दिल्ली में 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी पंजीकृत श्रमिकों के लिए राष्ट्रव्यापी वार्षिक स्वास्थ्य जांच पहल का औपचारिक शुभारंभ किया। नई श्रम संहिताओं के अंतर्गत यह स्वास्थ्य जांच अनिवार्य की गई है, और इसे देश के श्रमबल की व्यावसायिक स्वास्थ्य देखभाल तथा सामाजिक सुरक्षा कवरेज को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम नीतिगत कदम बताया जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
डॉ. मांडविया ने इस अवसर को 'श्रम शक्ति' के सम्मान को समर्पित बताया। उन्होंने कहा कि नई श्रम संहिताओं के तहत 40 वर्ष या उससे अधिक आयु के श्रमिकों की वार्षिक स्वास्थ्य जांच कराना अनिवार्य है। जांच शिविरों के दौरान पहचाने गए रोगों का उपचार और दवाएं कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) की सुविधाओं के माध्यम से निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, स्वास्थ्य जांच के माध्यम से शीघ्र निदान से गंभीर बीमारियों को समय रहते रोकने में सहायता मिल सकती है — जो असंगठित और खतरनाक व्यवसायों में कार्यरत श्रमिकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
सामाजिक सुरक्षा कवरेज में विस्तार
डॉ. मांडविया ने बताया कि देश में सामाजिक सुरक्षा कवरेज एक दशक पहले लगभग 30 करोड़ लाभार्थियों तक सीमित था, जो अब बढ़कर लगभग 94 करोड़ हो गया है। प्रतिशत के संदर्भ में यह 19% से बढ़कर 64% हो गया है। इसी प्रकार, ESIC के दायरे में आने वाले लाभार्थियों की संख्या एक दशक पहले लगभग 7 करोड़ थी, जो अब बढ़कर लगभग 15 करोड़ हो गई है।
गौरतलब है कि अब 10 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में कार्यरत श्रमिकों और खतरनाक व्यवसायों में लगे कामगारों को भी ESIC के दायरे में लाया जा रहा है — जो पहले इस सुरक्षा कवच से बाहर थे।
चार श्रम संहिताओं के तहत प्रमुख सुधार
चार श्रम संहिताओं के तहत लागू किए गए सुधारों की जानकारी देते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि पुरुष और महिला श्रमिकों के लिए समान वेतन के प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं। मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया है, और महिला कर्मचारियों के लिए घर से काम करने के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर महिला श्रम भागीदारी बढ़ाने की माँग तेज़ हो रही है। भारत का यह कदम नीतिगत दृष्टि से उल्लेखनीय माना जा रहा है।
गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों का समावेश
डॉ. मांडविया ने यह भी रेखांकित किया कि जहाँ दुनिया भर के देश अभी भी गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा ढाँचे में शामिल करने के तरीके खोज रहे हैं, वहीं भारत सरकार ने नई श्रम संहिताओं के माध्यम से सक्रिय रूप से उनके समावेश को सुनिश्चित किया है। यह भारत को इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी स्थान दिलाता है।
आगे क्या
राष्ट्रव्यापी स्वास्थ्य जांच शिविरों का आयोजन चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा और ESIC की सुविधाओं के माध्यम से उपचार प्रदान किया जाएगा। सरकार के अनुसार, यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में 'श्रम शक्ति' और 'युवा शक्ति' को सशक्त बनाने की व्यापक नीतिगत दिशा का हिस्सा है। आने वाले महीनों में इस पहल के क्रियान्वयन की समीक्षा नीतिगत सफलता का वास्तविक पैमाना होगी।