एआई और रोबोटिक्स से बदलेगा भारत का वेयरहाउसिंग-कोल्ड चेन सेक्टर, आपदा में जीवन रक्षा भी संभव: डीपीआईआईटी
सारांश
मुख्य बातें
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के संयुक्त सचिव पंकज कुमार ने 29 सितंबर 2026 को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स और ऑटोमेशन भारत के वेयरहाउसिंग और कोल्ड-चेन क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन ला सकते हैं। उनके अनुसार ये तकनीकें भंडारण और वितरण की दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ आपदा, युद्ध, बाढ़ जैसी आपात परिस्थितियों में जीवन बचाने का भी माध्यम बन सकती हैं।
मुख्य वक्तव्य: एआई से स्मार्ट सप्लाई चेन
पंकज कुमार ने कहा, 'यदि भौगोलिक, भू-राजनीतिक और आपदा संबंधी सूचनाओं को वेयरहाउसिंग नेटवर्क से जोड़ा जाए, तो एआई यह अनुमान लगाने में मदद कर सकता है कि किस क्षेत्र में किस समय किस प्रकार की वस्तुओं की आवश्यकता होगी।' उनके मुताबिक यह प्रणाली यह भी तय कर सकेगी कि किसी विशेष क्षेत्र के लिए किस सामान का भंडारण उचित है और किसकी ज़रूरत नहीं — जिससे आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत की लॉजिस्टिक्स लागत GDP के सापेक्ष अभी भी विकसित देशों से अधिक है और सप्लाई चेन की कमज़ोरियाँ कोविड-19 महामारी के दौरान सामने आ चुकी हैं।
कोविड-19 से सबक: कोल्ड चेन की अहमियत
पंकज कुमार ने कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए रेखांकित किया कि उस दौरान ऑक्सीजन और आवश्यक संसाधनों की समयबद्ध उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी थी। उन्होंने कहा कि कोविड काल में वैक्सीन आपूर्ति ने यह सिद्ध किया कि मज़बूत कोल्ड-चेन नेटवर्क संकट के समय कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।
कोल्ड-चेन क्षेत्र में एआई की भूमिका विशेष रूप से उपयोगी मानी जा रही है क्योंकि इसमें दवाइयों, वैक्सीन, औषधीय पौधों और अन्य उच्च-मूल्य वाली वस्तुओं का भंडारण होता है, जिनकी गुणवत्ता तापमान-नियंत्रण पर निर्भर करती है। एआई और ऑटोमेशन के ज़रिए ऐसी वस्तुओं की निगरानी, भंडारण और वितरण को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
रोबोटिक्स से बदलेगा वेयरहाउस प्रबंधन
संयुक्त सचिव ने बताया कि रोबोटिक्स और ऑटोमेशन वेयरहाउस प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार ला सकते हैं। एआई यह पहचान सकता है कि किस रैक में कौन-सा सामान रखा है, जबकि रोबोट आवश्यक वस्तुओं को स्वतः निकालकर वितरण प्रक्रिया को गति दे सकते हैं। यह न केवल मानवीय त्रुटि को कम करेगा, बल्कि आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया भी सुनिश्चित करेगा।
गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर अमेज़न, अलीबाबा जैसी कंपनियाँ पहले से ही एआई-आधारित वेयरहाउसिंग का उपयोग कर रही हैं और भारत में भी फ्लिपकार्ट तथा मीशो जैसे खिलाड़ी इस दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं।
सावधानी जरूरी: मानव निगरानी अनिवार्य
पंकज कुमार ने हालाँकि यह भी स्पष्ट किया कि पूरी व्यवस्था को केवल एआई के भरोसे नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा, निगरानी और मानव हस्तक्षेप हमेशा प्रणाली का अभिन्न हिस्सा बने रहने चाहिए। उनके अनुसार मानवीय संवेदनशीलता, निर्णय क्षमता और सहानुभूति जैसी विशेषताएँ किसी भी तकनीक से ऊपर हैं और इन्हें पूरी तरह एआई के हवाले नहीं किया जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि एआई का विस्तार उन्हीं क्षेत्रों में किया जाना चाहिए जहाँ यह वास्तविक लाभ दे सके, और इसके साथ मज़बूत नियामकीय ढाँचा एवं पर्याप्त सुरक्षा उपाय भी अनिवार्य हैं।
आगे की राह
डीपीआईआईटी के इस रुख से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार भारत की लॉजिस्टिक्स और सप्लाई-चेन अवसंरचना को तकनीकी रूप से उन्नत करने के प्रति गंभीर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एआई-संचालित वेयरहाउसिंग नीति के साथ उचित निवेश और नियामकीय स्पष्टता आए, तो भारत अगले पाँच वर्षों में लॉजिस्टिक्स लागत में उल्लेखनीय कमी ला सकता है — और संकट-प्रबंधन में भी नई मिसाल कायम कर सकता है।