18 अक्टूबर 2026
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एआई से स्वास्थ्य सेवाएं होंगी सुलभ व प्रभावी, क्लिनिकल निर्णय में मदद: MeitY सचिव एस. कृष्णन

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एआई से स्वास्थ्य सेवाएं होंगी सुलभ व प्रभावी, क्लिनिकल निर्णय में मदद: MeitY सचिव एस. कृष्णन

सारांश

वाराणसी में STPI-IIT BHU के टेक कॉन्क्लेव में MeitY सचिव एस. कृष्णन ने कहा — एआई मेडिकल डायग्नोस्टिक्स से लेकर रिमोट ICU तक स्वास्थ्य सेवाओं की कायापलट कर सकती है। इंडियाएआई मिशन की सरकारी सहायता और STPI के 27 उद्यमिता केंद्रों के नेटवर्क के साथ, भारत के हेल्थटेक स्टार्टअप्स के लिए यह निर्णायक क्षण है।

मुख्य बातें

कृष्णन ने 18 अक्टूबर 2026 को वाराणसी में एआई को स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 'परिवर्तनकारी' बताया।
एआई के उपयोग के प्रमुख क्षेत्र: मेडिकल डायग्नोस्टिक्स, रिमोट ICU मॉनिटरिंग और एआई-सहायता प्राप्त सर्जिकल प्लानिंग ।
इंडियाएआई मिशन के तहत स्टार्टअप्स को निवेशकों और वेंचर कैपिटल नेटवर्क से जोड़ने पर बल दिया गया।
STPI महानिदेशक अरविंद कुमार ने 27 सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के नेटवर्क के ज़रिये स्टार्टअप इकोसिस्टम विस्तार की बात कही।
कॉन्क्लेव STPI और IIT-BHU CIIE द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित; नीति निर्माता, विशेषज्ञ और स्टार्टअप संस्थापक शामिल हुए।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने 18 अक्टूबर 2026 को वाराणसी में आयोजित एक टेक कॉन्क्लेव में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) स्वास्थ्य क्षेत्र में दूरगामी परिवर्तन ला सकती है। उनके अनुसार, बीमारी की जांच, मेडिकल डायग्नोस्टिक्स, रिमोट आईसीयू मॉनिटरिंग और एआई-सहायता प्राप्त सर्जिकल प्लानिंग जैसे क्षेत्रों में इस तकनीक के उपयोग से सेवाओं की पहुंच, वहनीयता और गुणवत्ता तीनों में सुधार संभव है।

कॉन्क्लेव का आयोजन और भागीदारी

सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) और IIT-BHU के सेंटर फॉर इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (CIIE) ने संयुक्त रूप से यह 'एआई फॉर हेल्थ एंड असिस्टिव टेक्नोलॉजीज' विषयक टेक कॉन्क्लेव आयोजित किया। इसमें नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्टार्टअप संस्थापकों ने एक मंच पर आकर स्वास्थ्य सेवाओं में एआई की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।

कृष्णन का मुख्य संबोधन

अपने मुख्य संबोधन में कृष्णन ने विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रमों में एआई शिक्षा को समाहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी, चिकित्सा विज्ञान और अनुसंधान के बीच बढ़ते तालमेल का उपयोग व्यावहारिक समाधान विकसित करने में होना चाहिए। उन्होंने IIT-BHU, STPI, उद्योग जगत और स्टार्टअप्स के बीच मज़बूत सहयोग की ज़रूरत रेखांकित की, ताकि बड़े पैमाने पर लागू किए जा सकने वाले स्वास्थ्य और सहायक प्रौद्योगिकी समाधान सामने आ सकें।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'एआई स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने, क्लिनिकल निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने और सेवा वितरण में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, विशेष रूप से उन समुदायों के लिए जहां स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित है।'

इंडियाएआई मिशन और सरकारी पहलें

MeitY सचिव ने नवाचार को गति देने के लिए इंडियाएआई मिशन और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत उपलब्ध सहायता का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि STPI स्टार्टअप्स को निवेशकों, वेंचर कैपिटल नेटवर्क और बाज़ार से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा है, जिससे एक मज़बूत और टिकाऊ नवाचार इकोसिस्टम विकसित हो सके। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य-तकनीक क्षेत्र में एआई निवेश तेज़ी से बढ़ रहा है और भारत इस दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहता।

STPI महानिदेशक की राय

STPI के महानिदेशक अरविंद कुमार ने कहा कि पिछले तीन दशकों में भारत का प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम उल्लेखनीय रूप से परिपक्व हुआ है। उनके अनुसार, आईटी सेवा क्षेत्र में मिली सफलता को अब स्वदेशी एआई नवाचार और उद्यमिता के ज़रिये दोहराने का अवसर है। उन्होंने कहा कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम युवाओं को रोज़गार तलाशने वालों से रोज़गार सृजित करने वालों में बदलने में सफल रहा है।

कुमार ने ट्रांसलेशनल रिसर्च, बौद्धिक संपदा सृजन और बाज़ार तक पहुंच के महत्व पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने STPI के 27 सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के राष्ट्रव्यापी नेटवर्क का हवाला देते हुए कहा कि स्थापित तकनीकी केंद्रों से इतर नए क्षेत्रों में भी स्टार्टअप संस्कृति को पोषित करने के लिए शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार के बीच और गहरे सहयोग की ज़रूरत है।

आगे की राह

गौरतलब है कि भारत में ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी एक पुरानी चुनौती रही है। एआई-आधारित डायग्नोस्टिक्स और रिमोट मॉनिटरिंग इस अंतर को पाटने की दिशा में ठोस संभावनाएं दिखाते हैं। इस कॉन्क्लेव जैसे मंच न केवल नीतिगत दिशा तय करते हैं बल्कि स्टार्टअप्स को वह नेटवर्क भी उपलब्ध कराते हैं जो नवाचार को बाज़ार तक पहुंचाने के लिए अनिवार्य है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी — भारत में ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे की कमज़ोरियां इतनी गहरी हैं कि केवल एआई-टूल्स की उपलब्धता पर्याप्त नहीं होगी। इंडियाएआई मिशन की घोषणाएं तब तक अधूरी रहेंगी जब तक स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्य सरकारें डेटा साझाकरण और डिजिटल बुनियादी ढांचे पर समन्वित कदम नहीं उठातीं। STPI के 27 उद्यमिता केंद्र एक सकारात्मक संकेत हैं, पर हेल्थटेक स्टार्टअप्स को नियामकीय स्पष्टता और सार्वजनिक अस्पतालों तक बाज़ार पहुंच की भी उतनी ही ज़रूरत है जितनी फंडिंग की।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

MeitY सचिव एस. कृष्णन ने वाराणसी कॉन्क्लेव में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि एआई मेडिकल डायग्नोस्टिक्स, रिमोट ICU मॉनिटरिंग और एआई-सहायता प्राप्त सर्जिकल प्लानिंग के ज़रिये स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बना सकती है। उन्होंने विशेष रूप से सीमित स्वास्थ्य पहुंच वाले समुदायों के लिए इस तकनीक की अहमियत रेखांकित की।
यह टेक कॉन्क्लेव किसने आयोजित किया और इसका विषय क्या था?
यह कॉन्क्लेव STPI और IIT-BHU के CIIE ने संयुक्त रूप से वाराणसी में आयोजित किया। इसका विषय 'एआई फॉर हेल्थ एंड असिस्टिव टेक्नोलॉजीज' था, जिसमें नीति निर्माता, शिक्षाविद्, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और स्टार्टअप संस्थापक शामिल हुए।
इंडियाएआई मिशन स्वास्थ्य स्टार्टअप्स की कैसे मदद करेगा?
इंडियाएआई मिशन के तहत सरकार स्टार्टअप्स को निवेशकों, वेंचर कैपिटल नेटवर्क और बाज़ार से जोड़ने की सुविधा दे रही है। MeitY सचिव के अनुसार, इसका लक्ष्य एक मज़बूत और टिकाऊ नवाचार इकोसिस्टम तैयार करना है।
STPI के सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप नेटवर्क में कितने केंद्र हैं?
STPI के पूरे भारत में 27 सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप हैं। STPI महानिदेशक अरविंद कुमार ने कहा कि इन केंद्रों के ज़रिये स्थापित तकनीकी हब से परे नए क्षेत्रों में भी स्टार्टअप संस्कृति विकसित की जाएगी।
भारत में एआई और स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में यह कॉन्क्लेव क्यों अहम है?
भारत में ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी एक दीर्घकालिक समस्या रही है। एआई-आधारित डायग्नोस्टिक्स और रिमोट मॉनिटरिंग इस अंतर को पाटने की क्षमता रखते हैं, और इस कॉन्क्लेव जैसे मंच नीति, उद्योग और अनुसंधान को एक दिशा देने का काम करते हैं।
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