एआई से स्वास्थ्य सेवाएं होंगी सुलभ व प्रभावी, क्लिनिकल निर्णय में मदद: MeitY सचिव एस. कृष्णन
सारांश
मुख्य बातें
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने 18 अक्टूबर 2026 को वाराणसी में आयोजित एक टेक कॉन्क्लेव में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) स्वास्थ्य क्षेत्र में दूरगामी परिवर्तन ला सकती है। उनके अनुसार, बीमारी की जांच, मेडिकल डायग्नोस्टिक्स, रिमोट आईसीयू मॉनिटरिंग और एआई-सहायता प्राप्त सर्जिकल प्लानिंग जैसे क्षेत्रों में इस तकनीक के उपयोग से सेवाओं की पहुंच, वहनीयता और गुणवत्ता तीनों में सुधार संभव है।
कॉन्क्लेव का आयोजन और भागीदारी
सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) और IIT-BHU के सेंटर फॉर इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (CIIE) ने संयुक्त रूप से यह 'एआई फॉर हेल्थ एंड असिस्टिव टेक्नोलॉजीज' विषयक टेक कॉन्क्लेव आयोजित किया। इसमें नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्टार्टअप संस्थापकों ने एक मंच पर आकर स्वास्थ्य सेवाओं में एआई की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
कृष्णन का मुख्य संबोधन
अपने मुख्य संबोधन में कृष्णन ने विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रमों में एआई शिक्षा को समाहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी, चिकित्सा विज्ञान और अनुसंधान के बीच बढ़ते तालमेल का उपयोग व्यावहारिक समाधान विकसित करने में होना चाहिए। उन्होंने IIT-BHU, STPI, उद्योग जगत और स्टार्टअप्स के बीच मज़बूत सहयोग की ज़रूरत रेखांकित की, ताकि बड़े पैमाने पर लागू किए जा सकने वाले स्वास्थ्य और सहायक प्रौद्योगिकी समाधान सामने आ सकें।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'एआई स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने, क्लिनिकल निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने और सेवा वितरण में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, विशेष रूप से उन समुदायों के लिए जहां स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित है।'
इंडियाएआई मिशन और सरकारी पहलें
MeitY सचिव ने नवाचार को गति देने के लिए इंडियाएआई मिशन और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत उपलब्ध सहायता का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि STPI स्टार्टअप्स को निवेशकों, वेंचर कैपिटल नेटवर्क और बाज़ार से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा है, जिससे एक मज़बूत और टिकाऊ नवाचार इकोसिस्टम विकसित हो सके। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य-तकनीक क्षेत्र में एआई निवेश तेज़ी से बढ़ रहा है और भारत इस दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहता।
STPI महानिदेशक की राय
STPI के महानिदेशक अरविंद कुमार ने कहा कि पिछले तीन दशकों में भारत का प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम उल्लेखनीय रूप से परिपक्व हुआ है। उनके अनुसार, आईटी सेवा क्षेत्र में मिली सफलता को अब स्वदेशी एआई नवाचार और उद्यमिता के ज़रिये दोहराने का अवसर है। उन्होंने कहा कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम युवाओं को रोज़गार तलाशने वालों से रोज़गार सृजित करने वालों में बदलने में सफल रहा है।
कुमार ने ट्रांसलेशनल रिसर्च, बौद्धिक संपदा सृजन और बाज़ार तक पहुंच के महत्व पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने STPI के 27 सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के राष्ट्रव्यापी नेटवर्क का हवाला देते हुए कहा कि स्थापित तकनीकी केंद्रों से इतर नए क्षेत्रों में भी स्टार्टअप संस्कृति को पोषित करने के लिए शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार के बीच और गहरे सहयोग की ज़रूरत है।
आगे की राह
गौरतलब है कि भारत में ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी एक पुरानी चुनौती रही है। एआई-आधारित डायग्नोस्टिक्स और रिमोट मॉनिटरिंग इस अंतर को पाटने की दिशा में ठोस संभावनाएं दिखाते हैं। इस कॉन्क्लेव जैसे मंच न केवल नीतिगत दिशा तय करते हैं बल्कि स्टार्टअप्स को वह नेटवर्क भी उपलब्ध कराते हैं जो नवाचार को बाज़ार तक पहुंचाने के लिए अनिवार्य है।