तमन्ना खातून हत्याकांड: गुरुग्राम से 3 और आरोपी गिरफ्तार, कुल गिरफ्तारी 16
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के कालिगंज में 23 जून 2025 को हुई राजनीतिक हिंसा में नाबालिग तमन्ना खातून की हत्या के मामले में पुलिस ने हरियाणा के गुरुग्राम से तीन और फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस गिरफ्तारी के साथ इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक कुल 16 आरोपी हिरासत में लिए जा चुके हैं।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी
पश्चिम बंगाल पुलिस के अनुसार, बुधवार रात से गुरुवार सुबह के बीच चलाए गए अभियान में इस्माइल शेख, हाफिजुल शेख और मिनारुल शेख को गुरुग्राम से पकड़ा गया। पुलिस का कहना है कि जाँच शुरू होते ही ये तीनों आरोपी बंगाल छोड़कर वहाँ छिप गए थे। तीनों को ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता लाया जा रहा है, जहाँ से उन्हें नदिया जिले की अदालत में पेश किया जाएगा और अभियोजन पक्ष पुलिस हिरासत की माँग करेगा।
पिछले 24 घंटों में पाँच गिरफ्तारियाँ
इससे पहले मंगलवार रात पुलिस ने दो अन्य फरार आरोपियों — साबित शेख और जियारुल शेख — को भी गिरफ्तार किया था। इस प्रकार महज 24 घंटों के भीतर कुल 5 आरोपियों को हिरासत में लिया गया है, जो इस मामले में पुलिस की अब तक की सबसे तेज़ कार्रवाई मानी जा रही है।
मामले की पृष्ठभूमि
23 जून 2025 को कालिगंज विधानसभा उपचुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद भड़की हिंसा में तमन्ना खातून की मौत हो गई थी। उस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) उम्मीदवार अलीफा अहमद ने भारी मतों से जीत दर्ज की थी। आरोप है कि जीत के जुलूस के दौरान कुछ TMC समर्थकों ने तमन्ना के घर पर देसी बम फेंके, जिससे उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। तमन्ना का परिवार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] का समर्थक माना जाता है।
परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि
तमन्ना की माँ सबीना इयासमीन शेख ने हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कालिगंज सीट से सीपीआई(एम) उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें TMC की अलीफा अहमद ने पराजित कर दिया, जो लगातार दूसरी बार विधायक चुनी गईं। यह मामला राज्य में राजनीतिक हिंसा और चुनाव-पश्चात प्रतिशोध की बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।
मुख्यमंत्री की मुलाकात और पुलिस की तेज़ कार्रवाई
गौरतलब है कि मंगलवार शाम पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने तमन्ना की माँ से मुलाकात कर उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया था। इसके तुरंत बाद पुलिस की कार्रवाई में उल्लेखनीय तेज़ी देखी गई और 24 घंटे के भीतर पाँच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। यह संयोग राजनीतिक दबाव और पुलिस कार्रवाई के बीच संबंध को लेकर सवाल उठाता है।