2019 बंगाल चुनाव बाद हिंसा: सीबीआई ने शेख शाहजहां के सहयोगी कादर मुल्ला समेत 10 आरोपी गिरफ्तार किए
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बुधवार, 27 मई 2026 को पश्चिम बंगाल में 2019 लोकसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े मामलों में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए लोगों में अब्दुल कादर मुल्ला भी शामिल है, जिसे निलंबित तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता शेख शाहजहां का सबसे करीबी और भरोसेमंद सहयोगी बताया जाता है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह गिरफ्तारी 8 जून 2019 को उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली क्षेत्र के नजत में हुई तीन भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या से जुड़ी है। मारे गए कार्यकर्ताओं की पहचान देबदास मंडल, प्रदीप मंडल और सुकांत मंडल के रूप में हुई थी।
सीबीआई सूत्रों के अनुसार, उस दिन तृणमूल कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच पार्टी झंडा लगाने को लेकर झड़प हुई थी। आरोप है कि अब्दुल कादर मुल्ला और उसके साथियों ने शेख शाहजहां के इशारे पर इन तीनों की हत्या को अंजाम दिया था।
सीआईडी जांच और हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
इस मामले की शुरुआती जांच पश्चिम बंगाल पुलिस के अपराध जांच विभाग (CID) ने की थी। हालांकि, पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि CID ने अपनी चार्जशीट में 28 आरोपियों के नाम जानबूझकर नहीं जोड़े — जिनमें शेख शाहजहां का नाम भी शामिल था।
पीड़ित परिवार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर सीबीआई जांच की मांग की। अदालत ने परिवार की दलीलों को सही मानते हुए CBI जांच के आदेश दिए, जिसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने मामले की जांच अपने हाथ में ली।
शेख शाहजहां की पृष्ठभूमि
शेख शाहजहां संदेशखाली से जुड़ा कुख्यात नेता है और फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। उसे 5 जनवरी 2024 को अपने आवास के बाहर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों पर हमले का मास्टरमाइंड माना गया था। यह ऐसे समय में आया है जब संदेशखाली पहले से ही कई विवादों के केंद्र में रहा है और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना है।
सीबीआई की कार्रवाई
सीबीआई के अनुसार, अब्दुल कादर मुल्ला सहित सभी 10 आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे। केंद्रीय एजेंसी ने बुधवार को एक साथ इन सभी को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की। गौरतलब है कि यह 2019 चुनाव बाद हिंसा की उन घटनाओं में से एक है जिनकी जांच सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के निर्देश पर CBI को सौंपी गई थी।
आगे क्या होगा
गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत पेश किया जाएगा। CBI की जांच अभी भी जारी है और अन्य फरार आरोपियों की तलाश भी की जा रही है। इस मामले में आगे की सुनवाई से पश्चिम बंगाल की चुनावी हिंसा के मुद्दे पर राजनीतिक और न्यायिक दोनों स्तरों पर नई हलचल की संभावना है।