कोलकाता सीबीआई अदालत ने भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार हत्याकांड में 19 आरोपियों पर आरोप तय किए
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता की एक विशेष सीबीआई अदालत ने बुधवार, 1 जुलाई 2026 को 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा में भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार की हत्या के मामले में 19 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी की। आरोपियों की सूची में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व विधायक परेश पॉल और कोलकाता नगर निगम (KMC) के पूर्व पार्षद स्वपन समाद्दार के नाम भी शामिल हैं।
मुख्य घटनाक्रम
अभिजीत सरकार उत्तरी कोलकाता के कांकुरगाछी इलाके के भाजपा कार्यकर्ता थे। 2021 के विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी थी। परिवार का आरोप है कि उन्हें बुरी तरह प्रताड़ित कर मारा गया।
परिवार की शिकायत पर नारकेलडांगा पुलिस थाने ने प्रारंभिक जाँच शुरू की और 15 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने मामले की जाँच अपने हाथ में ले ली।
सीबीआई की जाँच और आरोपी
सीबीआई ने पूरक चार्जशीट दाखिल करते हुए कुल 20 लोगों को आरोपी बनाया। जाँच एजेंसी ने पूर्व विधायक परेश पॉल और पूर्व पार्षद स्वपन समाद्दार से कई दौर में पूछताछ की थी। उल्लेखनीय है कि इस मामले में कांकुरगाछी पुलिस थाने के तत्कालीन प्रभारी और एक महिला सब-इंस्पेक्टर को भी गिरफ्तार किया गया था।
जमानत सुनवाई के दौरान अदालत ने यह तीखी टिप्पणी की थी कि यदि रक्षक ही हत्यारे की भूमिका निभाने लगें, तो समाज का संचालन कैसे होगा — यह टिप्पणी पुलिस अधिकारियों की कथित संलिप्तता के संदर्भ में की गई थी।
परिवार की नाराजगी
मारे गए भाजपा कार्यकर्ता के परिजनों ने सीबीआई जाँच की गति पर खुलकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि न्याय मिलने में अत्यधिक विलंब हो रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब 2021 के चुनाव बाद हिंसा के अनेक मामले अभी भी विभिन्न अदालतों में लंबित हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे की राह
हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की कि 2021 के चुनाव बाद हिंसा से जुड़े किसी भी मामले में संलिप्त एक भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। आरोप तय होने के बाद अब मामले में विचारण (ट्रायल) की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जिसमें गवाहों के बयान और साक्ष्य परीक्षण शामिल होंगे। गौरतलब है कि यह मामला पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा की व्यापक जाँच का हिस्सा है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय और कलकत्ता उच्च न्यायालय दोनों ने गंभीरता से लिया है।