ईडी ने असम के हैलाकांडी में शिफा हॉस्पिटल के मालिक की 55.33 लाख रुपए की संपत्ति कुर्क की
सारांश
Key Takeaways
- ईडी ने 55.33 लाख की संपत्तियों को कुर्क किया।
- शिफा हॉस्पिटल ने फर्जी दावे पेश किए थे।
- धोखाधड़ी की योजना में आयुष्मान भारत योजना का दुरुपयोग हुआ।
- जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
- ईडी ने कुल छह अचल संपत्तियों को कुर्क किया।
गुवाहाटी, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), २००२ के तहत एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। एजेंसी ने असम के हैलाकांडी जिले में स्थित शिफा हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के मालिक मोबजिल हुसैन बरभुइया की लगभग ५५.३३ लाख रुपए की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है।
यह कार्रवाई आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत बड़े पैमाने पर हुई धोखाधड़ी के मामले में की गई है। ईडी ने अपनी जांच असम पुलिस के हैलाकांडी थाने में १९ नवंबर २०२२ को दर्ज एफआईआर संख्या ३१६/२०२२ और २८ फरवरी २०२३ को दायर चार्जशीट संख्या ३७/२०२३ के आधार पर शुरू की थी। ये मामले भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज अपराधों से जुड़े हैं, जिन्हें पीएमएलए के अंतर्गत अनुसूचित अपराध माना गया है।
जांच में ईडी को कई चौंकाने वाले तथ्य मिले। हैलाकांडी में स्थित शिफा हॉस्पिटल ने २२ अप्रैल २०१९ से ५ नवंबर २०२२ के बीच ७७८ फर्जी प्रतिपूर्ति दावे प्रस्तुत किए। इन दावों की कुल राशि ६४,१०,७८० रुपए थी। सबसे बड़ा खुलासा यह रहा कि अस्पताल अपने घोषित पते पर अस्तित्व में ही नहीं था।
आरोपी मोबजिल हुसैन बरभुइया ने एक सुनियोजित धोखाधड़ी की साजिश रची। योजना के लाभार्थियों को बहला-फुसलाकर एक अस्थायी स्थान पर बुलाया जाता था। वहां उन्हें अस्पताल के बिस्तरों पर लिटाकर फोटो खींची जाती थी और बदले में मात्र ३०० रुपए दिए जाते थे। इन मंचित तस्वीरों को ‘लेनदेन प्रबंधन प्रणाली’ (टीएमएस) पोर्टल पर अपलोड कर फर्जी चिकित्सा प्रक्रियाओं के दावे बनाए जाते थे, जबकि वास्तव में कोई इलाज नहीं किया गया था।
इन फर्जी दावों के एवज में असम सरकार की राज्य स्वास्थ्य एजेंसी अटल अमृत अभियान सोसाइटी ने कुल ५७.९६ लाख रुपए अस्पताल के बैंक ऑफ इंडिया खाते में जमा किए। ईडी की जांच से साबित हुआ कि यह राशि पीएमएलए की धारा २(१)(यू) के तहत 'अपराध से प्राप्त आय' थी, जिसे आरोपी ने नकद निकासी और यूपीआई ट्रांसफर के जरिए निकाल लिया।
जांच में आगे पता चला कि धोखाधड़ी से प्राप्त फंड के दौरान और बाद में आरोपी ने बिना किसी वैध आय के पाँच भूखंड खरीदे और दो बहुमंजिला इमारतों का निर्माण किया। ईडी ने इनमें से छह अचल संपत्तियों, पांच भूखंड और एक बहुमंजिला इमारत का एक फ्लोर, को अस्थायी कुर्की आदेश के तहत कुर्क कर लिया है। इनकी कुल कीमत ५५.३३ लाख रुपए है, जो अपराध से प्राप्त आय के बराबर है।