ईडी ने मस्ताना फूड्स से जुड़ी 88.58 करोड़ की 7 संपत्तियों को कुर्क किया, 152 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का पर्दाफाश

Click to start listening
ईडी ने मस्ताना फूड्स से जुड़ी 88.58 करोड़ की 7 संपत्तियों को कुर्क किया, 152 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का पर्दाफाश

सारांश

प्रवर्तन निदेशालय ने मस्ताना फूड्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में 88.58 करोड़ की संपत्तियों को कुर्क किया है। जानिए इस मामले की पूरी कहानी और धोखाधड़ी की रणनीतियों के बारे में।

Key Takeaways

  • ईडी की कुर्की: 88.58 करोड़ की 7 संपत्तियां
  • धन शोधन निवारण अधिनियम: कार्रवाई के तहत की गई
  • बैंक धोखाधड़ी: 152.85 करोड़ का मामला
  • फर्जी लेनदेन: कंपनी ने शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया
  • सजा का ऐलान: 2.5 वर्ष की सजा और 10,000 का जुर्माना

चंडीगढ़, 25 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मेसर्स मस्ताना फूड्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 88.58 करोड़ रुपए मूल्य की 7 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है।

यह कार्रवाई भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की शिकायत पर सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई जांच का परिणाम है, जिसमें कंपनी और उसके निदेशकों पर लगभग 152.85 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है।

जांच में यह स्पष्ट हुआ कि मस्ताना फूड्स प्राइवेट लिमिटेड ने वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2016-17 के बीच अपने कारोबार को कृत्रिम रूप से बढ़ावा देने के लिए फर्जी लेनदेन और शेल कंपनियों का उपयोग किया। कंपनी ने संबंधित कंपनियों के साथ धोखाधड़ी वाले सर्कुलर ट्रांजैक्शन किए, जिससे बिना किसी वास्तविक व्यापार के बड़े पैमाने पर धन का मूवमेंट और डायवर्जन हुआ।

ईडी की जांच में यह भी पाया गया कि कंपनी ने नकली खरीद-बिक्री इनवॉइस और फर्जी ट्रांसपोर्ट दस्तावेजों का उपयोग करके शेल फर्मों के नेटवर्क के माध्यम से धन का हेरफेर किया। धन जल्दी से कंपनी को वापस लौटा दिया जाता था ताकि वास्तविक व्यापार गतिविधियों का दिखावा बना रहे। कई कर्जदार फर्में या तो अस्तित्व में नहीं थीं या सुरेश जैन जैसे बिचौलियों द्वारा नियंत्रित थीं, जिनका कोई वास्तविक व्यवसाय नहीं था।

इसके बाद, कंपनी ने संदिग्ध कर्जों पर भारी प्रोविजन बनाए, जिससे निकाले गए धन को व्यापार घाटे के रूप में दिखाया गया। पूरी योजना में ट्रांजैक्शन की लेयरिंग, पेपर ट्रेल्स बनाना, धन की असली पहचान छिपाना और नकली वित्तीय विवरण पेश करना शामिल था। बैंकिंग चैनलों का दुरुपयोग करके धोखाधड़ी की गई। कोर्ट ने मेसर्स मस्ताना फूड्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों कृष्ण मोहन (कृष्ण मोहन मंदिरत्ता) और अनिल खुराना को एसबीआई के साथ धोखाधड़ी की साजिश रचने का दोषी ठहराया है।

सीबीआई स्पेशल कोर्ट, पंचकूला ने उन्हें 2.5 वर्ष की सजा और 10,000 रुपए का जुर्माना सुनाया था। यह मामला मूल रूप से चावल मिलिंग और पैराबॉइलिंग व्यवसाय से संबंधित था, जहां एसबीआई की चंडीगढ़ शाखा से लोन लिया गया और धन का गलत उपयोग किया गया।

Point of View

बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस प्रकार धोखाधड़ी के माध्यम से महत्वपूर्ण धन का दुरुपयोग किया गया। ईडी की कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि ऐसे मामलों पर सख्त निगरानी की आवश्यकता है।
NationPress
27/02/2026

Frequently Asked Questions

ईडी ने मस्ताना फूड्स के खिलाफ क्यों कार्रवाई की?
ईडी ने बैंक धोखाधड़ी के आरोपों के अंतर्गत कार्रवाई की, जिसमें कंपनी ने फर्जी लेनदेन और शेल कंपनियों का उपयोग किया।
कितनी संपत्तियां कुर्क की गई हैं?
ईडी ने 88.58 करोड़ रुपए मूल्य की 7 संपत्तियां कुर्क की हैं।
क्या आरोप हैं मस्ताना फूड्स पर?
कंपनी पर लगभग 152.85 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी का आरोप है।
कब की यह घटना है?
यह घटना वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2016-17 के बीच हुई है।
सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने क्या सजा सुनाई है?
सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने दोषियों को 2.5 वर्ष की सजा और 10,000 रुपए का जुर्माना सुनाया है।
Nation Press