22 जुलाई 2026
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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने चैतन्य बघेल की जमानत रद्द करने से किया इनकार, ₹2,161 करोड़ का है मामला

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने चैतन्य बघेल की जमानत रद्द करने से किया इनकार, ₹2,161 करोड़ का है मामला

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने ₹2,161 करोड़ के कथित छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल की जमानत बरकरार रखी। साथ ही, उच्च न्यायालय की जाँच एजेंसी-विरोधी टिप्पणियाँ खारिज कर कोर्ट ने जमानत रद्द करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी गंभीर सवाल उठाए।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 22 जुलाई 2026 को चैतन्य बघेल की जमानत रद्द करने की याचिका खारिज की।
मामला कथित तौर पर ₹2,161 करोड़ के छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़ा है, जो 2019 से 2022 के बीच का बताया जाता है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने उच्च न्यायालय की जाँच एजेंसी-विरोधी प्रतिकूल टिप्पणियाँ अनावश्यक बताकर निरस्त कीं।
न्यायालय ने जमानत आदेशों को चुनौती देने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई और कहा कि तकनीकी त्रुटि अकेले जमानत रद्द करने का आधार नहीं।
ईडी और सीबीआई दोनों मामले की जाँच जारी रखेंगी; मामले से जुड़े कानूनी प्रश्न न्यायालय में खुले रहेंगे।

सर्वोच्च न्यायालय ने 22 जुलाई 2026 को कथित छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग एवं भ्रष्टाचार मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल की जमानत रद्द करने की याचिका खारिज कर दी। यह मामला कथित तौर पर ₹2,161 करोड़ के शराब घोटाले से संबंधित है, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) दोनों जाँच कर रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने बुधवार को इस मामले की सुनवाई की। पीठ ने जमानत रद्द करने की याचिका अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि मामले से जुड़े कानूनी प्रश्न न्यायालय के समक्ष अभी भी खुले रहेंगे।

सुनवाई के दौरान पीठ ने एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न उठाया कि क्या केवल इस आधार पर जमानत रद्द की जा सकती है कि आदेश में पर्याप्त कारण नहीं बताए गए। न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि आपराधिक मुकदमों के त्वरित निपटान पर ध्यान देने के बजाय जमानत आदेशों को चुनौती देने की बढ़ती प्रवृत्ति चिंताजनक है।

पक्षों की दलीलें

चैतन्य बघेल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने जमानत रद्द करने की बढ़ती कार्यवाहियों का उल्लेख करते हुए न्यायालय की चिंता से सहमति जताई। वहीं, सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने भी स्वीकार किया कि कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण जमानत आदेश स्वतः किसी आरोपी की स्वतंत्रता छीनने का आधार नहीं बन सकते।

वरिष्ठ अधिवक्ता जेठमलानी ने तर्क दिया कि उच्च न्यायालय ने जाँच एजेंसी के विरुद्ध अनावश्यक रूप से कठोर टिप्पणियाँ की थीं। सर्वोच्च न्यायालय ने इस पक्ष को स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालय की उन प्रतिकूल टिप्पणियों को खारिज कर दिया, जो जाँच एजेंसी के विरुद्ध थीं।

उच्च न्यायालय की पूर्व टिप्पणियाँ

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने जनवरी में चैतन्य बघेल को जमानत देते समय राज्य की आर्थिक अपराध शाखा एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो पर चुनिंदा गिरफ्तारियाँ करने और 'पिक एंड चूज़' का तरीका अपनाने का आरोप लगाया था। सर्वोच्च न्यायालय ने इन टिप्पणियों को पूर्णतः अनावश्यक मानते हुए निरस्त कर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी का दावा है कि कथित शराब घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जब छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार सत्ता में थी। एजेंसी के अनुसार इस दौरान राज्य के खजाने को भारी नुकसान पहुँचाया गया। उच्च न्यायालय के जमानत आदेश के विरुद्ध ईडी और राज्य सरकार दोनों ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, यह तर्क देते हुए कि जमानत मिलने के बाद से मामले के प्रमुख गवाह सामने आने से डर रहे हैं।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि मामले से जुड़े कानूनी प्रश्न अभी भी विचाराधीन रहेंगे। सीबीआई और ईडी की जाँच जारी है और मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ेगी। यह फैसला उन हजारों मामलों पर भी असर डाल सकता है जहाँ जमानत आदेशों को तकनीकी आधार पर चुनौती दी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह प्रश्न अनुत्तरित रहता है कि ₹2,161 करोड़ के कथित घोटाले में मुख्य आरोपियों पर मुकदमा कब तक निर्णायक मोड़ लेगा। गवाहों के सामने न आने की दलील और वर्षों से लंबित जाँच मिलकर एक ऐसी तस्वीर बनाते हैं जो न्यायिक दक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला क्या है?
यह कथित तौर पर ₹2,161 करोड़ का घोटाला है, जिसमें ईडी का दावा है कि 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ सरकार के खजाने में बड़े पैमाने पर अनियमितता की गई। इस मामले में सीबीआई और ईडी दोनों मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के कोण से जाँच कर रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने चैतन्य बघेल की जमानत क्यों बरकरार रखी?
न्यायालय ने माना कि केवल इस आधार पर जमानत रद्द नहीं की जा सकती कि आदेश में पर्याप्त कारण नहीं दिए गए। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने भी स्वीकार किया कि कानूनी त्रुटि अकेले आरोपी की स्वतंत्रता छीनने का आधार नहीं बनती।
उच्च न्यायालय की किन टिप्पणियों को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया?
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य की आर्थिक अपराध शाखा और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो पर 'पिक एंड चूज़' तरीके से चुनिंदा गिरफ्तारियाँ करने का आरोप लगाया था। सर्वोच्च न्यायालय ने इन टिप्पणियों को पूर्णतः अनावश्यक बताते हुए निरस्त कर दिया।
इस मामले में ईडी और राज्य सरकार की याचिका क्या थी?
ईडी और राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के जनवरी के जमानत आदेश को चुनौती देते हुए तर्क दिया था कि चैतन्य बघेल की रिहाई के बाद मामले के प्रमुख गवाह सामने आने से डर रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने यह याचिका खारिज कर दी।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि मामले से जुड़े कानूनी प्रश्न न्यायालय के समक्ष खुले रहेंगे। सीबीआई और ईडी की जाँच जारी रहेगी और मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ेगी।
राष्ट्र प्रेस
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