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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: चैतन्य बघेल की जमानत बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की अपील खारिज की

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: चैतन्य बघेल की जमानत बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की अपील खारिज की

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के ₹2,161 करोड़ के कथित शराब घोटाले में चैतन्य बघेल की जमानत बरकरार रखी और ईडी की अपील खारिज कर दी। हालाँकि, उच्च न्यायालय की जाँच एजेंसी विरोधी टिप्पणियाँ हटाते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले के कानूनी प्रश्न अभी खुले हैं।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई को चैतन्य बघेल की जमानत रद्द करने से इनकार किया।
ईडी और छत्तीसगढ़ सरकार की अपील खारिज; मामला ₹2,161 करोड़ के कथित शराब घोटाले से जुड़ा।
सीजेआई न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने उच्च न्यायालय की जाँच एजेंसी विरोधी टिप्पणियाँ 'अनावश्यक' बताकर हटाईं।
चैतन्य बघेल को जुलाई 2025 में गिरफ्तार किया गया था; उच्च न्यायालय ने जनवरी 2026 में जमानत दी थी।
मामले की जाँच सीबीआई और ईडी दोनों कर रही हैं; कथित अनियमितताएँ 2019 से 2022 के बीच की बताई जाती हैं।

सर्वोच्च न्यायालय ने 22 जुलाई को छत्तीसगढ़ के कथित ₹2,161 करोड़ के शराब घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा दी गई जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले से जुड़े कानूनी प्रश्न अभी भी विचाराधीन रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने उच्च न्यायालय के जमानत आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हालाँकि, पीठ ने उच्च न्यायालय द्वारा जाँच एजेंसी के विरुद्ध की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को यह कहते हुए हटा दिया कि वे 'पूरी तरह अनावश्यक' थीं। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि मामले से संबंधित व्यापक कानूनी मुद्दे न्यायालय के समक्ष खुले रहेंगे।

मामले की पृष्ठभूमि

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की एकल पीठ के न्यायाधीश अरविंद कुमार वर्मा ने इसी वर्ष जनवरी में चैतन्य बघेल को मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों में जमानत प्रदान की थी। ईडी ने चैतन्य बघेल को जुलाई 2025 में गिरफ्तार किया था, जब 2019 से 2023 के बीच संचालित कथित शराब घोटाले की जाँच चल रही थी। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि चैतन्य बघेल पर आबकारी विभाग या राज्य की शराब निगमों में किसी आधिकारिक या वैधानिक पद पर रहने का आरोप नहीं है।

ईडी और राज्य सरकार की दलीलें

ईडी और छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में तर्क दिया था कि चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद से मामले का कोई भी मुख्य गवाह सामने आने से डर रहा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उच्च न्यायालय का आदेश गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को नज़रअंदाज़ करता है।

पिछली सुनवाई और न्यायालय की नाराज़गी

गौरतलब है कि 17 जून को इस मामले की सुनवाई उस समय टल गई थी, जब ईडी ने अतिरिक्त समय माँगा था। सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने ईडी के इस रवैये पर स्पष्ट नाराज़गी जताई थी और कहा था, 'पहले कहते हैं कि मामले को सूचीबद्ध कीजिए और फिर स्थगन माँग लेते हैं। हम ऐसे मामलों की फाइलें रातभर पढ़ते हैं।'

मामले का दायरा और आगे की राह

यह प्रकरण ₹2,161 करोड़ के कथित शराब घोटाले से जुड़ा है, जिसकी जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) और ईडी दोनों एजेंसियाँ कर रही हैं। ईडी की जाँच के अनुसार, इस घोटाले में 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ सरकार के खजाने में भारी अनियमितताएँ हुईं। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि चैतन्य बघेल के विरुद्ध आरोप मुख्यतः पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों और अन्य आरोपियों से कथित संबंधों पर आधारित हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब मामले की आगामी सुनवाई में व्यापक कानूनी प्रश्नों पर बहस होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे अंतिम फैसला मानना जल्दबाज़ी होगी — अदालत ने स्वयं कहा है कि व्यापक कानूनी प्रश्न अभी खुले हैं। उल्लेखनीय यह है कि ईडी को 17 जून की सुनवाई में भी स्थगन माँगने पर न्यायालय की नाराज़गी झेलनी पड़ी थी, जो एजेंसी की तैयारी पर सवाल उठाती है। उच्च न्यायालय की टिप्पणियाँ हटाए जाने से स्पष्ट है कि सर्वोच्च न्यायालय जाँच एजेंसियों की आलोचना को अनुचित मानता है, भले ही जमानत बरकरार रखी हो। ₹2,161 करोड़ के इस कथित घोटाले में सीबीआई और ईडी दोनों की समानांतर जाँच चल रही है — दोनों एजेंसियों के बीच समन्वय और साक्ष्य की मज़बूती ही आगे की कानूनी लड़ाई की दिशा तय करेगी।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने चैतन्य बघेल की जमानत रद्द करने से क्यों इनकार किया?
सीजेआई न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने उच्च न्यायालय के जमानत आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई पर्याप्त आधार नहीं पाया और ईडी तथा राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। हालाँकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले से जुड़े कानूनी मुद्दे अभी भी विचाराधीन रहेंगे।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला क्या है और इसमें कितनी राशि शामिल है?
यह कथित घोटाला ₹2,161 करोड़ का बताया जाता है, जिसमें 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ सरकार के खजाने में बड़ी अनियमितताओं का आरोप है। इस मामले की जाँच सीबीआई और ईडी दोनों एजेंसियाँ कर रही हैं।
चैतन्य बघेल को पहले कब और क्यों गिरफ्तार किया गया था?
ईडी ने चैतन्य बघेल को जुलाई 2025 में कथित शराब घोटाले की जाँच के दौरान गिरफ्तार किया था। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप हैं, हालाँकि उच्च न्यायालय ने कहा था कि उन पर आबकारी विभाग में किसी आधिकारिक पद पर रहने का आरोप नहीं है।
ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत रद्द करने के लिए क्या दलील दी थी?
ईडी ने तर्क दिया था कि चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद से मामले का कोई भी मुख्य गवाह सामने आने से डर रहा है। एजेंसी का कहना था कि उच्च न्यायालय का आदेश गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को नज़रअंदाज़ करता है।
सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय की टिप्पणियाँ क्यों हटाईं?
सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय द्वारा जाँच एजेंसी के विरुद्ध की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को 'पूरी तरह अनावश्यक' बताते हुए हटा दिया। जमानत बरकरार रखते हुए भी अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की टिप्पणियाँ जमानत आदेश के लिए ज़रूरी नहीं थीं।
राष्ट्र प्रेस
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