3 अगस्त 2026
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चैतन्य बघेल की जमानत रद्द याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को लगाई फटकार, सुनवाई स्थगित

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चैतन्य बघेल की जमानत रद्द याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को लगाई फटकार, सुनवाई स्थगित

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने ईडी को खरी-खरी सुनाई — 'फाइलें रातभर पढ़ते हैं, और आप स्थगन माँग लेते हैं।' छत्तीसगढ़ के कथित ₹1,000 करोड़ के शराब घोटाले में चैतन्य बघेल की जमानत रद्द कराने की ईडी की कोशिश फिलहाल अटकी है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 17 जून 2026 को चैतन्य बघेल की जमानत रद्द करने की ईडी की याचिका पर सुनवाई स्थगित की।
CJI सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी.
मोहना की पीठ ने ईडी के स्थगन आवेदन पर कड़ी नाराजगी जताई।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने जनवरी 2026 में चैतन्य बघेल को PMLA मामले में जमानत दी थी।
ईडी का आरोप है कि चैतन्य बघेल ने कथित शराब घोटाले में ₹1,000 करोड़ की राशि का संचालन किया।
मामले की जाँच ईडी, ACB और EOW — तीन एजेंसियाँ मिलकर कर रही हैं।

सर्वोच्च न्यायालय ने 17 जून 2026 को छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले में चैतन्य बघेल की जमानत रद्द करने की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने ईडी द्वारा अतिरिक्त समय माँगे जाने पर कड़ी नाराजगी जताई। चैतन्य बघेल पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र हैं।

अदालत की तीखी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान पीठ ने ईडी की स्थगन माँग पर स्पष्ट असंतोष व्यक्त किया। पीठ ने कहा, 'पहले कहते हैं कि मामले को सूचीबद्ध कीजिए और फिर स्थगन माँग लेते हैं। हम ऐसे मामलों की फाइलें रातभर पढ़ते हैं।' यह टिप्पणी इस बात का संकेत है कि न्यायालय एजेंसियों द्वारा मामलों को सूचीबद्ध कराने के बाद बार-बार स्थगन माँगने की प्रवृत्ति को गंभीरता से ले रहा है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के उस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जिसके तहत चैतन्य बघेल को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दर्ज कथित शराब घोटाला मामले में जमानत प्रदान की गई थी। उच्च न्यायालय के एकल पीठ के न्यायाधीश अरविंद कुमार वर्मा ने इस वर्ष जनवरी में यह जमानत दी थी।

ईडी ने चैतन्य बघेल को जुलाई 2025 में गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप है कि 2019 से 2023 के बीच संचालित कथित शराब घोटाले में उनकी सक्रिय भूमिका थी और उन्होंने कथित तौर पर अपराध से अर्जित लगभग ₹1,000 करोड़ की राशि का संचालन किया।

उच्च न्यायालय के जमानत आदेश के आधार

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अपने जमानत आदेश में कहा था कि चैतन्य बघेल पर आबकारी विभाग या राज्य की शराब निगमों में किसी आधिकारिक अथवा वैधानिक पद पर रहने का आरोप नहीं है। अदालत ने यह भी माना था कि उनके विरुद्ध आरोप मुख्यतः PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों और अन्य आरोपियों से कथित संबंधों पर आधारित हैं।

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि चैतन्य बघेल की भूमिका मुख्यतः अनुमान और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर टिकी है, किसी प्रत्यक्ष आपराधिक कृत्य का स्पष्ट आरोप नहीं है। साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि मुकदमे के शीघ्र पूर्ण होने की संभावना नहीं है और दीर्घकालिक हिरासत निर्दोषता की संवैधानिक धारणा को कमज़ोर करेगी।

ईडी के आरोप और जाँच का दायरा

ईडी के अनुसार, इस कथित घोटाले में शराब बिक्री पर अवैध कमीशन, बिना हिसाब-किताब के शराब उत्पादन और आबकारी राजस्व की हेराफेरी शामिल थी, जिससे राज्य के खजाने को भारी नुकसान पहुँचा। इस मामले की जाँच ईडी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा (ACB/EOW) भी कर रही है।

अब तक मामले में कई नेताओं, नौकरशाहों और कारोबारियों के विरुद्ध चार्जशीट और अभियोजन शिकायतें दाखिल की जा चुकी हैं। अगली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर निर्भरता — वे PMLA मामलों में जमानत की संवैधानिक सीमाओं पर एक महत्वपूर्ण न्यायिक संकेत हैं। ईडी के लिए असली चुनौती यह है कि वह ₹1,000 करोड़ के आरोप को ठोस दस्तावेज़ी साक्ष्य से साबित करे, न कि केवल सह-आरोपियों के बयानों पर टिके रहे।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चैतन्य बघेल कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
चैतन्य बघेल छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र हैं। ईडी का आरोप है कि उन्होंने 2019 से 2023 के बीच संचालित कथित शराब घोटाले में सक्रिय भूमिका निभाई और कथित तौर पर ₹1,000 करोड़ की अपराध-अर्जित राशि का संचालन किया। उन्हें जुलाई 2025 में PMLA के तहत गिरफ्तार किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने ईडी पर नाराजगी क्यों जताई?
ईडी ने स्वयं मामले को सूचीबद्ध कराया और फिर सुनवाई के दिन अतिरिक्त समय माँगा। CJI सूर्यकांत की पीठ ने इस पर कहा कि 'हम ऐसे मामलों की फाइलें रातभर पढ़ते हैं' — यह टिप्पणी एजेंसी की तैयारी पर सीधा सवाल थी।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने जमानत किस आधार पर दी थी?
उच्च न्यायालय ने जनवरी 2026 में जमानत देते हुए कहा था कि चैतन्य बघेल का आबकारी विभाग में कोई आधिकारिक पद नहीं था, उनके विरुद्ध आरोप मुख्यतः परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित हैं, और मुकदमे के शीघ्र पूर्ण होने की संभावना नहीं है। अदालत ने माना कि दीर्घकालिक हिरासत निर्दोषता की संवैधानिक धारणा के विरुद्ध होगी।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में कौन-सी एजेंसियाँ जाँच कर रही हैं?
इस मामले की जाँच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), छत्तीसगढ़ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) — तीन एजेंसियाँ मिलकर कर रही हैं। अब तक कई नेताओं, नौकरशाहों और कारोबारियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने अगली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं की है। ईडी को अपनी याचिका पर तैयारी के साथ पेश होना होगा। उच्च न्यायालय के जमानत आदेश को चुनौती देने के लिए ईडी को प्रत्यक्ष साक्ष्य और ठोस तर्क न्यायालय के समक्ष रखने होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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