चैतन्य बघेल की जमानत रद्द याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को लगाई फटकार, सुनवाई स्थगित
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 17 जून 2026 को छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले में चैतन्य बघेल की जमानत रद्द करने की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने ईडी द्वारा अतिरिक्त समय माँगे जाने पर कड़ी नाराजगी जताई। चैतन्य बघेल पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र हैं।
अदालत की तीखी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान पीठ ने ईडी की स्थगन माँग पर स्पष्ट असंतोष व्यक्त किया। पीठ ने कहा, 'पहले कहते हैं कि मामले को सूचीबद्ध कीजिए और फिर स्थगन माँग लेते हैं। हम ऐसे मामलों की फाइलें रातभर पढ़ते हैं।' यह टिप्पणी इस बात का संकेत है कि न्यायालय एजेंसियों द्वारा मामलों को सूचीबद्ध कराने के बाद बार-बार स्थगन माँगने की प्रवृत्ति को गंभीरता से ले रहा है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के उस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जिसके तहत चैतन्य बघेल को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दर्ज कथित शराब घोटाला मामले में जमानत प्रदान की गई थी। उच्च न्यायालय के एकल पीठ के न्यायाधीश अरविंद कुमार वर्मा ने इस वर्ष जनवरी में यह जमानत दी थी।
ईडी ने चैतन्य बघेल को जुलाई 2025 में गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप है कि 2019 से 2023 के बीच संचालित कथित शराब घोटाले में उनकी सक्रिय भूमिका थी और उन्होंने कथित तौर पर अपराध से अर्जित लगभग ₹1,000 करोड़ की राशि का संचालन किया।
उच्च न्यायालय के जमानत आदेश के आधार
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अपने जमानत आदेश में कहा था कि चैतन्य बघेल पर आबकारी विभाग या राज्य की शराब निगमों में किसी आधिकारिक अथवा वैधानिक पद पर रहने का आरोप नहीं है। अदालत ने यह भी माना था कि उनके विरुद्ध आरोप मुख्यतः PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों और अन्य आरोपियों से कथित संबंधों पर आधारित हैं।
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि चैतन्य बघेल की भूमिका मुख्यतः अनुमान और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर टिकी है, किसी प्रत्यक्ष आपराधिक कृत्य का स्पष्ट आरोप नहीं है। साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि मुकदमे के शीघ्र पूर्ण होने की संभावना नहीं है और दीर्घकालिक हिरासत निर्दोषता की संवैधानिक धारणा को कमज़ोर करेगी।
ईडी के आरोप और जाँच का दायरा
ईडी के अनुसार, इस कथित घोटाले में शराब बिक्री पर अवैध कमीशन, बिना हिसाब-किताब के शराब उत्पादन और आबकारी राजस्व की हेराफेरी शामिल थी, जिससे राज्य के खजाने को भारी नुकसान पहुँचा। इस मामले की जाँच ईडी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा (ACB/EOW) भी कर रही है।
अब तक मामले में कई नेताओं, नौकरशाहों और कारोबारियों के विरुद्ध चार्जशीट और अभियोजन शिकायतें दाखिल की जा चुकी हैं। अगली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है।