17 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कोयला मंत्रालय ने 16वें दौर की नीलामी शुरू की, 25 ब्लॉक पेश; 6 खदानों के लिए सीएमडीपीए पर हस्ताक्षर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कोयला मंत्रालय ने 16वें दौर की नीलामी शुरू की, 25 ब्लॉक पेश; 6 खदानों के लिए सीएमडीपीए पर हस्ताक्षर

सारांश

कोयला मंत्रालय ने 16वें नीलामी दौर में 25 नए ब्लॉक पेश किए और छह खदानों के लिए सीएमडीपीए सौंपे। अब तक 147 खदानों की नीलामी हो चुकी है। लगातार दूसरे साल 1 अरब टन उत्पादन और ₹47,500 करोड़ से अधिक के अनुमानित वार्षिक राजस्व के साथ, भारत कोयला आयात निर्भरता घटाने की राह पर है।

मुख्य बातें

कोयला मंत्रालय ने 17 सितंबर 2026 को कमर्शियल कोयला खदान नीलामी के 16वें दौर की शुरुआत की, जिसमें 25 कोयला ब्लॉक पेश किए गए।
छह खदानों — तारा (संशोधित), मार्गो वेस्ट, मार्गो ईस्ट, मंडला साउथ, डोंगेरी ताल-II, पीकेसी डिप साइड — के सफल बोलीदाताओं को सीएमडीपीए सौंपे गए।
इन छह खदानों का कुल भूवैज्ञानिक भंडार लगभग 1,504 मिलियन टन ; पीक क्षमता 11.62 एमटीपीए ; अनुमानित 15,700 रोज़गार और ₹1,984 करोड़ वार्षिक राजस्व।
अब तक कुल 147 खदानों की नीलामी; अनुमानित ₹47,500 करोड़ से अधिक वार्षिक राजस्व और ₹55,000 करोड़ से अधिक पूंजी निवेश।
भारत ने लगातार दूसरे वर्ष कोयला उत्पादन में 1 अरब टन का आँकड़ा पार किया।
16वें दौर में 100% एफडीआई और अंतिम उपयोग पर कोई प्रतिबंध नहीं जैसी उदार शर्तें लागू।

कोयला मंत्रालय ने 17 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कमर्शियल कोयला खदान नीलामी के 16वें दौर की औपचारिक शुरुआत की। इस अवसर पर पहले के दौर में नीलाम हुई छह कोयला खदानों के सफल बोलीदाताओं को कोयला खदान विकास और उत्पादन समझौते (सीएमडीपीए) भी सौंपे गए। यह आयोजन भारत के कमर्शियल कोल माइनिंग कार्यक्रम के विस्तार में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

छह खदानों को सीएमडीपीए हस्तांतरण

जिन छह खदानों के लिए समझौते सौंपे गए, उनमें तारा (संशोधित), मार्गो वेस्ट, मार्गो ईस्ट, मंडला साउथ, डोंगेरी ताल-II और पीकेसी के डिप साइड शामिल हैं। आधिकारिक बयान के अनुसार, इन खदानों के सफल बोलीदाताओं में सीजी सिन-गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड, झारखंड एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड, क्यूब कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड, गैलेंट इस्पात लिमिटेड और सिंगरेनी कोलियरीज लिमिटेड शामिल हैं।

इन छह खदानों में कुल मिलाकर लगभग 1,504 मिलियन टन का भूवैज्ञानिक भंडार है और इनकी संयुक्त पीक रेटेड क्षमता 11.62 एमटीपीए है। चालू होने पर, इनसे लगभग ₹1,984 करोड़ का वार्षिक राजस्व अर्जित होने, लगभग ₹1,743 करोड़ का पूंजी निवेश आकर्षित होने और संबंधित कोयला-समृद्ध क्षेत्रों में लगभग 15,700 रोज़गार अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

16वें दौर में 25 कोयला ब्लॉक पेश

नए दौर में 25 कोयला ब्लॉक पेश किए गए हैं, जिनमें 21 पूरी तरह खोजी गई और चार आंशिक रूप से खोजी गई खदानें शामिल हैं। ये खदानें नौ कोयला-समृद्ध राज्यों — अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल — में स्थित हैं। इनमें से छह खदानें कोल माइन्स (स्पेशल प्रोविजन्स) एक्ट (सीएमएसपी) के तहत और 19 खदानें माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट (एमएमडीआर) के तहत पेश की गई हैं।

ये ब्लॉक अनुभवी खनन कंपनियों, नए प्रवेशकों और प्रौद्योगिकी-आधारित उद्यमों के लिए खुले हैं। उदार कमर्शियल कोल माइनिंग फ्रेमवर्क के तहत अंतिम उपयोग पर कोई प्रतिबंध नहीं है, ऑटोमैटिक रूट से 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है और कम अपफ्रंट पेमेंट की सुविधा है जिसे भविष्य के राजस्व हिस्से के साथ समायोजित किया जा सकता है।

कार्यक्रम का समग्र प्रदर्शन

इस दौर के लॉन्च के साथ कमर्शियल कोल माइनिंग प्रोग्राम के तहत अब तक कुल 147 कोयला खदानों की नीलामी की जा चुकी है। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, इन नीलामियों से नौ कोयला-समृद्ध राज्यों में ₹47,500 करोड़ से अधिक का वार्षिक राजस्व और ₹55,000 करोड़ से अधिक का पूंजी निवेश मिलने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत कोयला उत्पादन में लगातार दूसरे साल 1 अरब टन का आँकड़ा पार कर चुका है।

मंत्री की प्रतिक्रिया और नीतिगत संदेश

लॉन्च कार्यक्रम में कोयला और खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि कोयला देश की प्राथमिक ऊर्जा ज़रूरतों का लगभग 55 प्रतिशत और बिजली उत्पादन का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पूरा करता है। उन्होंने अधिक पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और प्रौद्योगिकी-आधारित प्रक्रियाओं के ज़रिए कोयला क्षेत्र में बदलाव लाने के सरकार के प्रयासों को रेखांकित किया।

दुबे ने घरेलू कोयला संसाधनों का पूर्ण दोहन करने, उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने निवेशकों और उद्योग जगत से नीलामी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी कर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने में योगदान देने का आह्वान किया।

गौरतलब है कि कमर्शियल कोयला खदान नीलामी कार्यक्रम 2020 में शुरू हुआ था और इसे ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रमुख सुधार के रूप में पेश किया गया था। 16 दौर पूरे होने के साथ, यह कार्यक्रम अब अपने विस्तार के नए चरण में प्रवेश कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 करोड़ के अनुमानित राजस्व के आँकड़े प्रभावशाली दिखते हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि इनमें से कितनी खदानें वास्तव में उत्पादन में आई हैं और उनसे कितने रोज़गार सत्यापित हुए हैं। ऊर्जा सुरक्षा के नाम पर कोयले पर बढ़ती निर्भरता भारत के अपने नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों के साथ एक संरचनात्मक तनाव पैदा करती है। गौरतलब है कि कोयला अभी भी देश की 70% बिजली का स्रोत है, जो ऊर्जा संक्रमण की धीमी रफ़्तार को उजागर करता है। नीलामी प्रक्रिया की पारदर्शिता की सराहना होनी चाहिए, लेकिन 'अनुमानित राजस्व' और 'अपेक्षित रोज़गार' के वादों को ज़मीनी नतीजों से जोड़ने की जवाबदेही तंत्र अभी भी अस्पष्ट है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कमर्शियल कोयला खदान नीलामी का 16वां दौर क्या है?
यह कोयला मंत्रालय द्वारा 17 सितंबर 2026 को शुरू किया गया नीलामी का नया चरण है, जिसमें नौ राज्यों में स्थित 25 कोयला ब्लॉक पेश किए गए हैं। इसमें 21 पूरी तरह खोजी गई और चार आंशिक रूप से खोजी गई खदानें शामिल हैं।
16वें दौर की नीलामी में कौन भाग ले सकता है?
ये ब्लॉक अनुभवी खनन कंपनियों, नए प्रवेशकों और प्रौद्योगिकी-आधारित उद्यमों के लिए खुले हैं। उदार फ्रेमवर्क के तहत ऑटोमैटिक रूट से 100% एफडीआई की अनुमति है और अंतिम उपयोग पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
सीएमडीपीए क्या होता है और इसे किन खदानों के लिए सौंपा गया?
सीएमडीपीए यानी कोल माइन डेवलपमेंट एंड प्रोडक्शन एग्रीमेंट वह कानूनी दस्तावेज़ है जो सफल बोलीदाता को खदान विकसित करने और उत्पादन करने का अधिकार देता है। इस बार तारा (संशोधित), मार्गो वेस्ट, मार्गो ईस्ट, मंडला साउथ, डोंगेरी ताल-II और पीकेसी डिप साइड के लिए ये समझौते सौंपे गए।
इन छह खदानों से कितना रोज़गार और राजस्व मिलने की उम्मीद है?
आधिकारिक बयान के अनुसार, इन छह खदानों से लगभग 15,700 रोज़गार अवसर, ₹1,984 करोड़ का वार्षिक राजस्व और ₹1,743 करोड़ का पूंजी निवेश अपेक्षित है। इनमें कुल 1,504 मिलियन टन का भूवैज्ञानिक भंडार है।
अब तक कितनी कमर्शियल कोयला खदानों की नीलामी हो चुकी है?
16वें दौर के लॉन्च के साथ अब तक कुल 147 कोयला खदानों की नीलामी हो चुकी है। इनसे नौ राज्यों में ₹47,500 करोड़ से अधिक का वार्षिक राजस्व और ₹55,000 करोड़ से अधिक का पूंजी निवेश मिलने का अनुमान है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 6 महीने पहले
  3. 8 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले