कोयला क्षेत्र में निजी भागीदारी: किशन रेड्डी ने बताया — 14 दौर की नीलामी पूरी, 15वाँ जारी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने 6 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में संसद सदस्यों की परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें वाणिज्यिक कोयला खनन में सुधारों और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के उपायों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत कोयला उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने समिति को बताया कि वाणिज्यिक कोयला खदानों की नीलामी के 14 दौर सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं और 15वें दौर की प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी नीलामी प्रणाली ने भारत के कोयला क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और निवेश को नई गति दी है।
मंत्री ने यह भी बताया कि कोयला मंत्रालय निजी कंपनियों और उद्योग संगठनों के साथ निरंतर संवाद बनाए हुए है। इसके लिए देशभर में रोडशो और विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श बैठकें आयोजित की जा रही हैं, ताकि वाणिज्यिक कोयला खनन को लेकर जागरूकता बढ़े और निजी निवेश को प्रोत्साहन मिले।
उत्पादन में कैप्टिव व वाणिज्यिक खदानों की भूमिका
बैठक में कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने बताया कि कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खदानों ने पिछले दो वित्त वर्षों में भारत को 1 अरब टन (1 बिलियन टन) कोयला उत्पादन का ऐतिहासिक आँकड़ा हासिल करने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में देश के कुल कोयला उत्पादन में इन खदानों का योगदान लगभग 20 प्रतिशत रहा।
परिचालन समयसीमा में उल्लेखनीय कमी
कोयला सचिव विक्रम देव दत्त के अनुसार, क्षेत्र में लगातार किए गए सुधारों के चलते खदानों को परिचालन में लाने की अवधि में उल्लेखनीय कमी आई है। पूरी तरह खोजी जा चुकी कोयला खदानों के संचालन की समयसीमा 51 महीने से घटकर 40 महीने रह गई है। वहीं, आंशिक रूप से खोजी गई खदानों के लिए यह अवधि 66 महीने से घटकर 52 महीने हो गई है।
पर्यावरण और समुदाय पर संतुलन की माँग
बैठक में कोयला मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव रुपिंदर बराड़ ने 'वाणिज्यिक कोयला खनन सुधार और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा' विषय पर विस्तृत प्रस्तुति दी। संसदीय समिति के सदस्यों ने मंत्रालय के प्रयासों की सराहना करते हुए सुझाव दिया कि वाणिज्यिक खनन के विस्तार के साथ-साथ पर्यावरणीय और स्थानीय समुदायों से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान दिया जाए।
आगे क्या
केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने समिति के सदस्यों को आश्वस्त किया कि उनके सभी सुझावों का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा और उन्हें भविष्य की नीतियों एवं निर्णयों में उचित महत्व दिया जाएगा। 15वें नीलामी दौर के परिणाम और उसके बाद की नीतिगत दिशा यह तय करेगी कि निजी निवेश की गति कितनी तेज़ हो पाती है।