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कोयला क्षेत्र में निजी भागीदारी: किशन रेड्डी ने बताया — 14 दौर की नीलामी पूरी, 15वाँ जारी

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कोयला क्षेत्र में निजी भागीदारी: किशन रेड्डी ने बताया — 14 दौर की नीलामी पूरी, 15वाँ जारी

सारांश

कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने संसदीय समिति को बताया कि वाणिज्यिक खनन के 14 नीलामी दौर पूरे हो चुके हैं और 15वाँ जारी है। पिछले दो वर्षों में भारत 1 अरब टन उत्पादन के पार पहुँचा — जिसमें निजी खदानों का 20% योगदान रहा।

मुख्य बातें

केंद्रीय कोयला मंत्री जी.
किशन रेड्डी ने 6 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में संसद सदस्यों की परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की।
वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी के 14 दौर पूरे; 15वाँ दौर वर्तमान में जारी।
कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों ने भारत को 1 अरब टन कोयला उत्पादन हासिल करने में मदद की; पिछले वित्त वर्ष में इनका योगदान कुल उत्पादन का 20% रहा।
पूरी तरह खोजी गई खदानों की परिचालन समयसीमा 51 महीने से घटकर 40 महीने ; आंशिक खदानों की 66 महीने से 52 महीने हुई।
संसदीय समिति ने पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के हितों की रक्षा के साथ खनन विस्तार पर संतुलन बनाने के सुझाव दिए।

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने 6 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में संसद सदस्यों की परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें वाणिज्यिक कोयला खनन में सुधारों और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के उपायों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत कोयला उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने समिति को बताया कि वाणिज्यिक कोयला खदानों की नीलामी के 14 दौर सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं और 15वें दौर की प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी नीलामी प्रणाली ने भारत के कोयला क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और निवेश को नई गति दी है।

मंत्री ने यह भी बताया कि कोयला मंत्रालय निजी कंपनियों और उद्योग संगठनों के साथ निरंतर संवाद बनाए हुए है। इसके लिए देशभर में रोडशो और विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श बैठकें आयोजित की जा रही हैं, ताकि वाणिज्यिक कोयला खनन को लेकर जागरूकता बढ़े और निजी निवेश को प्रोत्साहन मिले।

उत्पादन में कैप्टिव व वाणिज्यिक खदानों की भूमिका

बैठक में कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने बताया कि कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खदानों ने पिछले दो वित्त वर्षों में भारत को 1 अरब टन (1 बिलियन टन) कोयला उत्पादन का ऐतिहासिक आँकड़ा हासिल करने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में देश के कुल कोयला उत्पादन में इन खदानों का योगदान लगभग 20 प्रतिशत रहा।

परिचालन समयसीमा में उल्लेखनीय कमी

कोयला सचिव विक्रम देव दत्त के अनुसार, क्षेत्र में लगातार किए गए सुधारों के चलते खदानों को परिचालन में लाने की अवधि में उल्लेखनीय कमी आई है। पूरी तरह खोजी जा चुकी कोयला खदानों के संचालन की समयसीमा 51 महीने से घटकर 40 महीने रह गई है। वहीं, आंशिक रूप से खोजी गई खदानों के लिए यह अवधि 66 महीने से घटकर 52 महीने हो गई है।

पर्यावरण और समुदाय पर संतुलन की माँग

बैठक में कोयला मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव रुपिंदर बराड़ ने 'वाणिज्यिक कोयला खनन सुधार और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा' विषय पर विस्तृत प्रस्तुति दी। संसदीय समिति के सदस्यों ने मंत्रालय के प्रयासों की सराहना करते हुए सुझाव दिया कि वाणिज्यिक खनन के विस्तार के साथ-साथ पर्यावरणीय और स्थानीय समुदायों से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान दिया जाए।

आगे क्या

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने समिति के सदस्यों को आश्वस्त किया कि उनके सभी सुझावों का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा और उन्हें भविष्य की नीतियों एवं निर्णयों में उचित महत्व दिया जाएगा। 15वें नीलामी दौर के परिणाम और उसके बाद की नीतिगत दिशा यह तय करेगी कि निजी निवेश की गति कितनी तेज़ हो पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि निजी खिलाड़ी वास्तव में उत्पादन लक्ष्य पूरे कर रहे हैं या केवल ब्लॉक आवंटन तक सीमित हैं। परिचालन समयसीमा में कमी स्वागत योग्य है, पर पर्यावरणीय मंज़ूरियों और स्थानीय विस्थापन के मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं — जिन्हें संसदीय समिति ने भी रेखांकित किया। जब तक इन सामाजिक-पर्यावरणीय बाधाओं का व्यवस्थित समाधान नहीं होता, निजी निवेश की रफ़्तार नीलामी संख्याओं जितनी चमकदार नहीं रह सकती।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाणिज्यिक कोयला खनन नीलामी का 15वाँ दौर कब तक पूरा होगा?
कोयला मंत्रालय के अनुसार 15वें नीलामी दौर की प्रक्रिया वर्तमान में जारी है, लेकिन इसकी अंतिम तिथि की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है। पिछले 14 दौर सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं।
भारत के कोयला उत्पादन में कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों का कितना योगदान है?
कोयला सचिव विक्रम देव दत्त के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में देश के कुल कोयला उत्पादन में कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों का योगदान लगभग 20 प्रतिशत रहा। इन्हीं खदानों ने भारत को पिछले दो वित्त वर्षों में 1 अरब टन उत्पादन का आँकड़ा पार करने में मदद की।
कोयला खदानों की परिचालन समयसीमा में कितनी कमी आई है?
सुधारों के बाद पूरी तरह खोजी गई खदानों की परिचालन समयसीमा 51 महीने से घटकर 40 महीने हो गई है। आंशिक रूप से खोजी गई खदानों के लिए यह अवधि 66 महीने से घटकर 52 महीने रह गई है।
संसदीय समिति ने कोयला खनन पर क्या सुझाव दिए?
समिति के सदस्यों ने निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरणीय और स्थानीय समुदायों से जुड़े मुद्दों पर संतुलन बनाए रखने की सिफारिश की। मंत्री जी. किशन रेड्डी ने आश्वासन दिया कि इन सुझावों को भविष्य की नीतियों में उचित महत्व दिया जाएगा।
कोयला क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ाने के लिए सरकार क्या कर रही है?
कोयला मंत्रालय देशभर में रोडशो और हितधारक परामर्श बैठकें आयोजित कर रहा है। पारदर्शी नीलामी प्रणाली लागू की गई है और परिचालन समयसीमा में कमी की गई है, ताकि निजी कंपनियों के लिए कोयला खनन अधिक व्यावहारिक और आकर्षक बने।
राष्ट्र प्रेस
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