3 अगस्त 2026
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कोयला उत्पादन में बड़ी छलांग: कैप्टिव व वाणिज्यिक खदानों से जुलाई में 9.6% वृद्धि, 14.78 मिलियन टन उत्पादन

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कोयला उत्पादन में बड़ी छलांग: कैप्टिव व वाणिज्यिक खदानों से जुलाई में 9.6% वृद्धि, 14.78 मिलियन टन उत्पादन

सारांश

जुलाई 2026 में भारत की कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों ने 9.6% की छलांग लगाते हुए 14.78 मिलियन टन उत्पादन किया। वित्त वर्ष में अब तक 63.16 मिलियन टन — पिछले साल से 6.2% अधिक। कोयला मंत्रालय ने इसे आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम बताया।

मुख्य बातें

कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों से जुलाई 2026 में उत्पादन सालाना आधार पर 9.6% बढ़कर 14.78 मिलियन टन हुआ।
जुलाई में इन खदानों से कोयले की आपूर्ति 17.49 मिलियन टन रही।
चालू वित्त वर्ष में अप्रैल–जुलाई के बीच संचयी उत्पादन 63.16 मिलियन टन — पिछले साल के 59.42 मिलियन टन से 6.2% अधिक।
संचयी आपूर्ति 70.14 मिलियन टन , जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 66.02 मिलियन टन से 5.8% ज़्यादा।
मंत्रालय के अनुसार यह वृद्धि आयातित कोयले पर निर्भरता घटाने और विदेशी मुद्रा बचाने में सहायक होगी।

कोयला मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत की कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों से जुलाई 2026 में उत्पादन सालाना आधार पर 9.6 प्रतिशत बढ़कर 14.78 मिलियन टन हो गया — जो इस क्षेत्र की परिचालन दक्षता में सुधार का संकेत है। मंत्रालय ने सोमवार, 3 अगस्त को यह जानकारी सार्वजनिक की।

मुख्य उत्पादन आंकड़े

सरकारी डेटा के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की शुरुआत से जुलाई तक कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों का संचयी उत्पादन 63.16 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 59.42 मिलियन टन से 6.2 प्रतिशत अधिक है। जुलाई माह में इन खदानों से कोयले की आपूर्ति 17.49 मिलियन टन तक पहुँची।

आपूर्ति के संचयी आंकड़े भी उत्साहजनक रहे — चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से जुलाई के बीच कुल आपूर्ति 70.14 मिलियन टन दर्ज की गई, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 66.02 मिलियन टन से 5.8 प्रतिशत अधिक है।

मंत्रालय की प्रतिक्रिया

कोयला मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, 'यह उत्साहजनक प्रदर्शन कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खनन क्षेत्र में परिचालन दक्षता के सुधार, खनन उत्पादकता में वृद्धि और खनन क्षमताओं के अधिक प्रभावी उपयोग का परिचायक है।' मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि वह प्रगतिशील नीतिगत पहलों, सशक्त नियामक देखरेख और हितधारकों के निरंतर समर्थन के ज़रिये उत्पादन वृद्धि को और गति देने के लिए प्रतिबद्ध है।

आत्मनिर्भरता और ऊर्जा सुरक्षा पर असर

मंत्रालय के अनुसार, घरेलू उत्पादन में यह सतत वृद्धि आयातित कोयले पर निर्भरता को कम करने में सहायक होगी। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला भी मज़बूत होगी। यह प्रगति सरकार के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को भी बल देती है, जिसके तहत देश की ऊर्जा एवं औद्योगिक ज़रूरतों के लिए महत्वपूर्ण कच्चे माल में स्वदेशी क्षमता बढ़ाना प्राथमिकता है।

क्षेत्र की भूमिका और आगे की राह

गौरतलब है कि कैप्टिव और वाणिज्यिक खनन क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के एकाधिकार को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब देश की बिजली और इस्पात उत्पादन में कोयले की माँग लगातार बढ़ रही है। मंत्रालय ने संकेत दिया है कि आपूर्ति से जुड़ी बाधाओं को दूर करने और कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह रफ़्तार टिकाऊ है — खासकर तब जब देश की बिजली और इस्पात माँग तेज़ी से बढ़ रही है। कैप्टिव और वाणिज्यिक क्षेत्र का विस्तार सरकार की नीति का हिस्सा है, लेकिन पर्यावरणीय मंज़ूरियों में देरी और भूमि अधिग्रहण की चुनौतियाँ अभी भी उत्पादन क्षमता के पूर्ण दोहन में बाधक हैं। आयात निर्भरता घटाने का दावा तब तक अधूरा है जब तक घरेलू कोयले की गुणवत्ता और लॉजिस्टिक्स — खासकर रेल ढुलाई — में सुधार नहीं होता।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जुलाई 2026 में कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों से कितना कोयला उत्पादन हुआ?
कोयला मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में इन खदानों से उत्पादन सालाना आधार पर 9.6% बढ़कर 14.78 मिलियन टन रहा। यह पिछले साल की तुलना में उल्लेखनीय सुधार है।
चालू वित्त वर्ष में अब तक कुल कोयला उत्पादन कितना रहा है?
अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों का संचयी उत्पादन 63.16 मिलियन टन रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 59.42 मिलियन टन से 6.2% अधिक है।
कोयले की आपूर्ति के क्या आंकड़े हैं?
जुलाई 2026 में कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों से आपूर्ति 17.49 मिलियन टन रही। वित्त वर्ष में अप्रैल से जुलाई तक संचयी आपूर्ति 70.14 मिलियन टन दर्ज की गई, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 66.02 मिलियन टन से 5.8% अधिक है।
इस उत्पादन वृद्धि का भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर क्या असर होगा?
कोयला मंत्रालय के अनुसार, घरेलू उत्पादन में यह वृद्धि आयातित कोयले पर निर्भरता घटाएगी, विदेशी मुद्रा बचाएगी और देश की ऊर्जा एवं औद्योगिक ज़रूरतों में आत्मनिर्भरता बढ़ाएगी। यह सरकार के आत्मनिर्भर भारत लक्ष्य के अनुरूप है।
कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खदानें क्या होती हैं?
कैप्टिव खदानें वे होती हैं जो किसी विशेष उद्योग — जैसे बिजली या इस्पात संयंत्र — के अपने उपयोग के लिए आवंटित होती हैं। वाणिज्यिक खदानें निजी कंपनियों को खुले बाज़ार में कोयला बेचने की अनुमति देती हैं। कोल इंडिया लिमिटेड के बाहर यह क्षेत्र भारत के कोयला उत्पादन में तेज़ी से बढ़ती हिस्सेदारी रख रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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