जून 2026 में भारत का कोयला उत्पादन 14.9% उछला, 1.79 करोड़ टन पर पहुंचा; अप्रैल में आयात 12.95% घटा
सारांश
मुख्य बातें
कोयला मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत की कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खदानों ने जून 2026 में 1.788 करोड़ टन कोयले का उत्पादन किया — जो जून 2025 के 1.556 करोड़ टन की तुलना में 14.9 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में 1.855 करोड़ टन कोयले की आपूर्ति (डिस्पैच) की गई। साथ ही, अप्रैल 2026 में देश का कुल कोयला आयात घटकर 21.13 मिलियन टन रह गया, जो एक वर्ष पहले 24.27 मिलियन टन था — यानी 12.95 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट।
पहली तिमाही का समग्र प्रदर्शन
कोयला मंत्रालय ने गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को जारी बयान में बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) में कैप्टिव और कमर्शियल खदानों के कुल उत्पादन में 5.35 प्रतिशत और डिस्पैच में 1.70 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज हुई। मंत्रालय के अनुसार, यह बेहतरी सरकार की नीतिगत पहलों, नियामकीय सुधारों और संबंधित पक्षों के साथ निरंतर समन्वय का नतीजा है।
गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2024-25 से 2026-27 के बीच पहली तिमाही में कैप्टिव और कमर्शियल खदानों के उत्पादन में करीब 10.7 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की गई है, जो घरेलू कोयला उत्पादन में संरचनात्मक विस्तार का संकेत देती है।
तीन नई खदानें चालू, कोकिंग कोल पर विशेष ज़ोर
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उर्तन, धिरौली और बिक्रम — तीन नई कोयला खदानों में उत्पादन आरंभ हुआ। इन तीनों की संयुक्त पीक रेटेड कैपेसिटी (PRC) 7.51 मिलियन टन प्रतिवर्ष (MTPA) है। इनमें उर्तन एक कोकिंग कोल ब्लॉक है, जिसे विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कोकिंग कोल इस्पात (स्टील) उत्पादन का प्रमुख कच्चा माल है। मंत्रालय के अनुसार, इससे घरेलू स्टील उद्योग को देश में उपलब्ध कोकिंग कोल की आपूर्ति बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।
कोयला आयात में गिरावट — बिजली क्षेत्र में सबसे बड़ी कमी
आयात के मोर्चे पर, अप्रैल 2026 में बिजली उत्पादन संयंत्रों द्वारा कोयला आयात 4.67 मिलियन टन से घटकर 3.51 मिलियन टन रह गया — यानी 24.89 प्रतिशत की गिरावट। जो संयंत्र पूरी तरह आयातित कोयले पर निर्भर हैं, उनमें यह कमी और भी तीखी रही: उनका आयात 3.97 मिलियन टन से घटकर 2.88 मिलियन टन पर आ गया, जो 27.45 प्रतिशत की गिरावट है — सभी श्रेणियों में सर्वाधिक।
देश की कुल कोयला खपत में आयात की हिस्सेदारी भी अप्रैल 2025 के 21.69 प्रतिशत से घटकर अप्रैल 2026 में 19.68 प्रतिशत रह गई — यानी दो प्रतिशत से अधिक की कमी। मंत्रालय का कहना है कि घरेलू कोयले की बेहतर उपलब्धता और नियमित आपूर्ति ने आयात की आवश्यकता को कम किया है।
कोकिंग कोल आयात में मामूली बढ़ोतरी जारी
हालांकि, इस्पात उद्योग में उपयोग होने वाले कोकिंग कोल के आयात में हल्की वृद्धि दर्ज हुई है। यह 5.93 मिलियन टन से बढ़कर 6.01 मिलियन टन हो गया — 1.34 प्रतिशत की बढ़ोतरी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत में उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल के सीमित भंडार और बढ़ते स्टील उत्पादन के कारण इस श्रेणी में आयात अभी भी अनिवार्य बना हुआ है। उर्तन खदान के चालू होने से दीर्घकालिक रूप से इस निर्भरता में कमी आने की उम्मीद है।