क्या दिसंबर में कोयला उत्पादन 5.75 प्रतिशत बढ़ा और प्रेषण में उछाल आया?
सारांश
Key Takeaways
- उत्पादन में 5.75 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि
- प्रेषण में उछाल
- परिचालन दक्षता में सुधार
- रणनीतिक नीतियों का योगदान
- 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सरकार ने शुक्रवार को बताया कि कैप्टिव और कमर्शियल खदानों से कोयले का उत्पादन दिसंबर में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ देखा गया है। इस दौरान प्रेषण में भी एक सकारात्मक उछाल दर्ज किया गया है।
इस अवधि में उत्पादन 19.48 मिलियन टन (एमटी) रहा, जबकि इसी माह के दौरान कोयले का प्रेषण 18.02 मिलियन टन (एमटी) रहा। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में उत्पादन में यह 5.75 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्शाता है।
वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में कैप्टिव और कमर्शियल खदानों से कुल कोयले का उत्पादन 54.14 मिलियन टन (एमटी) तक पहुंच गया, जबकि प्रेषण 50.61 मिलियन टन (एमटी) रहा। इस तिमाही में उत्पादन में 5.35 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि देखी गई, जो इस क्षेत्र में निरंतर परिचालन गति को दर्शाती है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दिसंबर तक, कोयला क्षेत्र ने समग्र रूप से मजबूत प्रदर्शन किया है, जिसमें कोयला उत्पादन में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 9.72 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि और प्रेषण में 6.98 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
कोयला मंत्रालय ने कहा कि यह सकारात्मक प्रवृत्ति परिचालन दक्षता में सुधार और पूरे क्षेत्र में खनन क्षमता के अधिक प्रभावी उपयोग को दर्शाती है।
मंत्रालय इस क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन का श्रेय कई रणनीतिक नीतिगत उपायों, कड़ी निगरानी और हितधारकों को निरंतर समर्थन को देता है। इन प्रयासों ने परिचालन संबंधी स्वीकृतियों में तेजी लाने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे कोयला उत्पादन और आपूर्ति में वृद्धि हुई है।
सरकार ने कहा कि कोयला मंत्रालय कैप्टिव और कमर्शियल कोयला खनन के लिए एक स्थिर और प्रदर्शन-उन्मुख वातावरण बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। निरंतर नीतिगत सुविधा, गहन प्रदर्शन निगरानी और हितधारकों के साथ समन्वित जुड़ाव के माध्यम से, मंत्रालय विश्वसनीय कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करने, प्रमुख क्षेत्रों में निर्बाध संचालन का समर्थन करने और देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का लक्ष्य रखता है, जिससे वर्ष 2047 तक विकसित भारत के दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्य में योगदान दिया जा सके।