उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 18 सितंबर को मुंबई, लोनावला और पुणे दौरे पर, लालबागचा राजा के करेंगे दर्शन
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 18 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को महाराष्ट्र के तीन प्रमुख शहरों — मुंबई, लोनावला और पुणे — का एक दिवसीय दौरा करेंगे, जिसमें धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रम शामिल हैं। इस यात्रा की शुरुआत मुंबई में प्रतिष्ठित लालबागचा राजा के दर्शन से होगी, जो गणेश उत्सव के दौरान देशभर में श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
मुंबई: लालबागचा राजा के दर्शन
शुक्रवार सुबह उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन मुंबई में लालबागचा राजा के दर्शन करेंगे। यह गणपति प्रतिष्ठान देश के सबसे लोकप्रिय और ऐतिहासिक गणेश मंडलों में से एक है और गणेश उत्सव के दौरान यहाँ लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं। किसी उच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की यह यात्रा सांस्कृतिक एकता और धार्मिक सद्भावना का प्रतीक मानी जा रही है।
लोनावला: कैवल्यधाम का प्लेटिनम जुबली समारोह
शुक्रवार दोपहर उपराष्ट्रपति लोनावला स्थित कैवल्यधाम पहुँचेंगे और गोर्धनदास सेकसरिया कॉलेज ऑफ योग एंड कल्चरल सिंथेसिस के प्लेटिनम जुबली समारोह में भाग लेंगे। यह संस्था भारत में योग शिक्षा और सांस्कृतिक समन्वय के क्षेत्र में अग्रणी रही है और इस महत्वपूर्ण वर्षगाँठ पर उपराष्ट्रपति की उपस्थिति संस्था के योगदान को राष्ट्रीय मान्यता देती है।
पुणे: पुणे फेस्टिवल के 38वें संस्करण का उद्घाटन
शुक्रवार शाम उपराष्ट्रपति पुणे के नेहरू स्टेडियम स्थित श्री गणेश कला क्रीड़ा रंगमंच पर पुणे फेस्टिवल के 38वें संस्करण में शामिल होंगे। पुणे फेस्टिवल महाराष्ट्र की कला, संस्कृति और परंपराओं का उत्सव है और इसके इस बार के आयोजन को उपराष्ट्रपति की उपस्थिति विशेष महत्व देती है।
हैदराबाद मुक्ति दिवस पर दिया ऐतिहासिक संदेश
इससे एक दिन पहले, गुरुवार 17 सितंबर को, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने सिकंदराबाद के परेड ग्राउंड में आयोजित 79वें हैदराबाद मुक्ति दिवस समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि 17 सितंबर 1948 का दिन स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक निर्णायक अध्याय के समापन का प्रतीक है, जब 'ऑपरेशन पोलो' के बाद तत्कालीन हैदराबाद राज्य का भारतीय संघ में विलय हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि हैदराबाद मुक्ति दिवस केवल एक ऐतिहासिक तारीख को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की यात्रा और उन मूल्यों की याद दिलाता है जो भारत को एकजुट रखते हैं।
उपराष्ट्रपति ने सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि पहले गृह मंत्री के रूप में उन पर सैकड़ों रियासतों को एक संघ में एकीकृत करने की असाधारण जिम्मेदारी थी। उन्होंने महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और सरदार पटेल को आज़ादी और एकीकरण में उनकी भूमिका के लिए श्रेय दिया। साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
आम नागरिकों के संघर्ष को श्रद्धांजलि
राधाकृष्णन ने हैदराबाद संघर्ष में हिस्सा लेने वाले छात्रों, बुद्धिजीवियों, किसानों और आम नागरिकों के बलिदान को याद किया। उन्होंने रामजी गोंड, तुर्रेबाज खान और कोमाराम भीम को श्रद्धांजलि दी। उनके शब्दों में, 'इतिहास सिर्फ सरकारी दफ्तरों में या मशहूर राजनेताओं द्वारा नहीं बनता, बल्कि उन आम नागरिकों द्वारा भी बनता है जो अन्याय को अपनी किस्मत मानने से इनकार कर देते हैं।' उन्होंने यह भी जोर दिया कि राष्ट्रीय एकता को भूगोल नहीं, बल्कि समान अधिकारों, समान सम्मान और समान अवसरों से मजबूत किया जाता है।
उपराष्ट्रपति का यह महाराष्ट्र दौरा और हैदराबाद में दिया गया संदेश राष्ट्रीय एकता के व्यापक विमर्श में एक और कड़ी जोड़ता है — ऐसे समय में जब देश इतिहास के पुनर्मूल्यांकन और सांस्कृतिक पहचान को लेकर गहरी बहस के दौर में है।