गणेश चतुर्थी: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने महाराष्ट्र सदन और पीयूष गोयल के आवास पर लिया बप्पा का आशीर्वाद
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर नई दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन में गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना की और देशवासियों के सुख, समृद्धि व उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना की। इसके पश्चात वे केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के नई दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित गणेशोत्सव समारोह में भी सहभागी हुए और गणपति बप्पा का आशीर्वाद प्राप्त किया।
उपराष्ट्रपति का संदेश
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने इस अवसर पर कहा कि गणेश चतुर्थी का यह पर्व भक्ति, आपसी स्नेह और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने भगवान गणेश से समस्त नागरिकों को ज्ञान, खुशहाली, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करने की प्रार्थना की। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में गणेशोत्सव का उत्साह चरम पर है।
देशभर में गणेशोत्सव की धूम
विशेष रूप से महाराष्ट्र में श्रद्धालु अपार उत्साह के साथ भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। घरों और सार्वजनिक पंडालों में आकर्षक सजावट, रोशनी, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालु भगवान गणेश को फूल, मिठाइयाँ और पारंपरिक प्रसाद अर्पित कर उनके आशीर्वाद की कामना कर रहे हैं।
मुंबई में लालबागचा राजा, गणेश गली, तेजूकाया मंडल, जीएसबी सेवा मंडल, अंधेरीचा राजा और अन्य प्रमुख पंडालों को भव्य रोशनी और अनूठी सजावट से सजाया गया है। लालबागचा राजा के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं, जबकि प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर को भी विशेष रूप से सजाया गया है।
पर्व का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और शुभ कार्यों का देवता माना जाता है। किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले उनकी पूजा का विधान है। दस दिनों तक चलने वाले इस उत्सव का समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर गणपति विसर्जन के साथ होगा।
सार्वजनिक गणेशोत्सव का ऐतिहासिक संदर्भ
गणेशोत्सव के सार्वजनिक स्वरूप की शुरुआत को लेकर इतिहास में अलग-अलग दावे किए जाते हैं। एक मान्यता के अनुसार स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने वर्ष 1893 में मुंबई के गिरगांव में सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य जनसमुदाय को एकजुट करना और स्वतंत्रता आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाना था। वहीं, भाऊसाहेब रंगारी गणपति ट्रस्ट का दावा है कि पुणे में सार्वजनिक गणेशोत्सव की नींव वर्ष 1892 में भाऊसाहेब रंगारी ने रखी थी।
आगे क्या
गौरतलब है कि यह दस दिवसीय उत्सव 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन के साथ समाप्त होगा। उपराष्ट्रपति की इस यात्रा ने राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक भागीदारी के प्रतीक के रूप में पर्व की महत्ता को और अधिक रेखांकित किया है।