एशियन गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट अनुष अगरवाला का EFI पर निशाना, 2026 टीम से बाहर किए जाने पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
एशियन गेम्स 2022 के गोल्ड मेडलिस्ट और ड्रेसेज राइडर अनुष अगरवाला ने इक्वेस्ट्रियन फेडरेशन ऑफ इंडिया (EFI) की चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। 25 वर्षीय इस खिलाड़ी को एशियन गेम्स 2026 की भारतीय ड्रेसेज टीम में जगह नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा और विरोध दर्ज कराया। यह ऐसे समय में हुआ है जब भारत 2026 एशियन गेम्स में अपना टीम टाइटल बचाने की कोशिश में है।
मुख्य घटनाक्रम
अगरवाला एशियन गेम्स 2022 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय ड्रेसेज टीम के अहम सदस्य थे और उन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल भी जीता था। उन्हें शुरुआत में 2026 एशियन गेम्स की ड्रेसेज टीम के लिए 'रिजर्व' खिलाड़ी के रूप में नामित किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें बाहर कर दिया गया। इस फैसले ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर विवाद खड़ा कर दिया।
अगरवाला ने इंस्टाग्राम पर लिखा, 'एशियन गेम्स 2026 का सपना आधिकारिक तौर पर खत्म हो गया है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पीड़ा हार से नहीं, बल्कि मुकाबला करने का मौका न मिलने से है।
अगरवाला की प्रतिक्रिया और आरोप
अगरवाला ने अपने पोस्ट में लिखा, 'शब्दों में उस दर्द और खालीपन को बयां नहीं किया जा सकता जो मैं अभी महसूस कर रहा हूं। मैंने हमेशा बहुत गर्व के साथ भारत का प्रतिनिधित्व किया है और हमेशा करता रहूंगा, लेकिन इस बार मुझे बहुत दुख हुआ है, इसलिए नहीं कि मैं हार गया, बल्कि इसलिए कि मुझे कभी मुकाबला करने का मौका ही नहीं दिया गया।'
उन्होंने दावा किया कि उन्होंने यह मामला EFI, इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) और खेल मंत्रालय के समक्ष रखा, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा, 'नतीजे को स्वीकार करने का मतलब यह नहीं है कि मैं यह भी मान लूं कि प्रक्रिया सही थी।'
अदालत का फैसला
दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि खिलाड़ियों का चयन तय नियमों के अनुसार ही किया गया था। अगरवाला ने चयन मानदंडों की व्याख्या को चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने EFI के रुख को सही ठहराया।
पारदर्शिता की मांग
अगरवाला ने अपने पोस्ट के माध्यम से एथलीट चयन प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने लिखा, 'अगर भारत सच में एक स्पोर्ट्स नेशन बनना चाहता है, तो एथलीट्स को ऐसा सिस्टम मिलना चाहिए जो निष्पक्ष और पारदर्शी हो और हर मौके के पीछे की सालों की मेहनत का सम्मान करे।'
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी भारतीय खिलाड़ी ने राष्ट्रीय खेल महासंघ की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हों। खेल में सुधार और एथलीट अधिकारों की माँग एक व्यापक राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बनती जा रही है। अगरवाला का यह बयान उन तमाम खिलाड़ियों की आवाज़ बन सकता है जो व्यवस्थागत पारदर्शिता के अभाव में अवसर से वंचित रह जाते हैं।