यूसीसी पर चिराग पासवान ने भाजपा से अलग राह ली: पहले मसौदा सार्वजनिक हो, फिर व्यापक विमर्श
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने 14 सितंबर 2026 को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) से अलग रुख अपनाते हुए माँग की कि इसका मसौदा पहले सार्वजनिक किया जाए और उसके बाद व्यापक परामर्श हो। यह बयान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उस घोषणा के ठीक एक दिन बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 2029 से पहले भाजपा नेतृत्व वाले 21 राज्यों में यूसीसी लागू किया जाएगा।
एक्स पर क्या लिखा चिराग ने
पासवान ने सोमवार को अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा कि भारत का सामाजिक ताना-बाना बेहद विविधतापूर्ण है। उन्होंने कहा, 'अलग-अलग समुदायों की अपनी परंपराएँ, रीति-रिवाज और सामाजिक प्रथाएँ हैं और संविधान भी इस विविधता को मान्यता देता है।' उन्होंने संविधान की पाँचवीं और छठी अनुसूची तथा अनुच्छेद 371ए और 371जी का हवाला देते हुए कहा कि ये प्रावधान देश की सांस्कृतिक विविधता की रक्षा करते हैं।
एलजेपी (रामविलास) का आधिकारिक रुख
पासवान ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी 'समानता और विविधता दोनों के प्रति प्रतिबद्ध' है। उन्होंने कहा, 'ड्राफ्ट सार्वजनिक हो, सभी हितधारकों के हितों का आकलन हो, व्यापक चर्चा हो और उसके बाद समीक्षा करके पार्टी अपना पक्ष रखेगी।' यह कथन इस बात का संकेत है कि एलजेपी (रामविलास) यूसीसी के सिद्धांत का विरोध नहीं कर रही, लेकिन प्रक्रिया में पारदर्शिता की माँग ज़रूर कर रही है।
एनडीए के भीतर मतभेद उभरे
यह ऐसे समय में आया है जब एनडीए के भीतर यूसीसी को लेकर विभिन्न स्वर उभर रहे हैं। झारखंड सरकार के मंत्री संजय प्रसाद यादव ने भी पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में सावधानी का रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'झारखंड सरकार इस मामले के सभी पहलुओं पर नज़र रख रही है। राजनीति में किसी निष्कर्ष पर पहुँचने की जल्दबाज़ी नहीं होनी चाहिए। हर पहलू की गंभीरता से समीक्षा करने के बाद ही आगे कोई निर्णय लिया जाएगा।'
अमित शाह की घोषणा और उसका संदर्भ
गौरतलब है कि गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को एलान किया था कि भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए की सरकार वाले 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू किया जाएगा। यह घोषणा राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी हलचल पैदा कर गई, और एनडीए के सहयोगी दलों की प्रतिक्रियाएँ आने लगीं। इससे पहले उत्तराखंड में यूसीसी पहले ही लागू किया जा चुका है, जो इसे लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना था।
आगे क्या होगा
चिराग पासवान के इस बयान के बाद भाजपा और उसके गठबंधन सहयोगियों के बीच यूसीसी पर सार्वजनिक चर्चा तेज़ होने की संभावना है। यदि मसौदा सार्वजनिक किया जाता है, तो अनुसूचित जनजातियों को दी गई विशेष संवैधानिक छूटों पर बहस केंद्रीय मुद्दा बन सकती है। एलजेपी (रामविलास) का रुख यह भी दर्शाता है कि 2024 के बाद एनडीए के भीतर सहयोगी दल अधिक मुखर होकर अपनी शर्तें सामने रख रहे हैं।