15 सितंबर 2026
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यूसीसी पर चिराग पासवान ने भाजपा से अलग राह ली: पहले मसौदा सार्वजनिक हो, फिर व्यापक विमर्श

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यूसीसी पर चिराग पासवान ने भाजपा से अलग राह ली: पहले मसौदा सार्वजनिक हो, फिर व्यापक विमर्श

सारांश

अमित शाह के यूसीसी वाले बयान के ठीक अगले दिन चिराग पासवान ने सार्वजनिक मसौदे और व्यापक विमर्श की माँग रखकर एनडीए के भीतर एक अलग आवाज़ बुलंद की। यह संकेत है कि सहयोगी दल भाजपा के सामाजिक-सांस्कृतिक एजेंडे पर बिना शर्त समर्थन की जगह अपनी शर्तें सामने रखने लगे हैं।

मुख्य बातें

चिराग पासवान ने 14 सितंबर 2026 को यूसीसी का मसौदा पहले सार्वजनिक करने और व्यापक परामर्श की माँग की।
यह बयान अमित शाह की उस घोषणा के एक दिन बाद आया जिसमें 2029 से पहले 21 भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी लागू करने की बात कही गई थी।
एलजेपी (रामविलास) ने कहा — पार्टी समानता और विविधता दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है; मसौदे के आकलन के बाद ही अंतिम रुख तय होगा।
पासवान ने संविधान की पाँचवीं-छठी अनुसूची और अनुच्छेद 371ए व 371जी का हवाला देते हुए आदिवासी छूटों की रक्षा की ज़रूरत जताई।
झारखंड के मंत्री संजय प्रसाद यादव ने भी यूसीसी पर जल्दबाज़ी से बचने की बात कही।

केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने 14 सितंबर 2026 को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) से अलग रुख अपनाते हुए माँग की कि इसका मसौदा पहले सार्वजनिक किया जाए और उसके बाद व्यापक परामर्श हो। यह बयान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उस घोषणा के ठीक एक दिन बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 2029 से पहले भाजपा नेतृत्व वाले 21 राज्यों में यूसीसी लागू किया जाएगा।

एक्स पर क्या लिखा चिराग ने

पासवान ने सोमवार को अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा कि भारत का सामाजिक ताना-बाना बेहद विविधतापूर्ण है। उन्होंने कहा, 'अलग-अलग समुदायों की अपनी परंपराएँ, रीति-रिवाज और सामाजिक प्रथाएँ हैं और संविधान भी इस विविधता को मान्यता देता है।' उन्होंने संविधान की पाँचवीं और छठी अनुसूची तथा अनुच्छेद 371ए और 371जी का हवाला देते हुए कहा कि ये प्रावधान देश की सांस्कृतिक विविधता की रक्षा करते हैं।

एलजेपी (रामविलास) का आधिकारिक रुख

पासवान ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी 'समानता और विविधता दोनों के प्रति प्रतिबद्ध' है। उन्होंने कहा, 'ड्राफ्ट सार्वजनिक हो, सभी हितधारकों के हितों का आकलन हो, व्यापक चर्चा हो और उसके बाद समीक्षा करके पार्टी अपना पक्ष रखेगी।' यह कथन इस बात का संकेत है कि एलजेपी (रामविलास) यूसीसी के सिद्धांत का विरोध नहीं कर रही, लेकिन प्रक्रिया में पारदर्शिता की माँग ज़रूर कर रही है।

एनडीए के भीतर मतभेद उभरे

यह ऐसे समय में आया है जब एनडीए के भीतर यूसीसी को लेकर विभिन्न स्वर उभर रहे हैं। झारखंड सरकार के मंत्री संजय प्रसाद यादव ने भी पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में सावधानी का रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'झारखंड सरकार इस मामले के सभी पहलुओं पर नज़र रख रही है। राजनीति में किसी निष्कर्ष पर पहुँचने की जल्दबाज़ी नहीं होनी चाहिए। हर पहलू की गंभीरता से समीक्षा करने के बाद ही आगे कोई निर्णय लिया जाएगा।'

अमित शाह की घोषणा और उसका संदर्भ

गौरतलब है कि गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को एलान किया था कि भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए की सरकार वाले 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू किया जाएगा। यह घोषणा राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी हलचल पैदा कर गई, और एनडीए के सहयोगी दलों की प्रतिक्रियाएँ आने लगीं। इससे पहले उत्तराखंड में यूसीसी पहले ही लागू किया जा चुका है, जो इसे लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना था।

आगे क्या होगा

चिराग पासवान के इस बयान के बाद भाजपा और उसके गठबंधन सहयोगियों के बीच यूसीसी पर सार्वजनिक चर्चा तेज़ होने की संभावना है। यदि मसौदा सार्वजनिक किया जाता है, तो अनुसूचित जनजातियों को दी गई विशेष संवैधानिक छूटों पर बहस केंद्रीय मुद्दा बन सकती है। एलजेपी (रामविलास) का रुख यह भी दर्शाता है कि 2024 के बाद एनडीए के भीतर सहयोगी दल अधिक मुखर होकर अपनी शर्तें सामने रख रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे भाजपा अभी पूरी तरह नाप नहीं पाई है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चिराग पासवान ने यूसीसी पर क्या कहा?
चिराग पासवान ने माँग की कि यूसीसी का मसौदा पहले सार्वजनिक किया जाए, सभी हितधारकों पर इसके प्रभाव का आकलन हो और व्यापक विमर्श के बाद ही उनकी पार्टी अपना अंतिम रुख स्पष्ट करेगी। उन्होंने भारत की सामाजिक विविधता और संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए जल्दबाज़ी से बचने की बात कही।
अमित शाह ने यूसीसी को लेकर क्या घोषणा की थी?
गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा था कि भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए की सरकार वाले 21 राज्यों में 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी। यह घोषणा राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए के भीतर नई बहस का कारण बन गई।
एनडीए के भीतर यूसीसी पर मतभेद क्यों उभर रहे हैं?
एलजेपी (रामविलास) जैसे सहयोगी दल आदिवासी और दलित समुदायों के प्रति संवेदनशील हैं, जिनके लिए संविधान में विशेष प्रावधान मौजूद हैं। ये दल यूसीसी के सिद्धांत का विरोध नहीं कर रहे, लेकिन बिना मसौदे के खुला समर्थन देना उनके लिए राजनीतिक रूप से जोखिम भरा है।
झारखंड सरकार का यूसीसी पर क्या रुख है?
झारखंड सरकार के मंत्री संजय प्रसाद यादव ने पटना एयरपोर्ट पर कहा कि सरकार सभी पहलुओं पर नज़र रख रही है और किसी निष्कर्ष पर पहुँचने की जल्दबाज़ी नहीं की जाएगी। उन्होंने गहन समीक्षा के बाद ही निर्णय लेने की बात कही।
यूसीसी और आदिवासी संवैधानिक प्रावधानों का क्या संबंध है?
चिराग पासवान ने संविधान की पाँचवीं और छठी अनुसूची तथा अनुच्छेद 371ए और 371जी का हवाला दिया, जो आदिवासी समुदायों को उनकी परंपराओं और कानूनों के अनुसार जीने का अधिकार देते हैं। यूसीसी लागू होने पर इन विशेष प्रावधानों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर कई सहयोगी दल चिंतित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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