10 जुलाई 2026
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महाराष्ट्र में यूसीसी लागू करने की तैयारी: भाजपा ने की सराहना, कांग्रेस बोली — पहले जनता के सामने रखें ड्राफ्ट

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महाराष्ट्र में यूसीसी लागू करने की तैयारी: भाजपा ने की सराहना, कांग्रेस बोली — पहले जनता के सामने रखें ड्राफ्ट

सारांश

महाराष्ट्र में यूसीसी लागू करने की तैयारी पर सियासी बहस तेज हो गई है। भाजपा इसे महिला सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कदम बता रही है, तो कांग्रेस के हुसैन दलवाई सिद्धांत से सहमत होते हुए भी पारदर्शिता की माँग कर रहे हैं — यानी असली लड़ाई यूसीसी के विरोध की नहीं, उसके मसौदे की है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में कदम उठाए, जिस पर 10 जुलाई को राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ आईं।
भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने फैसले को महिला सशक्तिकरण के लिए ज़रूरी बताया और उत्तराखंड, असम, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ का उदाहरण दिया।
भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि यूसीसी से विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं को लाभ मिलेगा।
JDU प्रवक्ता नीरज कुमार ने सामाजिक सद्भाव बनाए रखते हुए सभी को भरोसे में लेने की ज़रूरत पर बल दिया।
कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने यूसीसी के सिद्धांत का समर्थन किया, लेकिन माँग की कि ड्राफ्ट पहले जनता के सामने रखा जाए ताकि सुझाव लिए जा सकें।

महाराष्ट्र सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने 10 जुलाई को राज्य सरकार के इस फैसले का खुलकर स्वागत किया, जबकि विपक्षी खेमे से माँग उठी कि यूसीसी का मसौदा पहले जनता के सामने रखा जाए।

भाजपा का रुख: महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, 'जहाँ-जहाँ भाजपा की सरकारें हैं, वहाँ-वहाँ महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता के लिए यूसीसी लागू करने के उपयुक्त कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उन नेताओं में से एक हैं जो महिला सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं।'

पूनावाला ने यह भी कहा कि यूसीसी भाजपा की प्रतिबद्धता है, यह संविधान में निहित है और उच्च न्यायालयों तथा सर्वोच्च न्यायालय ने इसे मान्यता दी है। उन्होंने रेखांकित किया कि महाराष्ट्र से पहले उत्तराखंड, असम, गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी भाजपा सरकारों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं।

विपक्ष पर निशाना: पूनावाला ने कांग्रेस को घेरा

पूनावाला ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा, 'जिस कांग्रेस पार्टी ने संविधान सभा में यूसीसी की वकालत की थी और गोवा में इसे लागू किया था, आज वही कांग्रेस और उसका इकोसिस्टम वोटबैंक को ऊपर रखकर इसका विरोध कर रहा है। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की पार्टी भी इसका विरोध कर रही है।' उन्होंने इन विरोधी दलों पर महिला-विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला स्वागत योग्य है और इससे राज्य की महिलाओं और बच्चों को लाभ मिलेगा। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि यूसीसी से मुस्लिम महिलाओं को सबसे अधिक फायदा होगा।

NDA सहयोगी जदयू का संतुलित रुख

जनता दल (यूनाइटेड) — JDU के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि समान नागरिक संहिता पर उनकी पार्टी का रुख स्पष्ट है — समाज के किसी भी वर्ग को ठेस नहीं पहुँचनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'सभी का सम्मान करते हुए उन्हें भरोसे में लिया जाना चाहिए, क्योंकि सामाजिक सद्भाव ही विकास की नींव है।' साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को अपने फैसले लेने का अधिकार है।

विपक्षी खेमे से भी समर्थन, लेकिन पारदर्शिता की माँग

उल्लेखनीय है कि एनडीए से बाहर भी कुछ नेताओं ने यूसीसी के सिद्धांत का समर्थन किया। कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने कहा, 'यूसीसी को लेकर मेरा बिल्कुल भी विरोध नहीं है। मैंने शुरू से कहा है कि एक से अधिक शादी करना बिल्कुल गलत है — यह औरतों के साथ नाइंसाफी है। महिलाओं को मान-सम्मान दिया जाना चाहिए।'

हालाँकि, दलवाई ने यह भी माँग की कि यूसीसी का मसौदा पहले जनता के सामने रखा जाए, ताकि आम लोग उसे पढ़कर अपने सुझाव दे सकें। यह माँग यूसीसी की प्रक्रिया में जन-भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण आवाज़ है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड पहले ही यूसीसी लागू कर चुका है और केंद्र सरकार भी राष्ट्रीय स्तर पर इस पर विचार कर रही है। महाराष्ट्र में यूसीसी का मसौदा तैयार होने और उसे सार्वजनिक करने की समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि मसौदे को जनता के सामने रखना न केवल पारदर्शिता के लिहाज़ से ज़रूरी है, बल्कि इससे व्यापक सामाजिक सहमति बनाने में भी मदद मिलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 'कैसे लागू हो' पर खिंच रही है। कांग्रेस के हुसैन दलवाई का सिद्धांत से सहमत होना और केवल प्रक्रिया पर सवाल उठाना बताता है कि विपक्ष का एकमुश्त विरोध कमज़ोर पड़ रहा है। असली परीक्षा यह है कि सरकार मसौदे को कितनी जल्दी और किस रूप में सार्वजनिक करती है — क्योंकि बिना जन-परामर्श के लागू किया गया यूसीसी, उत्तराखंड के अनुभव की तरह, कागज़ों पर कानून और ज़मीन पर सवाल बनकर रह सकता है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) क्या है और इसे क्यों लागू किया जा रहा है?
समान नागरिक संहिता एक ऐसा कानूनी ढाँचा है जो विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करता है, चाहे उनका धर्म कोई भी हो। महाराष्ट्र सरकार इसे महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता के लिए ज़रूरी बता रही है।
भाजपा ने महाराष्ट्र में यूसीसी के फैसले का समर्थन क्यों किया?
भाजपा नेताओं ने इसे पार्टी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता बताया और कहा कि यूसीसी संविधान में निहित है तथा न्यायालयों ने इसे मान्यता दी है। पार्टी ने उत्तराखंड, असम, गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पहले उठाए गए कदमों का हवाला देते हुए इसे महिला-हितैषी नीति बताया।
कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने यूसीसी ड्राफ्ट को सार्वजनिक करने की माँग क्यों की?
दलवाई ने यूसीसी के सिद्धांत का समर्थन करते हुए कहा कि मसौदा जनता के सामने आना चाहिए ताकि आम लोग उसे पढ़कर अपने सुझाव दे सकें। उनका मानना है कि पारदर्शी प्रक्रिया से व्यापक सामाजिक सहमति बनेगी।
जदयू का यूसीसी पर क्या रुख है?
JDU के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि समाज के किसी भी वर्ग को ठेस नहीं पहुँचनी चाहिए और सभी को भरोसे में लेकर सामाजिक सद्भाव बनाए रखना ज़रूरी है। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार के फैसले लेने के अधिकार को भी स्वीकार किया।
भारत के किन राज्यों में पहले से यूसीसी लागू है या इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है?
उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहाँ यूसीसी लागू हो चुकी है। इसके अलावा असम, गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी भाजपा सरकारों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं। गोवा में ऐतिहासिक रूप से पहले से एक समान नागरिक संहिता लागू है।
राष्ट्र प्रेस
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