महाराष्ट्र में यूसीसी लागू करने की तैयारी: भाजपा ने की सराहना, कांग्रेस बोली — पहले जनता के सामने रखें ड्राफ्ट
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने 10 जुलाई को राज्य सरकार के इस फैसले का खुलकर स्वागत किया, जबकि विपक्षी खेमे से माँग उठी कि यूसीसी का मसौदा पहले जनता के सामने रखा जाए।
भाजपा का रुख: महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, 'जहाँ-जहाँ भाजपा की सरकारें हैं, वहाँ-वहाँ महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता के लिए यूसीसी लागू करने के उपयुक्त कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उन नेताओं में से एक हैं जो महिला सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं।'
पूनावाला ने यह भी कहा कि यूसीसी भाजपा की प्रतिबद्धता है, यह संविधान में निहित है और उच्च न्यायालयों तथा सर्वोच्च न्यायालय ने इसे मान्यता दी है। उन्होंने रेखांकित किया कि महाराष्ट्र से पहले उत्तराखंड, असम, गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी भाजपा सरकारों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं।
विपक्ष पर निशाना: पूनावाला ने कांग्रेस को घेरा
पूनावाला ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा, 'जिस कांग्रेस पार्टी ने संविधान सभा में यूसीसी की वकालत की थी और गोवा में इसे लागू किया था, आज वही कांग्रेस और उसका इकोसिस्टम वोटबैंक को ऊपर रखकर इसका विरोध कर रहा है। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की पार्टी भी इसका विरोध कर रही है।' उन्होंने इन विरोधी दलों पर महिला-विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला स्वागत योग्य है और इससे राज्य की महिलाओं और बच्चों को लाभ मिलेगा। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि यूसीसी से मुस्लिम महिलाओं को सबसे अधिक फायदा होगा।
NDA सहयोगी जदयू का संतुलित रुख
जनता दल (यूनाइटेड) — JDU के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि समान नागरिक संहिता पर उनकी पार्टी का रुख स्पष्ट है — समाज के किसी भी वर्ग को ठेस नहीं पहुँचनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'सभी का सम्मान करते हुए उन्हें भरोसे में लिया जाना चाहिए, क्योंकि सामाजिक सद्भाव ही विकास की नींव है।' साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को अपने फैसले लेने का अधिकार है।
विपक्षी खेमे से भी समर्थन, लेकिन पारदर्शिता की माँग
उल्लेखनीय है कि एनडीए से बाहर भी कुछ नेताओं ने यूसीसी के सिद्धांत का समर्थन किया। कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने कहा, 'यूसीसी को लेकर मेरा बिल्कुल भी विरोध नहीं है। मैंने शुरू से कहा है कि एक से अधिक शादी करना बिल्कुल गलत है — यह औरतों के साथ नाइंसाफी है। महिलाओं को मान-सम्मान दिया जाना चाहिए।'
हालाँकि, दलवाई ने यह भी माँग की कि यूसीसी का मसौदा पहले जनता के सामने रखा जाए, ताकि आम लोग उसे पढ़कर अपने सुझाव दे सकें। यह माँग यूसीसी की प्रक्रिया में जन-भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण आवाज़ है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड पहले ही यूसीसी लागू कर चुका है और केंद्र सरकार भी राष्ट्रीय स्तर पर इस पर विचार कर रही है। महाराष्ट्र में यूसीसी का मसौदा तैयार होने और उसे सार्वजनिक करने की समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि मसौदे को जनता के सामने रखना न केवल पारदर्शिता के लिहाज़ से ज़रूरी है, बल्कि इससे व्यापक सामाजिक सहमति बनाने में भी मदद मिलेगी।