महाराष्ट्र में यूसीसी समिति गठन पर महायुति का समर्थन, नितेश राणे बोले — अनुच्छेद 44 के तहत होगा काम
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) का मसौदा तैयार करने के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन किया है, जिसके बाद महायुति गठबंधन के नेताओं ने इस कदम का खुलकर स्वागत किया है। महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे और शिवसेना विधायक अब्दुल सत्तार ने 9 जुलाई को कहा कि राज्य सरकार संविधान की मूल भावना के अनुरूप आगे बढ़ रही है और सभी निर्णय संवैधानिक दायरे में ही लिए जाएंगे।
नितेश राणे का रुख — अनुच्छेद 44 और संविधान की सर्वोच्चता
मंत्री नितेश राणे ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता लागू करने का स्पष्ट उल्लेख है और महायुति सरकार उसी संवैधानिक दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान के अनुसार ही देश चलेगा और इसी आधार पर सरकार निर्णय ले रही है।
राणे ने यह भी कहा कि जो लोग भारत में शरिया कानून लागू करने की बात करते हैं, उन्हें समझना चाहिए कि यहाँ केवल संविधान का शासन चलेगा। उनके अनुसार, महायुति सरकार की यह पहल संविधान और उसकी मूल भावना के पूरी तरह अनुरूप है।
अब्दुल सत्तार की सतर्क सहमति — धार्मिक भावनाओं का भी ध्यान रखें
शिवसेना विधायक अब्दुल सत्तार ने सात सदस्यीय समिति के गठन का स्वागत करते हुए कहा कि देश का संचालन संविधान की चौखट में रहकर ही होना चाहिए। हालाँकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि कानून बनाते समय यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि किसी भी निर्णय से धार्मिक भावनाएँ प्रभावित न हों।
सत्तार ने कहा कि यदि कोई विषय राजनीतिक दृष्टि से आगे बढ़ाया जा रहा हो, तो उस पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। डॉ. आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान की मर्यादा में रहकर ही कोई भी निर्णय लिया जाना चाहिए — यह उनका स्पष्ट संदेश था।
मिसिंग लिंक विवाद और विपक्ष पर पलटवार
महाराष्ट्र में मिसिंग लिंक परियोजना को लेकर उठे विवाद पर सत्तार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा में परियोजना से जुड़े तथ्यों को विस्तार से रखा और स्पष्ट किया कि पूर्व सरकार के समय जिन फाइलों पर विस्तृत टिप्पणियाँ की गई थीं, बाद में उन्हीं परियोजनाओं को मंजूरी भी दी गई। उन्होंने कहा कि यह देश की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में से एक है और कुछ तकनीकी कारणों से हुई घटना को विपक्ष ने राजनीतिक रंग देने की कोशिश की।
शिंदे-पवार मुलाकात पर सियासी अटकलें खारिज
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शरद पवार की हालिया मुलाकात को नई राजनीतिक संभावनाओं से जोड़कर देखे जाने के सवाल पर सत्तार ने इन अटकलों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि शरद पवार एक बैठक के सिलसिले में आए थे और उसी दौरान उन्होंने शिष्टाचार भेंट के तौर पर शिंदे से मुलाकात की।
जब उनसे यह पूछा गया कि इन दोनों वरिष्ठ नेताओं की रणनीति का अनुमान उनके करीबियों को भी नहीं होता, तो सत्तार ने हल्के अंदाज़ में कहा कि यदि उनके साथ रहने वालों को भी पता नहीं चलता, तो उन्हें कैसे पता चल सकता है। एनडीए में पवार के शामिल होने की अटकलों पर उन्होंने कहा कि ऐसे किसी निर्णय पर टिप्पणी करना वरिष्ठ नेताओं का अधिकार है।
वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्य के मुद्दे पर संतुलित जवाब
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्य को शामिल किए जाने के मुद्दे पर सत्तार ने कहा कि किसी भी धार्मिक संस्था में विभिन्न समुदायों की भागीदारी अपने आप में गलत नहीं है। हालाँकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वक्फ बोर्ड की स्थापना का मूल उद्देश्य वक्फ की गई संपत्तियों और ज़मीनों का उनके निर्धारित उद्देश्यों के अनुसार प्रबंधन करना था। सरकारों के वर्तमान निर्णयों और उनके पीछे की नीति का आकलन जनता स्वयं कर सकती है — यह कहकर उन्होंने सीधी आलोचना से परहेज किया। यूसीसी समिति की रिपोर्ट और उसके बाद की राजनीतिक प्रतिक्रिया महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले हफ्तों में एक अहम मोड़ साबित हो सकती है।