दिल्ली में मानसून से पहले DDA ने हटाई 57,000 मीट्रिक टन गाद, LG टीएस संधू की सीधी निगरानी
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने उपराज्यपाल टीएस संधू की प्रत्यक्ष निगरानी में मानसून-पूर्व नाला सफाई अभियान के तहत अब तक 57,000 मीट्रिक टन से अधिक गाद हटा दी है — जो पिछले वर्ष के 33,380 मीट्रिक टन की तुलना में 70 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी है। 9 जुलाई को एक अधिकारी ने बताया कि पूर्वी, दक्षिणी और उत्तरी क्षेत्रों में यह कार्य पूरा हो चुका है, जबकि नरेला, रोहिणी और द्वारका में काम अंतिम चरण में है।
मुख्य घटनाक्रम
DDA ने दिल्ली को छह क्षेत्रों — पूर्वी, दक्षिणी, उत्तरी, नरेला, रोहिणी और द्वारका — में विभाजित कर मिशन मोड में यह अभियान चलाया, ताकि योजना, निगरानी और समय-सीमा पर नियंत्रण रखा जा सके। अधिकारियों के अनुसार, कार्य की गति बढ़ाने के लिए जमीनी स्तर पर नियमित प्रगति-समीक्षा की गई।
LG की भूमिका और निर्देश
उपराज्यपाल टीएस संधू लगातार विभिन्न एजेंसियों की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं और स्वयं नाला सफाई कार्यों का निरीक्षण कर रहे हैं। उनके निर्देशों के अनुपालन में DDA ने जमीनी कार्य की रफ्तार बढ़ाई और प्रगति पर नज़र रखी, जिससे इस वर्ष की सफाई का पैमाना पिछले वर्षों से काफी आगे निकल गया।
बाढ़ प्रबंधन की व्यापक तैयारी
नाला सफाई के अतिरिक्त DDA ने एक केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष और सभी इंजीनियरिंग क्षेत्रों में अलग-अलग बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं। जलभराव की शिकायतों के त्वरित निपटान के लिए 24×7 हेल्पलाइन भी शुरू की जा रही है। संवेदनशील स्थानों पर मोबाइल पंपिंग यूनिट तैनात की गई हैं, ताकि बारिश का जमा पानी जल्द निकाला जा सके।
आम जनता पर असर
DDA के अनुसार, बड़े पैमाने पर की गई इस सफाई से नालों की जल-वहन क्षमता बढ़ेगी और बारिश के पानी की निकासी में सुधार होगा। इससे जलभराव की घटनाएँ कम होंगी और मानसून के दौरान यातायात अधिक सुचारु रहेगा। निकाली गई गाद का तत्काल निपटान और संवेदनशील इलाकों की निरंतर निगरानी शहर की समग्र तैयारी को और मज़बूत करती है।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में मानसून दस्तक दे चुका है और भारी वर्षा की संभावना बनी हुई है। गौरतलब है कि पिछले कई वर्षों में दिल्ली की जल निकासी व्यवस्था की खामियाँ बाढ़ और जलभराव की स्थिति में उजागर होती रही हैं। इस वर्ष की बेहतर तैयारी उन आलोचनाओं के जवाब के रूप में देखी जा रही है। अन्य सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय जारी रहेगा और संवेदनशील इलाकों पर विशेष नज़र रखी जाएगी।