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दिल्ली में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की मरम्मत: एलजी संधू ने मानसून से पहले तय की सख्त समयसीमा

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दिल्ली में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की मरम्मत: एलजी संधू ने मानसून से पहले तय की सख्त समयसीमा

सारांश

मानसून दस्तक देने से पहले दिल्ली के एलजी टी.एस. संधू ने DDA, MCD और NDMC को रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की मरम्मत के लिए सख्त समयसीमा दी। ऑडिट में 75 स्कूलों में बंद पड़ी प्रणालियाँ मिलीं; 'एहसास' मॉडल से सालाना 50 करोड़ लीटर जल संचयन का लक्ष्य।

मुख्य बातें

संधू ने 11 जून को DDA, MCD और NDMC को मानसून से पहले सभी रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम चालू करने के निर्देश दिए।
सरकारी स्कूलों और इमारतों में संरचनात्मक मरम्मत के लिए सख्त समयसीमा निर्धारित की गई।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 75 सीएम श्री स्कूलों में प्रणालियाँ पुनर्जीवित करने की घोषणा की; सालाना 50 करोड़ लीटर संचयन का लक्ष्य।
सरकार 2021 में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा स्वीकृत 'एहसास' मॉडल अपनाएगी — कम लागत, न्यूनतम रखरखाव।
ऑडिट में अधिकांश स्कूलों की प्रणालियाँ वर्षों से बंद , गड्ढे जाम और डिज़ाइन में खामियाँ पाई गईं।
अधिकारियों को सभी संरचनाओं की कुल क्षमता का व्यापक आकलन करने के निर्देश दिए गए।

दिल्ली के उपराज्यपाल टी.एस. संधू ने गुरुवार, 11 जून को राजधानी की सभी वर्षा जल संचयन (रेनवॉटर हार्वेस्टिंग) प्रणालियों को मानसून से पहले पूरी तरह कार्यशील बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने नागरिक एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर पाइपलाइन, गटर और भंडारण टैंकों की मरम्मत के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की।

एलजी की बैठक और निर्देश

उपराज्यपाल संधू ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली नगर निगम (MCD) और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "आज DDA, MCD और NDMC के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राजधानी में वर्षा जल संचयन की तैयारियों की समीक्षा की।"

संधू ने कहा, "संरचनात्मक मरम्मत में तेजी लाने और मानसून से पहले सभी वर्षा जल संचयन प्रणालियों को पूरी तरह कार्यशील बनाने के लिए स्पष्ट निर्देश और सख्त समयसीमा तय की गई है।" उन्होंने विशेष रूप से सरकारी स्कूलों और सरकारी इमारतों में स्थापित संरचनाओं पर ध्यान देने का आदेश दिया।

अधिकारियों को दिल्ली में स्थापित सभी वर्षा जल संचयन संरचनाओं की कुल क्षमता का व्यापक आकलन करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि भूजल पुनर्भरण और दीर्घकालिक जल संरक्षण के लिए ठोस आधार तैयार किया जा सके।

मुख्यमंत्री की 'एहसास' मॉडल पहल

इससे पहले दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की थी कि राजधानी के 75 सीएम श्री स्कूलों में पहले से मौजूद वर्षा जल संचयन प्रणालियों को पुनर्जीवित किया जाएगा। उनके अनुसार, इस पहल से प्रतिवर्ष लगभग 50 करोड़ लीटर वर्षा जल संचयन क्षमता विकसित होने की उम्मीद है।

सरकार इसके लिए 'एहसास' मॉडल अपनाएगी, जिसे वर्ष 2021 में दिल्ली जल बोर्ड ने स्वीकृत किया था। यह मॉडल कम लागत, कम जगह की आवश्यकता और लगभग शून्य रखरखाव के लिए जाना जाता है। इस प्रणाली के तहत छतों से एकत्रित वर्षा जल को फिल्टर कर भंडारण इकाइयों और बोरवेल से जोड़ा जाएगा, जिससे सूखे बोरवेल भी दोबारा सक्रिय हो सकेंगे।

ऑडिट में सामने आई खामियाँ

तकनीकी टीमों ने सभी 75 स्कूलों का निरीक्षण पूरा कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। ऑडिट में पाया गया कि अधिकांश स्कूलों में वर्षा जल संचयन प्रणालियाँ पहले से मौजूद थीं, लेकिन कई वर्षों से बंद पड़ी थीं या उनका उचित रखरखाव नहीं हुआ था।

कई संचयन गड्ढे पूरी तरह जाम पाए गए, जबकि कई में प्लास्टिक कचरा, गाद, मलबा और अन्य अपशिष्ट भरा था। कुछ मामलों में स्कूल प्रशासन को यह भी जानकारी नहीं थी कि परिसर में ऐसी संरचनाएँ मौजूद हैं। बयान के अनुसार, कई संरचनाओं में डिज़ाइन संबंधी कमियाँ भी पाई गईं।

आम जनता और भूजल पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली हर साल मानसून में जलभराव और गर्मियों में जल संकट दोनों का सामना करती है। गौरतलब है कि वर्षा जल को नालियों में बहने से रोककर भूजल स्तर सुधारना दिल्ली की दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए अहम है। निरीक्षण में सामने आया कि कई स्थानों पर वर्षा जल सीधे नालियों में बह रहा था, जिससे जल संरक्षण का उद्देश्य विफल हो रहा था।

यदि यह पहल समयबद्ध तरीके से लागू होती है, तो आने वाले मानसून सत्र से ही दिल्ली के भूजल पुनर्भरण में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे वर्षों से बंद पड़ी थीं और कुछ स्कूलों को उनके अस्तित्व तक की जानकारी नहीं थी। असली सवाल यह है कि मानसून से ठीक पहले की यह हड़बड़ी कितनी टिकाऊ होगी, जबकि अतीत में भी ऐसे निर्देश दिए जाते रहे हैं और अगले सत्र में फिर वही स्थिति। 'एहसास' मॉडल की संकल्पना सराहनीय है, लेकिन बिना नियमित रखरखाव बजट और जवाबदेही तंत्र के, यह पहल भी अगले ऑडिट में बंद प्रणालियों की सूची में शामिल हो सकती है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली के एलजी टी.एस. संधू ने रेनवॉटर हार्वेस्टिंग को लेकर क्या निर्देश दिए?
एलजी संधू ने 11 जून को DDA, MCD और NDMC के अधिकारियों को मानसून से पहले राजधानी की सभी वर्षा जल संचयन प्रणालियाँ पूरी तरह कार्यशील बनाने के लिए सख्त समयसीमा तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने सरकारी स्कूलों और इमारतों में संरचनात्मक मरम्मत को प्राथमिकता देने को कहा।
दिल्ली के 75 स्कूलों में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग से क्या हासिल होगा?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, 75 सीएम श्री स्कूलों में प्रणालियाँ पुनर्जीवित होने से प्रतिवर्ष लगभग 50 करोड़ लीटर वर्षा जल संचयन क्षमता विकसित होगी। इससे भूजल स्तर में सुधार और सूखे बोरवेल के पुनः सक्रिय होने की उम्मीद है।
'एहसास' मॉडल क्या है और इसे क्यों चुना गया?
'एहसास' मॉडल को वर्ष 2021 में दिल्ली जल बोर्ड ने स्वीकृत किया था। यह कम लागत, कम जगह की आवश्यकता और लगभग शून्य रखरखाव के लिए जाना जाता है। इसमें छत से एकत्रित जल को फिल्टर कर बोरवेल और भंडारण इकाइयों से जोड़ा जाता है।
स्कूलों के ऑडिट में क्या खामियाँ सामने आईं?
तकनीकी टीमों के निरीक्षण में पाया गया कि अधिकांश स्कूलों में प्रणालियाँ वर्षों से बंद या उपेक्षित थीं। कई गड्ढे गाद, प्लास्टिक और मलबे से जाम थे, कुछ में डिज़ाइन की खामियाँ थीं, और कई स्थानों पर वर्षा जल सीधे नालियों में बह रहा था।
दिल्ली में भूजल पुनर्भरण के लिए यह पहल क्यों ज़रूरी है?
दिल्ली हर साल मानसून में जलभराव और गर्मियों में गंभीर जल संकट दोनों का सामना करती है। वर्षा जल को नालियों में बहने से रोककर भूजल पुनर्भरण करना शहर की दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए अनिवार्य माना जाता है, और यही इस अभियान का मूल उद्देश्य है।
राष्ट्र प्रेस
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