यूसीसी से आदिवासी परंपराओं को खतरा नहीं, ओपी चौधरी बोले — विपक्ष फैला रहा भ्रम
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने 14 सितंबर 2026 को रायपुर में स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से आदिवासी समाज की परंपराओं और संस्कृति को कोई नुकसान नहीं होगा, और विपक्षी दल इस मुद्दे पर जानबूझकर भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का पुरज़ोर समर्थन किया जिसमें 2029 तक भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी लागू करने की बात कही गई है।
यूसीसी और संविधान का आधार
चौधरी ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को समान नागरिक संहिता की दिशा में प्रयास करने का निर्देश दिया गया है, और यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के चुनावी घोषणापत्र में भी शामिल है। उनके अनुसार, गृह मंत्री शाह अपने संकल्पों को दृढ़ता से लागू करने के लिए जाने जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा इसे एक प्रगतिशील और समान अधिकारों वाले समाज की दिशा में आवश्यक कदम मानती है।
आदिवासी समाज की आशंकाएँ और विपक्ष पर आरोप
यूसीसी को लेकर आदिवासी समुदाय में जताई जा रही चिंताओं पर चौधरी ने कहा कि यह आशंकाएँ निराधार हैं और विपक्षी ताकतें जानबूझकर अफवाहें फैला रही हैं। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यूसीसी नहीं होने के कारण मुस्लिम समाज की महिलाओं को संपत्ति में अधिकार, तीन तलाक और बहुविवाह जैसे मुद्दों पर लंबे समय से कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। उनके अनुसार, किसी भी वर्ग की महिलाओं को समान अधिकार मिलना संवैधानिक ज़िम्मेदारी है।
ब्रिक्स सम्मेलन और विपक्ष पर 'कुर्सी फर्स्ट' का आरोप
ब्रिक्स सम्मेलन में विपक्षी दलों के कुछ मुख्यमंत्रियों के शामिल न होने पर चौधरी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा का सिद्धांत 'नेशन फर्स्ट' है, जबकि विपक्ष 'कुर्सी फर्स्ट' की राजनीति करता है। उन्होंने ज़ोर दिया कि जब भारत किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी भूमिका निभा रहा हो, तब देश के भीतर राजनीतिक मतभेदों को उस मंच से जोड़ना राष्ट्रहित में नहीं है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में, जहाँ वैश्विक दक्षिण यानी चीन, रूस, ब्राज़ील और भारत जैसे देशों की भूमिका बढ़ रही है, ब्रिक्स की प्रासंगिकता और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
भारत-चीन संबंध और एलएसी पर स्थिति
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्टों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी सेना PLA की तैनाती में कमी और द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के संकेतों के बारे में पूछे जाने पर चौधरी ने केंद्र सरकार की कूटनीति को सराहा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी विभिन्न देशों के साथ भारत के राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को नई दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने आगाह किया कि चीन के साथ संबंधों में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं, इसलिए भारत को हर स्थिति के लिए तैयार रहना होगा।
विकसित भारत 2047 का लक्ष्य
चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार की विदेश नीति में भारत के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। आर्थिक, सामरिक और रक्षा क्षेत्र में देश को मजबूत बनाते हुए 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य सरकार के हर कदम में परिलक्षित होता है। यूसीसी पर आगे की कार्रवाई भाजपा शासित राज्यों में अगले कुछ वर्षों में किस रूप में सामने आती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।