छत्तीसगढ़ सरकार की नई पहल: यूसीसी और महिलाओं को संपत्ति में सशक्त बनाना
सारांश
Key Takeaways
- यूसीसी का उद्देश्य कानूनी समानता लाना है।
- महिलाओं के नाम पर संपत्ति पंजीकरण में 50%25 छूट।
- समिति का गठन नागरिकों से सुझाव लेने के लिए किया गया।
- 153 करोड़ रुपये के राजस्व पर असर।
- महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक दीर्घकालिक निवेश।
नई दिल्ली 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य में कानूनी समानता और महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
कैबिनेट ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की प्रक्रिया को शुरू करने का निर्णय लिया है, साथ ही महिलाओं के नाम पर संपत्ति पंजीकरण शुल्क में 50 प्रतिशत छूट देने का ऐलान भी किया है, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया गया है।
राज्य सरकार ने यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाने का निर्णय लिया है। यह समिति नागरिकों, विशेषज्ञों और विभिन्न संगठनों से सुझाव लेकर एक विस्तृत मसौदा तैयार करेगी, जिसे बाद में विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत विधानसभा में पेश किया जाएगा।
वर्तमान में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में विभिन्न धर्मों के अलग-अलग कानूनों से उत्पन्न जटिलताओं को दूर कर एक समान और सरल व्यवस्था स्थापित करना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है। सरकार का मानना है कि इससे न्याय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुगम होगी, साथ ही महिलाओं को समान अधिकारों की प्राप्ति में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ जैसे विविधतापूर्ण राज्य में, जहां आदिवासी, ग्रामीण और शहरी समाज साथ-साथ विकसित हो रहे हैं, एक समान नागरिक संहिता कानूनी भ्रम को कम करने और सामाजिक संतुलन को मजबूत करने में सहायक हो सकती है। यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यूसीसी लंबे समय से देश में चर्चा का विषय रहा है।
कैबिनेट ने महिलाओं के हित में एक और बड़ा निर्णय लेते हुए उनके नाम पर संपत्ति पंजीकरण शुल्क में 50 प्रतिशत छूट देने की घोषणा की है। इस फैसले से महिलाओं के लिए जमीन और मकान खरीदना अधिक आसान और किफायती होगा। साथ ही, परिवारों में संपत्ति महिलाओं के नाम पर दर्ज कराने की प्रवृत्ति बढ़ने की उम्मीद है, जिससे उनकी आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सुरक्षा मजबूत होगी।
राज्य सरकार के अनुसार, इस निर्णय से लगभग 153 करोड़ रुपये के राजस्व पर असर पड़ेगा, लेकिन इसे महिला सशक्तीकरण के लिए एक दीर्घकालिक सामाजिक निवेश के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की संपत्ति में भागीदारी बढ़ाने में प्रभावी साबित हो सकती है।