पाली नगर निगम चुनाव: कांग्रेस ने BJP अध्यक्ष मदन राठौड़ के गढ़ में 29 सीटें जीतीं, निर्दलीय बनेंगे किंगमेकर
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के पाली नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को उसके सबसे मज़बूत किले में बड़ा झटका दिया है। 65 सदस्यीय इस नगर पालिका में कांग्रेस 29 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि BJP को केवल 21 सीटें मिलीं — यानी कांग्रेस आठ सीटों की बढ़त पर रही। यह पाली में 10 वर्षों से BJP के वर्चस्व का अंत करने की दिशा में एक निर्णायक संकेत है।
राठौड़ के वार्ड में भी हार
पाली, राजस्थान BJP अध्यक्ष मदन राठौड़ का गृह जिला है। राठौड़ कई बार पाली में BJP के जिला अध्यक्ष रह चुके हैं और सुमेरपुर से दो बार विधायक भी रहे हैं। इस नतीजे को इसलिए विशेष रूप से राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कांग्रेस ने राठौड़ के अपने वार्ड में भी BJP को पराजित किया। यह जीत यह स्पष्ट संदेश देती है कि BJP की राज्य इकाई के नेतृत्व की पकड़ उनके अपने गृह क्षेत्र में कमज़ोर पड़ी है।
सीटों का गणित और बहुमत की चुनौती
कांग्रेस ने 29 वार्ड जीते, BJP को 21 सीटें मिलीं और 15 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे। 65 सदस्यीय नगर पालिका में स्पष्ट बहुमत के लिए 33 सीटें आवश्यक हैं, जो कांग्रेस अकेले हासिल नहीं कर सकी। ऐसे में बोर्ड गठन के लिए 15 निर्दलीय पार्षद निर्णायक भूमिका में आ गए हैं।
निर्दलीय पार्षद: असली किंगमेकर
मेयर पद पर दावा करने और नगर पालिका बोर्ड बनाने के लिए कांग्रेस को इन निर्दलीय पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा। वहीं, BJP भी इन्हीं पार्षदों को अपने पक्ष में लाकर कांग्रेस को सत्ता से दूर रखने की कोशिश कर सकती है। गौरतलब है कि राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों में निर्दलीयों की ऐसी भूमिका नई नहीं है, लेकिन BJP के प्रदेश अध्यक्ष के गृह जिले में यह परिदृश्य विशेष राजनीतिक महत्त्व रखता है।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
यह नतीजा राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों के सबसे चर्चित परिणामों में से एक माना जा रहा है। पाली में BJP का 10 वर्षों से कब्ज़ा था और यह जिला पार्टी की राज्य इकाई के नेतृत्व से गहराई से जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में निर्दलीय पार्षदों को मनाने के लिए दोनों प्रमुख दलों के बीच ज़ोरदार राजनीतिक जोड़-तोड़ और बातचीत का दौर देखने को मिल सकता है। बोर्ड गठन की यह प्रक्रिया पाली में अगले कई महीनों की स्थानीय राजनीति की दिशा तय करेगी।